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रिजेक्ट किए जाने का दुख कैसे बर्दाश्त करती हैं विधात्री बांदी? 'जलसा' के बाद अभिनेत्री को हुई थी ये मुश्किल
Tue, 11 Aug 2026 07:25 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Tue, 11 Aug 2026 07:25 PM IST
सार
Vidhatri Bandi: अभिनेत्री विधात्री बंदी ने बताया है कि जब किसी प्रोजेक्ट में उन्हें रिजेक्ट करके किसी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर को लिया जाता है तो उन्हें कैसा लगता है?
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विधात्री बांदी
- फोटो : इंस्टाग्राम@vidhatribandi
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विस्तार
अभिनेत्री विधात्री बंदी के लिए, पहचान मिलना और काम मिलना हमेशा एक जैसी बात नहीं रही। हाल ही में उन्होंने 'मैक्स, मिन एंड म्याओजाकी' में लीड रोल निभाया। इससे पहले उन्होंने 'शिद्दत' में सपोर्टिंग रोल किया। उसके बाद 'जलसा' और 'द डिप्लोमैट' में काम किया।
हाल ही में बंदी ने बताया कि रोल पाना कितना मुश्किल हो सकता है, खासकर सोशल मीडिया के दौर में।
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हाल ही में बंदी ने बताया कि रोल पाना कितना मुश्किल हो सकता है, खासकर सोशल मीडिया के दौर में।
विद्या बालन और नसीरुद्दीन के साथ किया काम
इंडिया टुडे से बातचीत में एक्ट्रेस ने बताया उनके करियर के सबसे बड़े सबक उन एक्टर्स से मिले हैं, जो पहले से ही अपने काम में टॉप पर हैं। बंदी ने विद्या बालन, शेफाली शाह और जॉन अब्राहम के साथ काम किया है।
हाल ही में उन्हें आदिल हुसैन, नसीरुद्दीन शाह और नफीसा अली जैसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला।
इंडिया टुडे से बातचीत में एक्ट्रेस ने बताया उनके करियर के सबसे बड़े सबक उन एक्टर्स से मिले हैं, जो पहले से ही अपने काम में टॉप पर हैं। बंदी ने विद्या बालन, शेफाली शाह और जॉन अब्राहम के साथ काम किया है।
हाल ही में उन्हें आदिल हुसैन, नसीरुद्दीन शाह और नफीसा अली जैसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला।
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विधात्री बांदी
- फोटो : इंस्टाग्राम@vidhatribandi
उम्मीद के मुताबिक प्रोजेक्ट्स नहीं मिले
धात्री बंदी 'जलसा' से ही अपनी छाप छोड़ दी थी, जहां उन्होंने विद्या बालन और शेफाली शाह के साथ बेहतरीन काम किया था। लेकिन उसके बाद उन्हें वैसी लगातार मौके नहीं मिले जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी हो गई, प्रोजेक्ट्स रोक दिए गए।
बिना चुने काम किया
उन्होंने कहा, 'मैं सच कहूं तो 'जलसा' के बाद मुझे बहुत उम्मीदें थीं। मुझे लगा कि मुझे और काम करने को मिलेगा, मगर फिर इंडस्ट्री धीमी हो गई।' उन्होंने यह भी कहा कि इसका मतलब यह भी था कि उन्हें यह स्वीकार करना पड़ा कि ऐसे दौर भी आएंगे जब उन्हें बस काम करते रहना होगा।
एक्ट्रेस के मुताबिक 'एक समय ऐसा आया जब मैं बहुत ज्यादा चुन-बीन नहीं कर सकती थी। मुझे कुछ न कुछ करना था। मुझे काम करते रहना था। मैं बस गायब नहीं हो सकती थी।'
धात्री बंदी 'जलसा' से ही अपनी छाप छोड़ दी थी, जहां उन्होंने विद्या बालन और शेफाली शाह के साथ बेहतरीन काम किया था। लेकिन उसके बाद उन्हें वैसी लगातार मौके नहीं मिले जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी हो गई, प्रोजेक्ट्स रोक दिए गए।
बिना चुने काम किया
उन्होंने कहा, 'मैं सच कहूं तो 'जलसा' के बाद मुझे बहुत उम्मीदें थीं। मुझे लगा कि मुझे और काम करने को मिलेगा, मगर फिर इंडस्ट्री धीमी हो गई।' उन्होंने यह भी कहा कि इसका मतलब यह भी था कि उन्हें यह स्वीकार करना पड़ा कि ऐसे दौर भी आएंगे जब उन्हें बस काम करते रहना होगा।
एक्ट्रेस के मुताबिक 'एक समय ऐसा आया जब मैं बहुत ज्यादा चुन-बीन नहीं कर सकती थी। मुझे कुछ न कुछ करना था। मुझे काम करते रहना था। मैं बस गायब नहीं हो सकती थी।'
विधात्री बांदी
- फोटो : इंस्टाग्राम@vidhatribandi
कैसा काम चाहती हैं बांदी?
