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‘जन नायकन’ के कानूनी विवाद के बीच कमल हासन ने सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, जानिए क्या कहा?

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Sat, 10 Jan 2026 04:49 PM IST
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सार

Jana Nayagan Legal Row: अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज अटक गई है। मामला कोर्ट में है और इस मामले की अगली सुनवाई अब 21 जनवरी को तय की गई। इस बीच कमल हासन ने बिना किसी फिल्म का नाम लिए सेंसर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर टिप्पणी की है। 

Kamal Haasan flags film certification processes amid Vijay Movie Jana Nayagan legal row
विजय-कमल हासन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अभिनय से राजनीति में कदम रख चुके विजय के सिने करियर की आखिरी फिल्म 'जन नायकन' कानूनी पचड़े में है। इसकी रिलीज अटक चुकी है। 'जन नायकन' को 09 जनवरी को रिलीज किया जाना था। मगर, ऐसा हो न सका। सेंसर सार्टिफिकेट को लेकर रिलीज अटकी है। कोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई पोंगल की छुट्टियों के बाद 21 जनवरी के लिए तय की है। इस बीच आज शनिवार को कमल हासन ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल किए हैं।

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कमल हासन ने की कलाकारों के हक की बात
कमल हासन ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें उन्होंने देश के संविधान का हवाला देते हुए कलाकारों के हक की बात की है। एक्टर ने बिना किसी फिल्म का नाम लिए अपनी बात रखी है। मगर, एक्टर-पॉलिटिशियन ने यह बात ऐसे वक्त में कही है, जब 'जन नायकन' की रिलीज पर संकट है। उन्होंने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से जुड़े चल रहे विवादों के बीच यह कड़ा बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अभिव्यक्ति की आजादी और सेंसरशिप प्रोसेस के बारे में बड़ी चिंताएं जताई हैं।
 

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'रोजी-रोटी एक निष्पक्ष और समय पर होने वाले प्रोसेस पर निर्भर'
कमल हासन ने किसी भी संस्था या किसी खास फिल्म का नाम लिए बिना अपनी बात में कहा है, 'भारत का संविधान तर्क के आधार पर अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी देता है, जिसे कभी भी अस्पष्टता से कम नहीं किया जा सकता। यह पल किसी एक फिल्म से बड़ा है। यह उस जगह को दिखाता है, जो हम एक संवैधानिक लोकतंत्र में कला और कलाकारों को देते हैं। सिनेमा सिर्फ एक व्यक्ति की मेहनत नहीं है, बल्कि लेखकों, टेक्नीशियन, कलाकारों, प्रदर्शकों और छोटे व्यवसायों के एक पूरे सिस्टम की सामूहिक कोशिश है, जिनकी रोजी-रोटी एक निष्पक्ष और समय पर होने वाले प्रोसेस पर निर्भर करती है'।

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'हर कट और एडिट के लिखित कारण बताए जाएं'
कमल हासन ने आगे कहा है कि इस तरह के सेंसरशिप प्रोसेस क्रिएटिविटी को कैसे दबा सकते हैं, और फिल्म इंडस्ट्री में लोगों की रोजी-रोटी को कैसे नुकसान पहुंचा सकते हैं? उन्होंने कहा, 'जब स्पष्टता नहीं होती, तो क्रिएटिविटी सीमित हो जाती है। आर्थिक गतिविधियां बाधित होती हैं और लोगों का भरोसा कमजोर होता है। तमिलनाडु और भारत के सिनेमा प्रेमी कला के प्रति जुनून, समझ और मैच्योरिटी रखते हैं, वे खुलेपन और सम्मान के हकदार हैं। अब जरूरत इस बात की है कि सर्टिफिकेशन प्रोसेस पर सिद्धांतों के आधार पर फिर से विचार किया जाए, जिसमें सर्टिफिकेशन के लिए तय समय-सीमा, पारदर्शी मूल्यांकन और हर सुझाए गए कट या एडिट के लिए लिखित, तर्कसंगत कारण बताया जाए'।

फिल्म इंडस्ट्री से की यह अपील
कमल हासन ने फिल्म इंडस्ट्री से एकजुट होने और सार्थक, रचनात्मक बातचीत करने की अपील की। साथ ही कहा, 'ऐसा सुधार क्रिएटिव आजादी की रक्षा करेगा, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखेगा और अपने कलाकारों और लोगों पर भरोसा जताकर भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करेगा'। बता दें कि 'जना नायकन' के प्रोड्यूसर वेंकट नारायण ने भी फिल्म की रिलीज अटकने पर एक वीडियो मैसेज में कानूनी लड़ाई को लेकर बात की। 
 

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