राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में कल आएगा फैसला, एक्टर ने कोर्ट के सामने कही थी ये बात
Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: राजपाल यादव चेक बाउंस मामले में कल का दिन काफी अहम है, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट कल फैसला सुनाएगा।
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दिल्ली हाई कोर्ट की कॉज लिस्ट के अनुसार, बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस मामले में शुक्रवार यानी 10 जुलाई को फैसला सुनाया जाएगा। हाई कोर्ट की लगातार कोशिशों के बावजूद समझौते की आखिरी कोशिशें नाकाम रहने के बाद, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 2 अप्रैल को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान एक्टर ने समझौते के प्रस्ताव का विरोध करते हुए भावुक अपील की थी।
कोर्ट ने राजपाल के रुख पर जताई थी नाराजगी
हाई कोर्ट ने बकाया रकम चुकाने को लेकर राजपाल यादव के बदलते रुख पर नाराजगी जताई थी। एक समय कोर्ट ने कहा था, ‘मुझे मेरे सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं। अंडरटेकिंग में कुछ और कहा गया था और अब आप कुछ और कह रहे हैं।’ जिससे एक्टर की तरफ से दी गई बातों में विरोधाभास को लेकर चिंता जाहिर हुई।
शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने दलील दी कि यादव अपनी सजा को पहले ही स्वीकार कर चुके हैं और अब अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
उन्होंने कहा कि 2024 में दायर रिविजन याचिका में 1,894 दिनों की देरी हुई थी, जिसका कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही देरी माफ करने के लिए पर्याप्त आधार बताए गए। सिक्का ने आगे कहा कि सजा पूरी होने से बाउंस हुए चेक से जुड़ी आर्थिक जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि बार-बार भरोसा दिलाने के बावजूद बकाया रकम का भुगतान नहीं किया गया, जिससे शिकायतकर्ता को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आपसी सहमति से मामला सुलझाने की कई बार कोशिश की।
कोर्ट के सुझाव पर, शिकायत करने वाला 6 करोड़ रुपए को पूरे और आखिरी समझौते के तौर पर लेने के लिए तैयार हो गया। हालांकि, पिछली सुनवाई में वर्चुअली पेश हुए राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कोर्ट को बताया कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है।
उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी पेमेंट कर चुके हैं। कोर्ट ने एक तय समय-सीमा में 3 करोड़ रुपए के पेमेंट का तरीका भी सुझाया और साफ किया कि यह सिर्फ एक न्यायिक सुझाव था, न कि कोई पक्का समझौता। इन कोशिशों के बावजूद, दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुच पाए।
2 अप्रैल को कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
हाई कोर्ट ने कार्यवाही के तरीके को लेकर दोनों पक्षों को चेतावनी भी दी और कहा, ‘अगर जज आपके साथ अच्छा व्यवहार कर रहे हैं, तो उन्हें कभी कमजोर न समझें’ साथ ही यह भी कहा कि इससे कोर्ट का कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
समझौते की बातचीत नाकाम रहने के बाद हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब शुक्रवार को सुनाया जाना है। इससे पहले, हाई कोर्ट ने बकाया रकम के लिए किए गए आंशिक पेमेंट को ध्यान में रखते हुए यादव की अंतरिम ज़मानत बढ़ा दी थी।
यह मामला चेक बाउंस होने की कई शिकायतों से जुड़ा है, जिनमें ट्रायल कोर्ट ने एक्टर को दोषी ठहराया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने समझौता करने के कई मौके दिए थे, लेकिन उसने पेमेंट के वादों को बार-बार पूरा न करने पर भी ध्यान दिया था।