खास मुलाकात में बोले अंग्रेजी मीडियम के निर्देशक होमी, मुस्कान से बड़ा तोहफा दूसरा कोई नहीं है
- फिल्म के निर्दशक होमी अदजानिया इससे पहले बीईंग साइरस, फाइंडिग फैनी और कॉकटेल जैसी मेट्रो शहरों वाली फिल्में बना चुके हैं
- लक्षद्वीप में स्कूबा डाइविंग सिखाने वाले होमी अदजानिया को किस्से सुनाने का शौक अपने पिता से मिला
विस्तार
आने वाले शुक्रवार को रिलीज होने जा रही इरफान खान की फिल्म 'अंग्रेजी मीडियम' को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता है। फिल्म के निर्दशक होमी अदजानिया इससे पहले बीईंग साइरस, फाइंडिग फैनी और कॉकटेल जैसी मेट्रो शहरों वाली फिल्में बना चुके हैं।
लक्षद्वीप में स्कूबा डाइविंग सिखाने वाले होमी अदजानिया को किस्से सुनाने का शौक अपने पिता से मिला। रोमांचक यात्राओं के बारे में पत्रिकाओं में लिखते रहे होमी किस्से सुनाते सुनाते ही फिल्ममेकर बन गए। वह कहते हैं, “मेरा पिता के मुताबिक जिंदगी सिर्फ वर्तमान और भूतकाल की यादगार यादें हैं। वही आपकी जिंदगी को परिभाषित करेगा। शुरू में मैं सिर्फ एक फिल्म बनाकर इसके जरिए कहानी कहना चाहता था। फिर सिलसिला चल निकला। निर्माता दिनेश विजन ने मुझ पर भरोसा किया और फिल्में बनती चली गईं।” और, अंग्रेजी मीडियम?
“इसके बनने का किस्सा भी फिल्म की तरह ही दिलचस्प है। मैं एक कातिल की कहानी बनाने की तैयारी में था और दिनेश विजन ने एक दिन बुलाकर मुझे ये कहानी सुनवाई। कहानी सुनने के बाद तो मैं अवाक रह गया, मैंने छूटते ही कह दिया कि ये फिल्म मैं बना रहा हूं। ये फिल्म दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कहानी है और ये एक ऐसा फलसफा है जिसके आगे दुनिया का दूसरा हर तोहफा बेकार है।” होमी बताते हैं।
होमी यह भी बताते हैं कि इरफान खान कमाल के कलाकार क्यों हैं। वह कहते हैं, “इस फिल्म में इरफान ने जो किया है वह चमत्कार से कम नहीं है। मैंने काफी कलाकारों के साथ काम किया है लेकिन इरफान सबमें अलग है। फिल्म में उनका बहुत ही साधारण किरदार है। लेकिन उन्होंने जो छोटी-छोटी चीजों में जो काम किया है वह कमाल का है। वह अपने में एक खजाना हैं।”
होमी बहुत मस्त मौला इंसान हैं। काम के पीछे भागते नहीं है और न ही काम को लेकर बहुत तनाव में रहते हैं। उनका जिंदगी जीने का फलसफा भी बहुत साफ है, “मैं जिंदगी भी जीना चाहता हूं। मेरा मानना है कि अगर मैं सिर्फ काम करता रहूंगा तो जिंदगी पीछे छूट जाएगी। इस वजह से मैं फिल्मों और जिंदगी का एक निश्चित अनुपात बना कर चलता हूं। जिंदगी संवाद है जो हम एक दूसरे से करते हैं। मेरी हिंदी कमजोर हो सकती है लेकिन इंसानी जज्बात ऐसी भाषा है जो पूरी दुनिया समझती है। कई बात तो मुझे लगता है कि मैं जापानी फिल्म भी बना सकता हूं।”
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