Exclusive: ‘भूत बंगला’ को अक्षय कुमार ने कहा लॉजिकल फिल्म, बोले- ‘यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है’
Akshay Kumar Exclusive Interview: अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। इस फिल्म से जुड़ी कुछ खास बातें अक्षय कुमार ने अमर उजाला के साथ साझा की हैं।
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अक्षय कुमार एक्शन, सीरियस किरदारों में दर्शकों को पसंद आते हैं। लेकिन जब वह कॉमेडी करते हैं तो फैंस का दिल जीत लेते हैं। जल्द ही वह हॉरर-काॅमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ में दर्शकों को डराएंगे भी और हंसाएंगे भी। हाल ही में अमर उजाला डिजिटल से अक्षय कुमार ने अपनी इस फिल्म, डायरेक्टर प्रियदर्शन को लेकर लंबी बातचीत की। पढ़िए अक्षय कुमार से हुई बातचीत के चुनिंदा अंश-
प्रियदर्शन के साथ काम करना पहले जितना आसान
अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी ने ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भागम भाग’, ‘भूल भुलैया’, ‘दे दना दन’, ‘खट्टा मीठा’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। अब 14 साल बाद दोनों ‘भूत बंगला’ के जरिए फिर साथ लौटे हैं। अक्षय कुमार ने प्रियदर्शन के साथ काम करने के अनुभव के बारे में कहा,‘14 साल पहले भी ये ऐसे ही लगते थे, आज भी वैसे ही लगते हैं। इंसान पर वक्त का असर होना चाहिए, इन पर तो कुछ हुआ ही नहीं। (हंसते हुए) सबसे अच्छी बात है कि इनके साथ काम करने में कभी टेंशन नहीं होती है। कोई दबाव नहीं होता है। कोई चिल्लाना नहीं, कोई अनावश्यक तनाव नहीं। हम लोग आते हैं, काम करते हैं, मजे करते हैं और घर चले जाते हैं। फिल्म ऐसे ही बनाई जाती है।’
‘भूत बंगला’ में अलग तरह की कहानी
अक्षय कुमार अपनी अपकमिंग फिल्म ‘भूत बंगला’ के बारे में कहते हैं, ‘यह सिर्फ एक आम हॉरर कॉमेडी नहीं है। फिल्म में फैंटेसी है। लोककथा और काला जादू भी है। साथ ही कहानी में तर्क भी है। अक्सर फोकलोर वाली फिल्मों में लॉजिक नहीं रहता है, क्योंकि भूत कहीं से भी आ सकता है, कुछ भी हो सकता है। जब हमें ‘भूत बंगला’ की स्क्रिप्ट मिली थी, तो उसके अंदर जो लॉजिक नहीं था। प्रियदर्शन सर ने इसमें लॉजिक डाला। यह बहुत बड़ी बात है। मुझे लगता है कि हमारी फिल्म के अंदर जो लॉजिक आता है, यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।’
वामिका गब्बी के साथ स्टंट करते वक्त डर गया था
इसी बातचीत में वामिका गब्बी के साथ एक जोखिम भरी सिचुएशन का जिक्र भी अक्षय कुमार ने किया। वह कहते हैं, ‘एक कॉलेज इवेंट में हमने स्टंट किया था। मैं क्रेन के ऊपर खड़ा था और नीचे लोग नाच रहे थे। मुझे काफी ऊपर जाना था। वामिका भी बोलने लगी कि मैं भी आऊंगी। मैंने कहा कि इस पर केबल नहीं लगा हुआ, मत आना। लेकिन नहीं, इनको भी हीरो बनना था। बोलीं कि ऐसा मौका कहां मिलेगा? मैं भी आऊंगी। फिर ये आ गई।’
अक्षय कुमार आगे कहते हैं, ‘जब हम ऊपर गए, तो हवा बहुत चल रही थी। नीचे हजारों लोग थे। मैंने इसको कहा था कि नीचे मत देखना। बस मेरे सामने देखना। मैं एक हाथ से अपना सहारा पकड़े हुए था और एक हाथ से इसको पकड़े हुए था। अंदर से मैं बस यही सोच रहा था कि भगवान इसको ठीक-ठाक नीचे ले आओ। सच बोलूं, मुझे डर लग रहा था। नीचे आने के बाद मैंने इसको बोला कि बेटा जो तूने किया, दोबारा मत करना। किस्मत अच्छी थी कि तू बच गई। बहुत कम लोग ऐसा करते हैं।’
इतनी सारी फिल्में करने के बाद भी फिल्म रिलीज से पहले होने वाली घबराहट अक्षय कुमार के अंदर आज भी बनी हुई है। इस पर उन्होंने अपने ही अंदाज में कहा, ‘इतनी सारी फिल्में करने के बाद भी जब शुक्रवार आता है और जब फिल्म रिलीज होती है, तो घबराहट आज भी होती है। लोग कहते हैं कि बटरफ्लाई इफेक्ट होता है, लेकिन मेरे मामले में बटरफ्लाई नहीं होती, कब्ज हो जाती है। सीधी बात है। हर फिल्म के रिलीज के पहले 48 घंटे बहुत भारी होते हैं। शुक्रवार, शनिवार, रविवार या तो बहुत खुशी मिलती है या बहुत दुख होता है। बीच का कुछ नहीं होता है।’