‘आजकल एक रील से स्टार बन सकते हैं’, दिव्या दत्ता ने बताया युवाओं की क्या हैं चुनौतियां? ओटीटी पर कही ये बात
Divya Dutta: दिव्या दत्ता ने युवाओं और नए एक्टर्स को लेकर बात की। जानिए उन्होंने युवाओं के सामने आने वाली किन चुनौतियों के बारे में की बात…
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिव्या दत्ता को हाल ही में वेब सीरीज 'चिरैया' में एक ऐसी महिला का किरदार निभाने के लिए तारीफ मिली, जो अपने परिवार के खिलाफ आवाज उठाती है। हाल ही में दिव्या ने सोशल मीडिया के दौर में एक्टर्स के सामने आने वाली नई चुनौतियों, किरदार पर आधारित कहानियों पर स्टार सिस्टम के असर और दूसरी चीजों के बारे में बात की। दिव्या का मानना है कि आज के एक्टर्स के लिए नई चुनौती सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर कल्चर का बढ़ना है।
युवा लाइक्स और वैलिडेशन के बीच फंसा है
टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत के दौरान दिव्या दत्ता ने सोशल मीडिया के दौर और नए एक्टर्स के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर कहा कि जब मौकों की बात आती है, तो मुझे लगता है कि जब मैंने शुरुआत की थी, तब हमें कहीं ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा था क्योंकि तब मौके और माध्यम कम थे।
आजकल आप अपने लिए एक रील बना सकते हैं और अचानक स्टार बन सकते हैं। प्रोड्यूसर आप पर ध्यान देते हैं और कहते हैं, ‘ठीक है, इस व्यक्ति को लेते हैं।’ इस लिहाज से यह आसान हो गया है।
कई इन्फ्लुएंसर्स ने अपने लिए मजबूत करियर बनाया है, लेकिन इसके दूसरे पहलू भी हैं। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। युवा पीढ़ी अब ऐसी स्थिति में फंसी हुई है जहां सब कुछ लाइक्स, वैलिडेशन और विजिबिलिटी के इर्द-गिर्द घूमता है।
मजबूत महिलाओं के किरदार बॉलीवुड में कम हैं
युवाओं की चुनौती को लेकर एक्ट्रेस ने कहा कि लोग असल में पलों को जीने के बजाय उन्हें रिकॉर्ड करने पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। उनका मानना है कि गहराई अभी भी मौजूद है। एक ऐसे इवेंट को याद करते हुए जहां Gen Z के दर्शकों ने उन्हें पूरी खामोशी से सुना, दिव्या ने कहा कि असली चुनौती उस दबाव में है जो युवाओं से कहता है कि पहले फॉलोअर्स लाओ, फिर तुम्हें काम मिलेगा।
इस सवाल पर कि बॉलीवुड आज भी महिलाओं के मजबूत किरदारों को दिखाने में क्यों संघर्ष करता है, एक्ट्रेस कहती हैं कि ऐसे रोल मौजूद तो हैं, लेकिन कम हैं। मेरे दिमाग में सबसे पहले 'दामिनी' फिल्म आती है, जिसमें महिलाओं का एक बहुत मजबूत किरदार था। लेकिन और भी फिल्में हैं। ऐसा नहीं है कि ऐसे किरदार मौजूद नहीं हैं; वे हैं, लेकिन कम हैं। 'चिरैया' में भी मेरे पति का किरदार ज्यादातर एक पैसिव सपोर्टर का है।
विजुअल स्टोरीटेलिंग दर्शकों को किरदार से जोड़ती है
दिव्या के लिए विजुअल स्टोरीटेलिंग की ताकत इस बात में है कि यह दर्शकों को किरदारों से जोड़ती है और वे उस एहसास को अपने साथ घर ले जाते हैं। उन्हें याद है कि शूटिंग के दौरान एक गांव में वे एक बुजुर्ग महिला से मिली थीं और उनकी जिंदगी की मुश्किलों के बावजूद उनके आत्मविश्वास को देखकर प्रभावित हुई थीं।
उन्होंने कहा कि हमारे आस-पास ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं। एक्ट्रेस का कहना है कि ऐसी जिंदगी को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें पहचानना और समझना ज़रूरी है। चाहे पुरुष हों या महिलाएं, जो कोई भी किसी दूसरे व्यक्ति को आगे बढ़ाना चाहता है, कृपया ऐसा जरूर करे। इसे 'यह पुरुषों का मुद्दा है' या 'यह महिलाओं का मुद्दा है' में न बांटें। बस लोगों को आगे बढ़ने में मदद करें।
मुझे स्टार्स से फर्क नहीं पड़ता
ओटीटी पर बढ़ते स्टार सिस्टम के बारे में दिव्या का मानना है कि उन्हें स्टार्स से कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि वे ऐसी कास्टिंग चाहती हैं जो कहानी के लिए सही हो। उन्होंने कहा कि अब ज्यादातर प्रोजेक्ट्स किरदारों पर आधारित होते हैं और आज दर्शक भी यही चाहते हैं।
कहानियां बदल गई हैं; वे कहीं ज्यादा असल होती हैं। दर्शक उन किरदारों से सबसे ज्यादा जुड़ते हैं जो भरोसेमंद और असली लगते हैं, खासकर ओटीटी कंटेंट में जहां असलियत दिखाना आम बात हो गई है।
अगर आप किसी स्टार को कास्ट कर रहे हैं, तो या तो पक्का करें कि वे उस रोल के लिए सच में सही हों या उन्हें इस तरह तैयार करें कि वे उस रोल में एकदम सही लगें। तब सब कुछ बहुत अच्छे से काम करता है। मुझे स्टार्स से कोई दिक्कत नहीं है।
दिव्या दत्ता आखिरी बार ‘चिरैया’ में नजर आई थीं। मैरिटल रेप से जैसे गंभीर मुद्दे पर आधारित इस सीरीज को काफी पसंद किया गया और दिव्या की एक्टिंग की भी काफी तारीफ हुई। यह सीरीज जीयोहॉटस्टार पर मौजूद है।