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‘बहकावे में नहीं…’ भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत का फिल्ममेकर अशोक पंडित ने किया विरोध; बुद्धिजीवियों को लताड़ा
Fri, 03 Jul 2026 02:14 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Fri, 03 Jul 2026 02:14 PM IST
सार
Ashoke Pandit: फिल्ममेकर अशोक पंडित ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू करने वाली मांग का विरोध किया है। उनके मुताबिक बुद्धिजीवियों को इस तरह की मांग करने का अधिकार नहीं है।
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अशोक पंडित
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
फिल्ममेकर अशोक पंडित भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत वाले मामले पर बयान देकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार हो रहे आतंकी हमलों और जान-माल के नुकसान को देखते हुए ऐसे प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जाना चाहिए।
भारत और पाकिस्तान के 117 जाने-माने नागरिकों ने एक खुला पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू करने की अपील की है। अशोक पंडित ने इस पहल और इसका समर्थन करने वालों की आलोचना की है।
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भारत और पाकिस्तान के 117 जाने-माने नागरिकों ने एक खुला पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू करने की अपील की है। अशोक पंडित ने इस पहल और इसका समर्थन करने वालों की आलोचना की है।
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अशोक पंडित ने क्यूं जताया विरोध?
अशोक पंडित ने एएनआई से कहा 'हर 6 महीने में, पाकिस्तान और हमारे देश के तथाकथित बुद्धिजीवी एक ही प्रक्रिया अपनाते हैं। उन्हें शोर मचाने और यह कहने की आदत है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू होनी चाहिए। इसी प्रक्रिया के तहत आज फिर भारत और पाकिस्तान के कुछ लोगों ने अपने-अपने प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत होनी चाहिए और एक-दूसरे की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया जाना चाहिए। मैं इसका पूरी तरह विरोध करता हूं।'
अशोक पंडित ने एएनआई से कहा 'हर 6 महीने में, पाकिस्तान और हमारे देश के तथाकथित बुद्धिजीवी एक ही प्रक्रिया अपनाते हैं। उन्हें शोर मचाने और यह कहने की आदत है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू होनी चाहिए। इसी प्रक्रिया के तहत आज फिर भारत और पाकिस्तान के कुछ लोगों ने अपने-अपने प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत होनी चाहिए और एक-दूसरे की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया जाना चाहिए। मैं इसका पूरी तरह विरोध करता हूं।'
अशोक पंडित
- फोटो : सोशल मीडिया
बुद्धिजीवियों से प्रभावित ना हों
पंडित ने आगे कहा 'मुझे लगता है कि हमें उनसे प्रभावित नहीं होना चाहिए क्योंकि उन्हें भारत-पाकिस्तान दोस्ती के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्होंने कुछ भी नहीं खोया है। इस विषय पर उन लोगों के साथ चर्चा की जानी चाहिए, जिन्होंने अपने बेटे खोए हैं। हमारे देश में सुरक्षा बलों के कई जवान शहीद हुए हैं और इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है।'
पंडित ने आगे कहा 'मुझे लगता है कि हमें उनसे प्रभावित नहीं होना चाहिए क्योंकि उन्हें भारत-पाकिस्तान दोस्ती के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्होंने कुछ भी नहीं खोया है। इस विषय पर उन लोगों के साथ चर्चा की जानी चाहिए, जिन्होंने अपने बेटे खोए हैं। हमारे देश में सुरक्षा बलों के कई जवान शहीद हुए हैं और इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है।'
भूलने की बीमारी से ग्रस्त हैं
अशोक पंडित ने कहा 'आदत यह है कि हम भूलने की बीमारी से ग्रस्त हैं। जो खुद को बड़े प्रोफेसर और बुद्धिमान लोग कहते हैं- वे इस विचार के नशे में हैं कि किसी तरह देशों के बीच दोस्ती होनी चाहिए। जब भी हमने दोस्ती का हाथ बढ़ाया, उन्होंने हम पर हमला किया है। हमारे हजारों लोगों की जान जाने के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है।'
अशोक पंडित ने कहा 'आदत यह है कि हम भूलने की बीमारी से ग्रस्त हैं। जो खुद को बड़े प्रोफेसर और बुद्धिमान लोग कहते हैं- वे इस विचार के नशे में हैं कि किसी तरह देशों के बीच दोस्ती होनी चाहिए। जब भी हमने दोस्ती का हाथ बढ़ाया, उन्होंने हम पर हमला किया है। हमारे हजारों लोगों की जान जाने के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है।'
अशोक पंडित
- फोटो : एएनआई
दोस्ती वाले विषय को बंद किया जाना चाहिए
उन्होंने आगे कहा 'मुझे लगता है कि दोस्ती वाले इस विषय को हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए। इस देश को आतंकवादी देश घोषित किया जाना चाहिए। यह देश दोस्ती में विश्वास नहीं करता है।'
उन्होंने आगे कहा 'मुझे लगता है कि दोस्ती वाले इस विषय को हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए। इस देश को आतंकवादी देश घोषित किया जाना चाहिए। यह देश दोस्ती में विश्वास नहीं करता है।'
बुद्धिजीवियों ने लिखा था खत
इससे पहले, भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख नागरिकों के एक समूह ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र जारी कर शांति और द्विपक्षीय बातचीत को बहाल करने की मांग की थी। इस समूह में 61 भारतीय और 56 पाकिस्तानी शामिल हैं। इनका तर्क है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी राजनयिक गतिरोध को बनाए नहीं रखा जा सकता है।
इससे पहले, भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख नागरिकों के एक समूह ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र जारी कर शांति और द्विपक्षीय बातचीत को बहाल करने की मांग की थी। इस समूह में 61 भारतीय और 56 पाकिस्तानी शामिल हैं। इनका तर्क है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी राजनयिक गतिरोध को बनाए नहीं रखा जा सकता है।