सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan

Apna Adda 27: हमारे नाम धरती पर कहीं कोई अपना टुकड़ा नहीं, कागज ही हमारा खेत और कलम हल बन गया

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 16 Jan 2025 11:07 AM IST
विज्ञापन
सार

सीरीज ‘अपना अड्डा’ में इस बार बातचीत लेखक सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ से जो अपना नाम बनाने की जिद कर चुके हैं। इनकी लिखी ऑडियो सीरीज के करीब एक हजार एपिसोड अब तक प्रसारित हो चुके हैं।

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

मुंबई में नाम कमाने की जिद लेकर आए लोगों की सीरीज ‘अपना अड्डा’ में इस बार बारी लेखक सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ की। इनकी लिखी ऑडियो सीरीज के कोई एक हजार एपिसोड अब तक प्रसारित हो चुके हैं। इस सीरीज के नियमित पाठक जानते हैं कि इसके जरिये हम छोटे शहरों, गांवों और कस्बों से मुंबई आए हुनरमंदों की शुरुआती सफलताओं की कहानियां उनके दोस्तों, परिजनों और शुभचिंतकों तक पहुंचाते हैं। ‘अपना अड्डा’ में यदि आप भी अपनी शुरुआती सफलता की कहानी प्रकाशित कराना चाहते हैं तो ‘अमर उजाला’ के फेसबुक पेज पर इस स्टोरी के लिंक के नीचे कमेंट बॉक्स में अपने बारे में बता सकते हैं। अभी पढ़िये सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ से पंकज शुक्ल की एक खास मुलाकात
Trending Videos

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सिद्धार्थ अरोड़ा का तखल्लुस सहर कैसे बना?
बात बहुत पहले की है। मैं 13-14 साल का ही था। लुधियाना स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में एक सरदार जी से बातें होने लगीं। मैं गुलजार को पढ़ रहा था, वह मेरे चेहरे को। चाय पिलाई और चल दिए। मैंने कहा नाम तो पूछा ही नहीं। उन्होंने कहा, नाम बन जाएगा तो पूछने की जरूरत ही नहीं होगी। बस बात अटक गई। गालिब की गजल ‘आह को चाहिए..’ तो सबने पढ़ी होगी। इसके मक्ते में (गजल का आखिरी शेर) में गालिब का तखल्लुस असद के नाम से है, शमा हर रंग में जलती है ‘सहर’ होने तक, से आया मेरा तखल्लुस, सहर।
विज्ञापन
विज्ञापन

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपके पुरखे मुल्तान से आए। दिल्ली में बसे। कानपुर में पनपे और आप मुंबई में?
हम उन बदनसीबों में है जिनके नाम धरती पर कोई खेती का टुकड़ा नहीं हैं। कलम हमारा हल है और कागज हमारी खेती। मां ने पान पराग जैसी कंपनी में लंबा काम किया। मेरी हाई स्कूल तक की पढ़ाई हिंडन पब्लिक स्कूल में हुई। काम तभी से मैंने करना शुरू कर दिया था। उसके बाद की सारी पढ़ाई पत्राचार के जरिये हुई।

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, ये किस्सागोई की कला कहां से सीखी?
शायद रेडियो से। ये उन दिनों की बात है जब रोज रात को आठ बजे बत्ती गुल हो जाया करती। रेडियो पर आठ से साढ़े आठ तक एक कहानी आती थी। हम सारे बच्चे बैठकर ये कहानी सुनते। ये कहानी आधी सुनाकर आरजे रुक जाता। और, मैं इसे अपनी कल्पना के अनुसार बच्चों के सामने पूरी करता। मेरी किस्सागोई यहीं से मशहूर हो चली। नौ बजे केबीसी आता था, लेकिन लोगों की दिलचस्पी मेरी उस बाकी की आधी कहानी में ज्यादा होने लगी थी। यहां तक कि बच्चों के माता-पिता, दीदी, चाची, बुआ भी आने लगीं।

