Gajraj Rao: 'मैं अपने स्वाभिमान को किनारे नहीं रखता', बॉलीवुड में लगातार फिल्में नहीं करने पर बोले गजराज राव
गजराज राव ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने संघर्ष के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वह हमेशा आत्मसम्मान के पीछे भागे हैं, कभी फिल्में पाने के लिए उन्होंने सम्मान दांव पर नहीं लगाया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गजराज राव हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं। फिल्म 'बधाई हो' से उन्हें इंडस्ट्री में खास पहचान मिली, लेकिन वह शेखर कपूर की 'बैंडिट क्वीन' के बाद से ही इंडस्ट्री का हिस्सा रहे हैं। इस फिल्म में उन्होंने एक छोटी सी भूमिका निभाई थी, लेकिन कभी उन्हें पहचान नहीं मिली। उनकी फिल्में अक्सर लंबे अंतराल के बाद देखने को मिलती हैं। इतने अनुभवी अभिनेता होने के बावजूद वह कम फिल्मों में क्यों दिखाई देते हैं, अब इस बारे में उन्होंने खुलासा किया है।
इज्जत के साथ करते हैं काम
दरअसल, हाल ही में दिए इंटरव्यू में गजराज ने बताया कि वह हमेशा सोच समझ कर फैसला लेते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी प्रतिभा या अभिनय पर शक नहीं था। लगातार मेरा संघर्ष जारी था और वह संघर्ष सम्मान पाने के लिए था। अगर, मुझे कहीं भी अपमान महसूस होता है या लगता है कि लोग मेरे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं तो मैं उन लोगों के साथ काम नहीं करता, जो लोग बहुत सफल नहीं होते हैं। उन्हें अक्सर इसका सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता है।
Priyanka Chopra: 'लोग गलती निकालने की कोशिश करते हैं...' RRR पर ट्रोल होने के बाद प्रियंका ने ऐसे किया रिएक्ट
साधारण जिंदगी जीने की इच्छा
गजराज ने कहा कि मैं अपने स्वाभिमान को किनारे रखकर या सिर नीचे रख कर काम नहीं कर सकता। मैं हर समय इसका पालन करूंगा। मैं अपने खर्च को सीमित रखूंगा। आप तब फंस जाते हैं, जब आपकी इच्छाएं बहुत ज्यादा होती हैं और आपके पास उन इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन या कमाई नहीं होती। इसके बाद आप कर्ज लेते हैं। फिर, आप कर्ज चुकाने के लिए काम करना शुरू करते हैं। अगर, कोई आपके साथ गलत व्यवहार कर रहा है या कोई भूमिका खराब है तो इसे वैसे भी आपको करना पड़ेगा, यह सोच कर कि कम से कम पैसा तो आएगा, लेकिन मैं ऐसा नहीं चाहता।
Aaradhya Bachchan: यूट्यूब टैब्लॉयड के खिलाफ दिल्ली HC पहुंचीं आराध्या बच्चन, जानें क्या है पूरा मामला
नहीं पसंद उधार की जिंदगी
गजराज ने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि 1994 में आई फिल्म 'बैंडिट क्वीन' से लेकर साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'बधाई हो' तक का सफर दो दशकों से अधिक लंबा था, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपने और अपने परिवार के खर्चों में भारी कटौती की। गजराज ने कहा कि इन 10-20 साल में मैंने मेरी पत्नी और अपनी जरूरतों पर लगाम लगाया था। मेरी पत्नी ने मेरा बड़ा सहयोग किया और हमने शुरू से ही कोशिश की कि हम किसी से कर्ज न लें और उधार की जिंदगी न जिएं।
शहनाज की हॉटनेस तो मोनालिसा की सादगी ने लूटा दिल