क्या है फिल्म 'सिटिजन विजिलेंट' की कहानी? जर्मनी-ब्रिटेन में बैन के बाद एलन मस्क ने एक्स पर कर डाली रिलीज
Citizen Vigilante Controversy: अभिनेता आर्मी हैमर की एक्शन थ्रिलर फिल्म 'सिटिजन विजिलेंट' पर विवाद है। जर्मनी और ब्रिटेन में इसे बैन किया गया है। वहीं, इस फिल्म को कथित तौर पर अप्रवासी विरोधी और बहुत ज्यादा हिंसक बताया जा रहा है। कैसे शुरू हुआ विवाद और क्या है पूरा मामला? जानिए
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विस्तार
फिल्म 'सिटिजन विजिलेंट' सुर्खियों में है। इस फिल्म को कथित तौर पर एंटी-इमिग्रेंट यानी प्रवासी विरोधी बताया जा रहा है। जर्मनी में फिल्म पर प्रतिबंध है और सिनेमाघरों में नहीं रिलीज हुई है। ब्रिटेन में भी बैन है। वहीं, अमेरिका में कुछ सीमित स्क्रींस पर यह लगी है। फिल्म का यह विवाद तब और बड़ा हो गया, जब इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया है। दरअसल, विवाद और प्रतिबंधों के बीच 'सिटिजन विजिलेंट' को एलन मस्क ने 48 घंटे के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर रिलीज कर दिया है। आखिर क्यों है विवाद? क्या है फिल्म की कहानी?
निर्देशक के अपने ही देश में नहीं रिलीज हुई फिल्म
नामी जर्मन फिल्म निर्माता उवे बोल के निर्देशन में बनी 'सिटिजन विजिलेंट' एक ऐसे शख्स माइकल सैंडर्स (आर्मी हैमर) की कहानी है, जो कानून हाथ में ले लेता है। वह भ्रष्ट अधिकारियों को निशाना बनाता है। फिर आपराधिक मानसिकता वाले अप्रवासियों को निशाना बनाकर बेरहमी से गोलियां चलाता है। अत्यधिक हिंसा वाले सीन और एंटी-इमिग्रेशन (प्रवासी-विरोधी) करार दिए जाने के कारण फिल्म को जर्मनी में उम्र संबंधी रेटिंग नहीं मिली है, लिहाजा वहां यह सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी है।
क्या है फिल्म की कहानी?
एक तरफ जर्मनी और ब्रिटेन ने इस फिल्म को प्रवासियों के खिलाफ बताते हुए प्रतिबंध लगाया है। दूसरी तरफ एलन मस्क ने पूरी फिल्म एक्स पर डाल दी है। फिल्म की शुरुआत माइकल सैंडर्स से होती है, जो एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी रह चुका है और अब व्यवसाय में लगा है। वह यूरोप शिफ्ट हो चुका है। शहर में घूमते हुए वह कुछ ऐसे प्रवासियों को देखता है, जो शहरों में गंदगी फैलाते हैं। आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं। यूरोप के लोगों को वह इन प्रवासियों का शिकार बनते देखता है। वहीं, इन प्रवासियों को कुछ अधिकारी बचा रहे होते हैं। ऐसे में माइकल खुद कानून हाथ में लेकर रात के अंधेरे में ऐसे प्रवासियों को सबक सिखाने निकलता है और इनके हिमायती भ्रष्ट अधिकारियों को भी सबक सिखाता है।
दो धड़ों में बंटे लोग, किसने क्या कहा?
फिल्म में प्रवासियों के एक समूह द्वारा 14 वर्षीय बच्ची के शोषण की घटना भी दिखाई गई है। फिल्म के मुताबिक, अदालत ने अपराधियों की कम उम्र और शरणार्थी होने की दलील देकर रिहा कर दिया। बच्ची के शोषण का बदला लेने माइकल निकलता है। फिल्म का अंत काफी विवादित और हिंसक है। इसी के चलते इस पर हंगामा शुरू हुआ है। अब सोशल मीडिया पर फिल्म को रिलीज किए जाने के बाद इस विवाद को और हवा मिल गई है। दर्शक दो पक्षों में बंटे दिख रहे हैं। एक तरफ जो दर्शक फिल्म के पक्ष में हैं, वह इस पर लगे बैन को अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध बता रहे हैं। वहीं, जो लोग फिल्म का विरोध कर रहे हैं, वे इस फैसले से खुश हैं। उनका मानना है कि फिल्म को रिलीज किए जाने से लोगों के मन में प्रवासियों के प्रति नकारात्मकता फैलेगी।