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
दीपक दुआ के साथ सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रेडियो के लिए लिखने का सिलसिला कहां से शुरू हुआ?
सात साल पहले की बात है। मेरे दोस्त मनीष और मेरी एक किताब आई, रावायण। विचार मनीष का था और मैंने इस पर नवरात्र के नौ दिन और एक दिन दशहरे को मिलाकर एक समसमायिक कहानी लिखी जिसमें हमारा नायक राम-लीला में रावण की भूमिका निभाने और अपने बीवी बच्चों द्वारा छोड़े जाने के बावजूद एक बेहतर इंसान था। इसे एक रेडियो ने प्रसारित किया। पैसा तो नहीं मिला, लेकिन हमने इससे नाम बहुत कमाया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता समीक्षक दीपक दुआ के जरिये स्वीडन की कंपनी स्टोरीटेल तक पहुंचा और वहां से गाड़ी चल निकली।

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हां, ट्रेन वाली लड़की, तन्हा दिल तन्हा सफर तो खूब लोकप्रिय कहानी और सीरीज रहे हैं..
चना जोर गरम, बस एक सनम चाहिए, हर एक शहर में और लोबा जैसी सीरीज भी इसी के बाद आईं। दो एडल्ट कॉमेडी शो बी लिखे जो बदलकर अब कॉमेडी थ्रिलर बन चुके हैं और श्रोताओं को एक साल से बांधे हुए हैं। एक एडवेंचर हॉरर शो है जो अपने तीन सीजन पूरे कर चुका है। इसके बाद अभिनेता और संवाद प्रशिक्षक विकास कुमार के साथ जुड़ा। उनके एप वेल्विट पर क्राइम थ्रिलर शो कर्मकांड खूब हिट हुआ। इस पर मेरा दूसरा शो बेरहम शातिर खिलाड़ी जल्द आने वाला है।

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
सुरेंद्र मोहन पाठक के साथ सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेखन को करियर बनाने का निर्णय कैसे लिया?
राइटिंग से भी पैसे कमाए जा सकते हैं, ये हौसला मुझे सुरेन्द्र मोहन पाठक को पढ़ते-पढ़ते आया। मैं उन्हें ही एकलव्य की तरह अपना गुरु मानता हूं। गुलजार से भी काफी प्रभावित रहा। पर, कविताओं में हाथ जमा नहीं। पढ़ाकू मैं बचपन से रहा हूं। लिखा हुआ कुछ भी आंखों के सामने से गुजर जाए, सब पढ़ जाता था। दुकानों के बोर्ड्स, बड़े-बड़े होर्डिंग्स, ट्रैफिक के साइन बोर्ड्स और बस के अंदर चिपके ‘बंगाली बाबा’ के इश्तेहारी पर्चे भी पढ़ जाता था।  हर किताब या इश्तेहार आपको कुछ नये शब्द देकर जाते हैं और आपका ज़हन उसे आगे कहीं इस्तेमाल करने के लिए तिजोरी में रख लेता है। इसलिए बेहतर लेखक वही बन पाया है जो पढ़ने से नहीं चूकता।

Apna Adda with Pankaj Shukla series career journey of siddharth arora Sahar velvet radio storytel raavayan
सिद्धार्थ अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
क्या कोशिशें कर रहे हैं फिल्मों के लेखन आदि के लिए?
मुंबई की स्थान देवी हैं, मुंबा देवी। उनके दर्शन के बाद से सब अच्छा ही हो रहा है। निर्माता सौरभ जैन के लिए एक फिल्म लिख रहा हूं। एक उपन्यास को भी फिल्म की पटकथा में तब्दील कर रहा हूं। मैंने जो फिल्म बनाने के तरीके को समझा था उसमें पहले कहानी पिच करना बताया गया था, उसके बाद डायरेक्टर और एक्टर पर चर्चा होने के बाद स्क्रीनप्ले लिखने की प्रक्रिया थी जिसमें छह से आठ महीने लग जाना आम बात होती थी। लेकिन, मुंबई के एक बड़े हुनरमंद एक्टर डायरेक्टर की डिमांड आई कि तुम्हारी कहानी अच्छी लगी है, लाओ इस हफ्ते स्क्रीनप्ले भेज दो। मैं चौंक गया कि इतनी जल्दी कैसे स्क्रीनप्ले मिल सकता है? तो जवाब आया कि हिन्दी कैलंडर के एक महीने पर रखे गए नाम वाला एक्टर अभी एक महीने खाली है, तुम कुछ भी स्क्रिप्ट दे दो, हम जल्दी-जल्दी से शूट कर लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Entertainment news in Hindi related to bollywood, television, hollywood, movie reviews, etc. Stay updated with us for all breaking news from Entertainment and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed