'थिएटर हों या ओटीटी 'धुरंधर' तो धुरंधर रहेगी'; OTT की बहस के बीच जैकी श्रॉफ ने दिया रणवीर की फिल्म का उदाहरण
Jackie Shroff Praises Dhurandhar: फिल्म 'धुरंधर' महीनेभर बाद भी सिनेमाघरों में डटी है और अच्छा कलेक्शन जुटा रही है। इस बीच जैकी श्रॉफ ने इस फिल्म की तारीफ की है। उन्होंने ओटीटी बहस के बीच इसका उदाहरण दिया है।
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थिएटर्स बनाम ओटीटी की बहस हमेशा चलती है। अक्सर यह सवाल उठता है कि ओटीटी की आमद के बाद थिएटर्स में फिल्में देखने का चलन कम हुआ है। हाल ही में एक्टर जैकी श्रॉफ ने इस पर रिएक्शन दिया। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक अभिनेता ने थिएटर के प्रति अपना प्यार जताते हुए कहा है कि उन्हें आज भी ओटीटी प्लेटफॉर्म के बजाय बड़ी स्क्रीन पर फिल्में देखना ज्यादा पसंद है।
'थिएटर ईंट और गारे का खेल बन गए हैं'
जैकी श्रॉफ ने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में बड़ी स्क्रीन पर बैठने की क्षमता कम होने की वजह से थिएटर में दर्शकों की संख्या में आई कमी पर बात की। हालांकि, इस बीच एक्टर ने देश में मौजूद कुछ उन मशहूर थिएटर का उदाहरण दिया, जो बड़ी स्क्रीन पर सिनेमा देखने वालों के हमेशा बने रहने वाले प्यार को दिखाता है। जैकी श्रॉफ ने कहा, 'थिएटर ईंट और गारे का खेल बन गए हैं। वे छोटी-छोटी बिल्डिंग बना रहे हैं। उन्होंने सिनेमा की बैठने की क्षमता 1000 सीटों से घटाकर 200 कर दी है और बाकी जगह मॉल में इस्तेमाल हो रही है। मराठा मंदिर अभी भी है। रीगल अभी भी है। इरोज अभी भी है। मराठा मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह महाराष्ट्र में एक सम्मानजनक सिनेमा हॉल है। छोटे थिएटर आने लगे हैं'।
'लोग आज भी थिएटर जाते हैं और चिल्लाते हैं'
जैकी श्रॉफ ने आगे कहा, 'अब चीजें खुल गई हैं। ज्यादा एक्सपोजर है। लोग अपनी फिल्में बना रहे हैं, लेकिन फिल्म का क्रेज वैसा ही है, जो 'धुरंधर' ने साबित कर दिया है। आप इसे कहीं भी डाल सकते हैं। ओटीटी पर या कहीं और, 'धुरंधर', 'धुरंधर' ही रहेगी। 'एनिमल', एनिमल ही रहेगी। लोग आज भी थिएटर जाते हैं और चिल्लाते हैं। नाचते हैं'। अभिनेता ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों प्लेटफॉर्म के अपने-अपने फायदे हैं और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से उन्हें पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, 'ओटीटी के साथ क्या हुआ है? बहुत सारी चीजें देखने को मिलने लगी हैं। अच्छी और बुरी। आप घर बैठे फिल्म देख रहे हैं, लेकिन बड़े पर्दे पर फिल्म देखना एक अलग बात है और ओटीट अलग है'।
90 के दशक से की तुलना
पिछले कुछ वर्षों में अधिकतर फिल्मों के लिए थिएटर में कम भीड़भाड़ पर बात करते हुए जैकी श्रॉफ ने कहा कि य ट्रेंड 1990 के दशक से चले आ रहे हैं। उन्होंने अपनी बात को 'धुरंधर' की सफलता से साबित किया। उन्होंने कहा, 'उस समय थिएटर में 10 में से सिर्फ थीन फिल्में ही चलती थीं। उस समय, दस में से दस फिल्में नहीं चलती थीं। हम भी उसी दौर से गुजरे हैं। अगर 'रंगीला' बड़े पर्दे पर दिखाई जाती, तो कोई दूसरी फिल्म नहीं चलती। दस में से तीन फिल्में दिखाई जाती थीं और चलती थीं। ज्यादा से ज्यादा चार फिल्में। वही ट्रेंड आज भी है'। जैकी श्रॉफ के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्हें बीत दिनों 'तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी' में नजर आए थे।
#WATCH | Mumbai | Actor Jackie Shroff says, "My journey has been like the wind. Like the wind flows, sometimes up, sometimes down. Like the flow of water... During the first shot (of his first movie, 'Hero'), Subhash ji asked me if I could drive a jeep. I said yes. He said, 'I… pic.twitter.com/VT1uyfK8aK
— ANI (@ANI) January 20, 2026
बेटे टाइगर के साथ काम करने की जताई इच्छा
जैकी श्रॉफ ने इस दौरान बेटे टाइगर श्रॉफ के साथ काम करने पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'मैं चाहता हूं कि यह जल्द से जल्द हो। अगर कोई ऐसा प्रोजेक्ट लाता है तो मैं जरूर करूंगा। मैं सच में चाहता हूं कि हम साथ काम करें। मैं पहले से ही इसका इंतजार कर रहा हूं। अब जब यह आइडिया मेरे दिमाग में आ गया है, तो मौका जरूर मिलेगा। टाइगर भी चाहता है कि हम साथ काम करें'।
#WATCH | Mumbai | On working with his son actor Tiger Shroff, Actor Jackie Shroff says, "I want it to happen as soon as possible. If someone brings up such a project, I'll definitely do it. I really want us to work together. I'm already waiting for it. Now that the idea is in my… pic.twitter.com/9AaJgLS9dK
— ANI (@ANI) January 20, 2026