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Gajraj Rao: 'मैं अपने स्वाभिमान को किनारे नहीं रखता', बॉलीवुड में लगातार फिल्में नहीं करने पर बोले गजराज राव

Thu, 20 Apr 2023 12:43 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: साक्षी Updated Thu, 20 Apr 2023 12:43 AM IST
सार

गजराज राव ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने संघर्ष के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वह हमेशा आत्मसम्मान के पीछे भागे हैं, कभी फिल्में पाने के लिए उन्होंने सम्मान दांव पर नहीं लगाया।

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Gajraj Rao explains why there was gap between his films he never doubted on talent but Cant Lose self respect
गजराज राव - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गजराज राव हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं। फिल्म 'बधाई हो' से उन्हें इंडस्ट्री में खास पहचान मिली, लेकिन वह शेखर कपूर की 'बैंडिट क्वीन' के बाद से ही इंडस्ट्री का हिस्सा रहे हैं। इस फिल्म में उन्होंने एक छोटी सी भूमिका निभाई थी, लेकिन कभी उन्हें पहचान नहीं मिली। उनकी फिल्में अक्सर लंबे अंतराल के बाद देखने को मिलती हैं। इतने अनुभवी अभिनेता होने के बावजूद वह कम फिल्मों में क्यों दिखाई देते हैं, अब इस बारे में उन्होंने खुलासा किया है।

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इज्जत के साथ करते हैं काम
दरअसल, हाल ही में दिए इंटरव्यू में गजराज ने बताया कि वह हमेशा सोच समझ कर फैसला लेते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी प्रतिभा या अभिनय पर शक नहीं था। लगातार मेरा संघर्ष जारी था और वह संघर्ष सम्मान पाने के लिए था। अगर, मुझे कहीं भी अपमान महसूस होता है या लगता है कि लोग मेरे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं तो मैं उन लोगों के साथ काम नहीं करता, जो लोग बहुत सफल नहीं होते हैं। उन्हें अक्सर इसका सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता है।  

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साधारण जिंदगी जीने की इच्छा
गजराज ने कहा कि मैं अपने स्वाभिमान को किनारे रखकर या सिर नीचे रख कर काम नहीं कर सकता। मैं हर समय इसका पालन करूंगा। मैं अपने खर्च को सीमित रखूंगा। आप तब फंस जाते हैं, जब आपकी इच्छाएं बहुत ज्यादा होती हैं और आपके पास उन इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन या कमाई नहीं होती। इसके बाद आप कर्ज लेते हैं। फिर, आप कर्ज चुकाने के लिए काम करना शुरू करते हैं। अगर, कोई आपके साथ गलत व्यवहार कर रहा है या कोई भूमिका खराब है तो इसे वैसे भी आपको करना पड़ेगा, यह सोच कर कि कम से कम पैसा तो आएगा, लेकिन मैं ऐसा नहीं चाहता।  

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नहीं पसंद उधार की जिंदगी
गजराज ने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि 1994 में आई फिल्म 'बैंडिट क्वीन' से लेकर साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'बधाई हो' तक का सफर दो दशकों से अधिक लंबा था, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपने और अपने परिवार के खर्चों में भारी कटौती की। गजराज ने कहा कि इन 10-20 साल में मैंने मेरी पत्नी और अपनी जरूरतों पर लगाम लगाया था। मेरी पत्नी ने मेरा बड़ा सहयोग किया और हमने शुरू से ही कोशिश की कि हम किसी से कर्ज न लें और उधार की जिंदगी न जिएं।  

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