सीट का समीकरण: थाना भवन ने सिर्फ एक चेहरे को लगातार दो बार चुना, ऐसा इस सीट का चुनावी इतिहास
थानाभवन विधानसभा सीट शामली जिले का हिस्सा है। बीते चार में दो चुनाव भाजपा और दो में रालोद को जीत मिली है। थानाभवन विधानसभा सीट का पूरा सियासी इतिहास, जातीय गणित और यहां के दिलचस्प चुनावी रिकॉर्ड क्या हैं? आइये जानते हैं...
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अब आठ महीने से भी कम का समय बचा है। राज्य में इन चुनावों को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। यूपी विधानसभा चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' सीरीज में आज बात शामली जिले के अंतर्गत आने वाली थाना भवन विधानसभा सीट की। इस सीट के इतिहास को देखा जाए तो यहां निवर्तमान विधायक को अब तक सिर्फ एक बार जीत मिली है। कुल मिलाकर चार चेहरों को थाना भवन की जनता ने दो बार अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए, इनमें से सिर्फ सुरेश राणा ऐसे रहे जिन्हें ये मौका लगातार दो बार मिला।
आइये जानते हैं शामली विधानसभा सीट का इतिहास
पहले जानें- किस जिले में आती है थाना भवन की सीट
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला है शामली। इस जिले के अंतर्गत तीन तहसील, पांच ब्लॉक और 322 गांव आते हैं। पहले इसका अधिकांश हिस्सा मुजफ्फरनगर जिले में आता था। अलग जिला बनने के बाद शामली में तीन विधानसभा सीटें आईं। इनमें- कैराना, शामली और थानाभवन विधानसभाएं शामिल हैं। थाना भवन विधानसभा सीट 1967 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। थाना भवन सीट पर पहली बार चुनाव 1974 में कराए गए थे। 1974 के पहले इस सीट का अधिकांश हिस्सा भवन विधासनभा सीट में आता था। यानी भवन विधानसभा बाद में थाना भवन सीट में बदल गई। 1957 के विधानसभा चुनाव में भवन सीट से प्रसपा के गयूर अली खान जीते थे। वहीं, 1962 और 1967 में भवन विधानसभा सीट से कांग्रेस के आरसी सिंह को जीत मिली। जबकि, 1969 में राव अब्दुर राफे खान जीते थे। खान ने भारतीय क्रांति दल के टिकट पर जीत दर्ज की थी।
1. 1974 का चुनाव
1974 में थाना भवन नाम से सीट अस्तित्व में आई। थाना भवन सीट पर हुए पहले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मलखान सिंह ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 26,561 (40.75%) वोट मिले थे। इस चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के राव अब्दुर रफे खान को हराया था। रफे खान को 25,048 वोट मिले।
2. 1977 का चुनाव
इस चुनाव में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकलकर जनता पार्टी के पास चली गई। जनता पार्टी के उम्मीदवार मूल चंद ने 21,727 (42.95%) वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी। उन्होंने 1974 के विजेता कांग्रेस के मलखान सिंह को हराया था। मलखान सिंह को इस चुनाव में 19,197 वोट से संतोष करना पड़ा था।
3. 1980 का चुनाव
1980 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (आई) के उम्मीदवार सोमांश प्रकाश इस सीट से विजयी रहे थे। उन्हें 38,754 वोट मिले थे और उन्होंने जनता पार्टी के राव अब्दुल रफे खान को हराया था, जिन्हें 23,626 वोट ही मिल पाए। तीसरे नंबर पर कांग्रेस से टूटकर बनी कांग्रेस (यू) रही, जिसके उम्मीदवार को 6186 वोट ही मिले।
एक बार फिर थाना भवन की सीट एक सिटिंग विधायक को हार का सामना करना पड़ा। । इस बार लोक क्रांति दल के आमिर आलम खान ने दो हजार से भी कम वोट के अंतर से कांग्रेस के सोमांश प्रकाश को हरा दिया। जहां आमिर आलम को चुनाव में 49,578 वोट मिले तो वहीं सोमांश प्रकाश 47,883 वोट पा सके।
5. 1989 का चुनाव
1989 के चुनाव में थाना भवन सीट पर कांग्रेस की वापसी हुई। इसके उम्मीदवार नकली सिंह ने नौ हजार वोटों के अंतर से जनता दल के एजाज अली खान को शिकस्त दी। जहां नकली को इस चुनाव में 54,229 वोट मिले, तो वहीं एजाज को 45,150 वोट हासिल हुए थे।
6. 1991 का चुनाव
बीते दो चुनाव में कांग्रेस से लड़ चुके सोमांश प्रकाश ने इस बार जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्हें 41,007 वोट मिले। हालांकि, इस चुनाव में भाजपा उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी के तौर पर उभरी। इसके जगत सिंह उर्फ जग सिंह को 33,069 वोट मिले। एक निर्दलीय उम्मीदवार उदयबीर इस चुनाव में 13,917 वोट पाने में सफल रहे। वहीं, कांग्रेस चुनाव में चौथे स्थान पर खिसक गई।
भाजपा के मंदिर आंदोलन का असर कैराना के साथ-साथ थाना भवन सीट पर भी दिखा। यहां तो भाजपा के उम्मीदवार जगत सिंह चुनाव जीतने में सफल हुए। उन्होंने पूर्व में इस सीट से विधायक रह चुके आमिर आलम खान और नकली सिंह को मात दी। जहां जगत सिंह को 52,707 वोट मिले तो वहीं निर्दलीय आमिर आलम 38,292 वोट हासिल करने में सफल रहे। कांग्रेस के नकली सिंह को चुनाव में 21,290 वोट मिले। इसके अलावा बसपा के मोहम्मद इस्लाम 12,615 वोट के साथ चौथे स्थान पर रहे।
8. 1996 का चुनाव
इस चुनाव में पहली बार सीट पर समाजवादी पार्टी का आगमन हुआ। न सिर्फ आगमन हुआ, बल्कि पार्टी की उम्मीदवार आमिर आलम खान ने जीत भी दर्ज की। उन्हें कुल 60,930 वोट मिले थे और उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार धरम पाल सिंह, जिन्हें 57,767 वोट मिले, को हराया था। बसपा के चंद सिंह कश्यप को 31878 वोट मिले थे। साल 2000 में यहां उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में सपा के जगत सिंह को जीत मिली।
9. 2002 का चुनाव
2002 के चुनाव में थाना भवन विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर जीत हासिल की। इस चुनाव में सपा के प्रत्याशी किरण पाल विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के जगत सिंह को 9,702 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में किरण पाल को 42,095 वोट मिले, जबकि जगत सिंह को 32,393 वोट मिले।
इस चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रत्याशी अब्दुल वारिश खान विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अनूप सिंह को 5,403 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अब्दुल वारिस खान को 41,204 वोट मिले, जबकि अनूप सिंह को 35,801 वोट मिले।
11. 2012 का चुनाव
इस चुनाव में थाना भवन विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बाजी मारी। चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार सुरेश कुमार ने जीत दर्ज की। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अशरफ अली खान को महज 265 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुरेश कुमार राणा को 53,719 वोट मिले, जबकि अशरफ अली खान को 53,454 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अब्दुल वारिश खान 50,001 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
2017 के विधानसभा चुनाव में थाना भवन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सुरेश कुमार राणा ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इसके साथ ही राणा थाना भवन सीट पर लगातार दो बार जीत दर्ज करने वाले पहले शख्स बन गए। इस बार उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अब्दुल वारिश खान को 16,817 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुरेश कुमार को 90,995 वोट मिले, जबकि अब्दुल वारिश खान को 74,178 वोट मिले। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के राव जावेद 31,275 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
13. 2022 का चुनाव
इस चुनाव में भाजपा की लगातार जीत के सिलसिले को राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रत्याशी अशरफ अली खान ने रोक दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुरेश कुमार राणा को 10,806 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अशरफ अली खान को 1,03,751 वोट मिले, जबकि सुरेश कुमार राणा को 92,945 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जहीर मलिक 11,039 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।