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Communication: चुप रहना हमेशा बेहतर नहीं होता, नाराजगी बढ़ाने से बचें; अपनी बात को समय पर और मजबूती से कहें

पीटर ब्रेगमैन, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू Published by: शाहीन परवीन Updated Wed, 21 Jan 2026 12:20 PM IST
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सार

Express Feelings: चुप रहना हमेशा सही नहीं होता। अपने मन की बात समय पर और सम्मानजनक तरीके से कहने से नाराजगी बढ़ने से बचा जा सकता है और रिश्ते भी मजबूत रहते हैं।

Silence Isn’t Always Golden: Speak Up on Time and Avoid Growing Resentment
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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Communication: कई बार ऐसा होता है कि जब कोई व्यक्ति गुस्से या नाराजगी में अपनी बात सीधे शब्दों में नहीं कह पाता, तो वह उसे अपने व्यवहार के जरिये दिखाने लगता है-जैसे चुप रहना, बात टालना, देर से जवाब देना या काम को ठीक से न करना। खासकर कार्यस्थल या औपचारिक रिश्तों में लोग टकराव से बचने के लिए चुप रहना बेहतर समझते हैं। बाहर से देखने पर सब सामान्य लगता है, लेकिन उनके अंदर ही अंदर नाराजगी बनी रहती है। इस तरह के रवैये को पैसिव-एग्रेसिव व्यवहार कहा जाता है।

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ऐसी स्थिति में कई बार व्यक्ति खुद भी नहीं समझ पाता कि वह ऐसा कर रहा है। अगर आप समय रहते ही इस व्यवहार को पहचान लेते हैं और खुलकर व शांति से अपनी बात कहना सीख लेते हैं, तो दूसरों के साथ गलतफहमियां कम हो सकती हैं और रिश्ते व काम दोनों बेहतर हो सकते हैं।

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खुद को परखें

गुस्सा भी बाकी भावनाओं की तरह हमें कुछ बताता है। यह इशारा करता है कि हमारी कोई जरूरत पूरी नहीं हो रही या हमें अनदेखा किया जा रहा है। इसलिए सबसे जरूरी है अपने गुस्से को पहचानना। अक्सर हम गुस्से को दवा देते हैं, इसलिए समझ ही नहीं पाते कि हम नाराज हैं। ऐसे में थोड़ा रुककर सोचें कि गुस्सा क्यों आया। अगर सामने वाले के व्यवहार की कोई वजह समझ में आ जाए, तो गुस्सा अपने आप कम हो सकता है। और अगर वजह सही न लगे, तो संभव है कि वह व्यक्ति अपनी गलती समझकर अपना व्यवहार बदल ले। 

अनुभव लिखते चलें

कई बार पैसिव-एग्रेसिव व्यवहार हमारी आदत बन जाता है और हमें पता भी नहीं चलता। इसे समझने का आसान तरीका है कि उन हालात को लिखें, जब आपको गुस्सा आया, जैसे-किसी सहकर्मी की लापरवाही या किसी का आपको नीचा दिखाना। जब आप ऐसे अनुभव लिखते हैं, तो धीरे-धीरे समझ आने लगता है कि किन लोगों या परिस्थितियों से आपको बार-बार गुस्सा आता है। साथ ही यह भी नोट करें कि उस समय आप क्या सोच रहे थे। इससे अपने व्यवहार को पहचानना और सुधारना आसान हो जाता है।

चुप्पी तोड़े और बात करें

यह व्यवहार तब शुरू होता है, जब हम अपना गुस्सा दबा लेते हैं। अक्सर हम सोचते हैं कि गुस्सा दिखाना गलत है या इससे रिश्ते खराब हो जाएंगे। कभी-कभी पुराने अनुभव भी इसकी वजह बनते हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि या तो अपने गुस्से को शांत करें या फिर चुप्पी तोड़कर बात करें। यह आसान नहीं होता और डर भी लगता है, लेकिन अपने लिए बोलना जरूरी है। लंबे समय तक चुप रहकर मन में नाराजगी रखने से बेहतर है कि अपनी बात साफ और सम्मान के साथ कह दी जाए।

छोटे अभ्यास अपनाएं

जब कोई आपको गुस्सा दिलाए, तो यह आप पर है कि आप कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। सबसे पहले गुस्सा बढ़ने से पहले खुद को शांत करें। इसके बाद ताने या चुप्पी की जगह साफ और सीधे तरीके से बात करें। तुरंत तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लें, दस तक गिर्ने, शांत संगीत सुनें, थोड़ी देर टहलें या ताजी हवा लें। ऐसे छोटे अभ्यास आपको गुस्से को समझने, पैसिव-एग्रेसिव व्यवहार छोड़ने और शांतिपूर्वक बातचीत करने में मदद कर सकते हैं।

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