Father's Day: DDLJ से लेकर दंगल तक बॉलीवुड फिल्मों में कितनी बदली पिता की छवि, रिश्ते में शामिल हुई नई सोच
सिनेमा समाज का आइना होता है। वक्त के साथ समाज में पिता की छवि बदली तो बड़े पर्दे पर यह बदलाव साफ नजर आने लगा। फादर्स डे के मौके पर जानिए, बॉलीवुड फिल्मों में पिता की छवि कितनी बदल गई है?
विस्तार
भारतीय समाज में एक दौर था, जब पिता को एक सख्त मिजाज शख्स के तौर पर ही देखा जाता है। पिता और संतान के रिश्ते में एक दूरी साफ नजर आती है। लेकिन वक्त बदला और पिता भी धीरे-धीरे बदलने लगे। बच्चों के प्रति वह अपने प्यार को खुलकर जाहिर करने लगे। यह बदलाव समाज ही नहीं सिनेमा भी नजर आया। एक वक्त था, जब बड़े पर्दे पर पिता की छवि भी सख्त, कठोर दिल इंसान की दिखाई जाती रही। फिर सिनेमा में ऐसी कहानियां सामने आईं, जिनमें पिता का अलग ही रूप नजर आया, जो दर्शकों के दिलों को भी छू गया। जानिए, किन फिल्मों में दिखा ये बदलाव?
DDLJ के बलदेव सिंह से गुंजन सक्सेना के अनूप तक की यात्रा
साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में काजोल के पिता के रोल में अमरीश पुरी ने बलदेव सिंह का किरदार निभाया। यह एक सख्त पिता का किरदार था, जिसे अपने बच्चों की भावनाओं का अहसास नहीं है। आखिर में वह बेटी सिमरन को अपनी जिंदगी जीने का मौका जरूर देते हैं लेकिन पूरी फिल्म में वह एक कठोर शख्स के तौर पर नजर आते हैं। इसी तरह फिल्म ‘सूर्यवंशम’ में भी अमिताभ बच्चन एक कठोर पिता के रूप में नजर आए। वहीं साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म ‘गुंजन सक्सेना’ में अनूप सक्सेना के रोल में पंकज त्रिपाठी नजर आते हैं, जो बेटी के फाइटर पायलट बनने के सपने को पूरा करने में मदद करते हैं। इसी तरह ‘अंग्रेजी मीडियम’ में भी इरफान खान का किरदार अपनी बेटी के विदेश में पढ़ने के सपने को पूरा करने के लिए जमापूंजी तक दांव पर लगा देता है। इस तरह बॉलीवुड फिल्मों में पिता की छवि में यह बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
साल 2016 में रिलीज हुई आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ की कहानी रेसलर महावीर सिंह के जीवन पर ही आधारित थी। फिल्म में आमिर खान, महावीर सिंह के रोल में दिखे। इस फिल्म की कहानी में अपनी बेटियों को रेसलर बनाने के लिए महावीर सिंह अपना जीवन लगा देते हैं। यह फिल्म समाज को भी संदेश देती है कि बेटियां, बेटों से कम नहीं है। बेटियां कोई भी उपलब्धि हासिल कर सकती हैं। इसी तरह फिल्म ‘पीकू’ में एक सीन में पीकू के पिता यानी अमिताभ बच्चन, बेटी के शादी करने के फैसले को उस पर ही पूरी तरह से छोड़ देते हैं। इस फिल्म के जरिए यह भी संदेश भी दिया गया कि बेटियां भी पिता का नाम आगे बढ़ा सकती हैं और उनकी देखभाल का जिम्मा ले सकती हैं। पूरी फिल्म में पीकू (दीपिका पादुकोण) और उसके पिता के बीच एक प्यारा रिश्ता नजर आया।
एक तरफ सिनेमा में पिता प्राेग्रेसिव नजर आए, बच्चों को मोटिवेट करते हुए दिखे। वहीं कुछ फिल्मों में पिता बच्चों के दोस्त बनते भी नजर आए। फिल्म ‘बरेली की बर्फी’, ओएमी 2, और ‘वक्त- द रेस अंगेस्ट टाइम’ जैसी कई फिल्मों में पिता का दोस्ताना अंदाज नजर आया है।
सबसे बड़ी बात है कि इन फिल्मों को दर्शकों ने भी खूब सराहा। बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों ने जमकर कमाई की। इन फिल्मों को पिता के साथ बैठकर देखना भी एक अनोखा अहसास देता है। हमारे और पिता के बीच के रिश्ते को और मजबूत करता है।
