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शादी के बाद झगड़े होना आम बातः विद्या बालन

Wed, 12 Feb 2014 08:30 AM IST
Updated Wed, 12 Feb 2014 08:30 AM IST
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interview of vidya balan

एक समय विद्या बालन के हाथों से किताब छूटती नहीं थी, लेकिन फिर फिल्मों में व्यस्तता और उसके बाद शादी... अब उन्हें स्क्रिप्ट के सिवा कुछ और पढ़ने का वक्त नहीं मिलता।

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खाली समय वह परिवार के साथ बिताना पसंद करती हैं। इन दिनों विद्या अपनी आने वाली फिल्म ‘शादी के साइड इफेक्ट्स’ को प्रमोट करने में व्यस्त हैं। फिल्म और जीवन के अनुभवों को लेकर पढ़िए उनकी बातचीत।
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शादी के साइड इफेक्ट्स... क्या सोचती हैं इनके बारे में?


यह देखने वाले पर है कि वह किस नजरिये से इसे देखता है। शादी में थोड़ी अनबन, नोकझोंक तो हर रिश्ते में होती है। वैसे यह बातें हर रिश्ते में होती हैं। माता-पिता, भाई-बहन, हसबैंड-वाइफ... कहां ऐसी बातें नहीं होतीं?
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अगर शादी में यह होता है तो यह आप पर है कि रिश्ता निभाना चाहते हैं या नहीं। अगर नहीं चाहते हैं तो सारे साइड इफेक्ट्स आपको नकारात्मक दिखाई देंगे।

यह फिल्म आपने अपनी शादी से पहले साइन की थी या बाद में?

शादी से बहुत पहले 2010 में मैंने इसके लिए हामी भरी थी। परंतु किसी न किसी वजह से यह टलती गई। फिर 2012 में एक बार फिर प्रीतिश नंदी कम्युनिकेशंस मेरे पास आए कि अब फिल्म शुरू करनी है। हीरो मिल गया है। शूटिंग मेरी शादी (2012) के बाद शुरू हुई। यह महज इत्तेफाक है।

क्या है शादी का सुख?

interview of vidya balan

‘प्यार के साइड इफेक्ट्स’ वहां खत्म होती है जहां हीरो-हीरोइन शादी की बात बन जाने के बावजूद एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। क्या आपकी फिल्म वहां से शुरू होती है?

बिल्कुल। न केवल ‘प्यार के साइड इफेक्ट्स’ बल्कि तमाम हिंदी फिल्में जहां खत्म होती हैं कि ‘इसके बाद दोनों शादी करके सुख से रहने लगे’ वहां से हमारी फिल्म आगे बढ़ती है और बताती है कि बाद में क्या वाकई ऐसा होता है। दो लोगों के बीच मिलन की जो जद्दोजहद है वह खत्म हो चुकी है, अब रोजमर्रा की जिंदगी सामने है... आटे-दाल का भाव, भागदौड़ भरी जिंदगी में एक-दूसरे को वक्त न दे पाना, बच्चा, स्कूल और बाकी बातें।

ट्रेलर में बच्चे के जन्म के बाद की घटनाएं प्रमुखता से दिखाई जा रही हैं?

यह हमारे समय की वास्तविकता है। फिल्म महानगरीय जीवन में अपर मिडिलक्लास कपल की कहानी है। ऐसे परिवार किन मुश्किलों से गुजरते हैं। मां बनने के बाद अक्सर पत्नी को नौकरी छोड़ना पड़ती है। इसका घर की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। आज संयुक्त परिवार खत्म हो गए हैं। बच्चे को किसी के पास छोड़ा नहीं जा सकता। डर लगा रहता है। कई सवालों के जवाब आपके पास नहीं होते हैं। उलझन होती है। इनके अलावा तनाव पैदा करने वाली और भी बातें होती हैं... तो फिर रिश्ते में कब तक और कैसे रोमांस बचा रह सकता है।

बच्‍चा केंद्र में नहीं है

interview of vidya balan

तो क्या बच्चे का जन्म कहानी के केंद्र में है?

ऐसा नहीं कह सकते क्योंकि यह फिल्म शादी के बारे में। फिल्म बताती है कि रिश्ते समय-समय पर बदलते हैं। रिश्तों में नए-नए मोड़ आते हैं। यही शादी है कि कई बार आप नए मोड़ों को समझ कर उनके साथ आगे बढ़ते जाते हैं और कई बार कुछ लोग मुड़ कर वापस लौट जाते हैं। फिल्म यही बताती है कि अगर आप रिश्ता निभाना चाहते हैं तो परेशान करने वाली छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते क्योंकि कई बार यही छोटी-छोटी बातें बड़ी हो जाती हैं।

आपने लंबे संघर्ष के बाद कामयाब मुकाम पाया। आप बहुत से लोगों के लिए आदर्श हैं। संघर्ष के उन दिनों को याद करती हैं तो क्या महसूस करती हैं?

मुझे यही लगता है कि अगर वे दिन नहीं होते तो मैं आज यहां नहीं होती। उन्हीं दिनों की वजह से आज मैं यहां पहुंची हूं। अगर यहां पहुंचने की चाह नहीं होती तो भी ये दिन नहीं होते।

संघर्ष के दिनों ने आपको सबसे बड़ा क्या सबक दिया?

बहुत कुछ आपके मन का नहीं होता है पर आत्मविश्वास अटल हो तो सब कुछ मुमकिन है। इसे केवल विश्वास भी कह सकते हैं, फिर वह चाहे खुद में हो या फिर भगवान में। आपको समझना होगा कि यह कायनात आपको जरूर अपने सपने साकार करने का मौका देती है। इसलिए आंखें खुली रखें। हो सकता है कि जिस तरह से हम चाहते हों चीजें उस तरह से न हों, वह उससे बेहतर तरीके से हों!

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