हालांकि, आज काम के साथ उनका रिश्ता बदल गया है। उन्होंने कहा, 'पहले, मैं बस इसी सोच में रहती थी, दिखना है, दिखना है, दिखना है। जो भी काम मिले, कर लो। लेकिन अब मैं ज्यादा शांत हूं। अब मुझे लगता है, नहीं, मैं ऐसा काम करना पसंद करूंगी जिससे मुझे खुशी मिले।'
रिजेक्शन पर क्या बोलीं अभिनेत्री?
उन्होंने कास्टिंग में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'कोई भी इसे आपके मुंह पर नहीं कहता। लेकिन जब आप फाइनल प्रोडक्ट देखते हैं, जब आप देखते हैं कि किसी इन्फ्लूएंसर को चुना गया है, तो आपको पता चलता है कि अच्छा, इसलिए मुझे वह रोल नहीं मिला।'
उन्होंने कहा, 'मुझे अब भी बुरा लगता है, थोड़ी तकलीफ होती है। लेकिन मुझे लगता है कि एक एक्टर के तौर पर, सिर्फ मेरे ही नहीं, बल्कि सभी के, हममें एक तरह की मजबूती आ जाती है। रिजेक्शन चाहे उस पल कितना भी दुखद क्यों न हो, हमने उससे उबरना भी सीख लिया है।'
हालांकि, आज काम के साथ उनका रिश्ता बदल गया है। उन्होंने कहा, 'पहले, मैं बस इसी सोच में रहती थी, दिखना है, दिखना है, दिखना है। जो भी काम मिले, कर लो। लेकिन अब मैं ज्यादा शांत हूं। अब मुझे लगता है, नहीं, मैं ऐसा काम करना पसंद करूंगी जिससे मुझे खुशी मिले।'
रिजेक्शन पर क्या बोलीं अभिनेत्री?
उन्होंने कास्टिंग में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'कोई भी इसे आपके मुंह पर नहीं कहता। लेकिन जब आप फाइनल प्रोडक्ट देखते हैं, जब आप देखते हैं कि किसी इन्फ्लूएंसर को चुना गया है, तो आपको पता चलता है कि अच्छा, इसलिए मुझे वह रोल नहीं मिला।'
उन्होंने कहा, 'मुझे अब भी बुरा लगता है, थोड़ी तकलीफ होती है। लेकिन मुझे लगता है कि एक एक्टर के तौर पर, सिर्फ मेरे ही नहीं, बल्कि सभी के, हममें एक तरह की मजबूती आ जाती है। रिजेक्शन चाहे उस पल कितना भी दुखद क्यों न हो, हमने उससे उबरना भी सीख लिया है।'
आखिर वक्त तक करना चाहती हैं एक्टिंग
उन्होंने कहा, 'मैं अपनी मौत के बिस्तर तक, यानी मरने तक एक्टिंग करना चाहती हूं। लेकिन सबसे बड़ी सीख जो मुझे मिली, वह यह है कि वे हमेशा सीखने के लिए तैयार रहते हैं।'
'मैक्स, मिन एंड मियावाजाकी' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।
उन्होंने कहा, 'मैं अपनी मौत के बिस्तर तक, यानी मरने तक एक्टिंग करना चाहती हूं। लेकिन सबसे बड़ी सीख जो मुझे मिली, वह यह है कि वे हमेशा सीखने के लिए तैयार रहते हैं।'
'मैक्स, मिन एंड मियावाजाकी' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।