NTA Reform: पेपर लीक कैसे रोकेगी विशेषज्ञ समिति? IIT मद्रास के निदेशक ने तकनीक के इस्तेमाल पर क्या कहा
NTA Exam Reforms: एनटीए परीक्षा सुधार समिति के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी ने कहा कि नई परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और पेपर लीक से सुरक्षित होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में हर छात्र को उसके अंकों की गणना का स्पष्ट आधार भी बताया जाना चाहिए।
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NTA Exam Reforms: देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल शुरू कर दी है। परीक्षा सुधारों के लिए गठित विशेषज्ञ समिति में आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी को भी शामिल किया गया है।
प्रो. कामकोटी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और पूरी प्रक्रिया जवाबदेह बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर छात्र को यह स्पष्ट बताया जा सके कि उसके अंक कैसे निकाले गए।
'हर अंक का हिसाब देना होगा'
एएनआई से बातचीत में प्रो. कामकोटी ने कहा कि उनका नाम उन बहु-विषयक विशेषज्ञों की टीम में शामिल किया गया है, जो एनटीए की परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों पर काम करेगी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र को 90 अंक मिलते हैं, तो एनटीए को यह भी बताना चाहिए कि यह अंक किस आधार पर दिए गए। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए आधुनिक तकनीक की जरूरत है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।
परीक्षा प्रणाली चार सिद्धांतों पर आधारित होगी
प्रो. कामकोटी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञ समिति को जो उद्देश्य दिया है, उसके अनुसार नई परीक्षा प्रणाली को चार प्रमुख आधारों पर विकसित किया जाएगा-
- पूरी तरह पारदर्शी (Transparent)
- मजबूत (Robust)
- पेपर लीक से सुरक्षित (Leak-proof)
- तकनीक आधारित (Technology-driven)
उन्होंने कहा कि देश में वर्षों से सार्वजनिक परीक्षाएं होती रही हैं, लेकिन अब परीक्षाओं का दायरा और अभ्यर्थियों की संख्या काफी बढ़ गई है। इसलिए व्यवस्था को भी उसी स्तर पर मजबूत करना होगा।
नीट 2024 और 2026 की घटनाओं का किया जिक्र
प्रो. कामकोटी ने कहा कि नीट-यूजी 2024 में प्रश्नपत्र वितरण के दौरान लीक हुआ था। जांच एजेंसियों ने बताया था कि इसका असर केवल 40 से 50 छात्रों तक सीमित था और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी पूरे मामले की सुनवाई के बाद दोबारा परीक्षा कराने की आवश्यकता नहीं मानी थी।
उन्होंने बताया कि इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने डॉ. के. राधाकृष्णन समिति का गठन किया था, जिसने करीब 200 सिफारिशें दीं। एनटीए ने इनमें से कई सुझाव लागू किए, जिससे प्रश्नपत्र के वितरण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया।
2026 में सबसे बड़ी चुनौती प्रश्नपत्र तैयार करने वालों पर भरोसा
प्रो. कामकोटी ने कहा कि नीट 2026 में पेपर लीक का कारण वितरण व्यवस्था नहीं थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस बार लीक की शुरुआत प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति के स्तर से हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा प्रणाली में दो वर्ग सबसे महत्वपूर्ण होते हैं-
- प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञ
- परीक्षा केंद्रों के निरीक्षक
निरीक्षकों की निगरानी के लिए कैमरों जैसी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती ऐसे प्रश्नपत्र तैयार करने वालों पर भरोसा कायम रखना है, जो पूरी गोपनीयता बनाए रखें।
एआई पूरी तरह प्रश्नपत्र तैयार नहीं कर सकता
प्रो. कामकोटी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सवाल तैयार करने में मदद कर सकता है, लेकिन वह पूरी तरह प्रश्नपत्र तैयार नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि एआई प्रश्न बना सकता है, लेकिन उनकी गुणवत्ता, सही उत्तर और विभिन्न भाषाओं में अनुवाद की जांच इंसानों को ही करनी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नीट 12 भाषाओं में आयोजित होती है, इसलिए प्रत्येक अनुवाद की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है।
अगले परीक्षा सत्र से पहले सुधार लागू करने की तैयारी
प्रो. कामकोटी ने कहा कि अगला परीक्षा सत्र दिसंबर से शुरू होगा। इससे पहले समिति विभिन्न परीक्षाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों पर काम करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में संसद भी परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान करेगी।