{"_id":"096b126c-d035-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"now-actress-wants-gray-shade-roll","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब बदनामी से नहीं डर रही हैं नायिकाएं!","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
अब बदनामी से नहीं डर रही हैं नायिकाएं!
सौदामिनी पांडेय/फीचर डेस्क
Updated Mon, 10 Jun 2013 09:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब वह दौर गया जब फिल्मों की नायिकाएं ग्रे शेड वाले किरदार लेने से बचती थीं। अब उन्हें ऐसे किरदार चाहिए जो उन्हें पर्दे पर हीरो के बराबर पर खड़ा कर सकें।
विज्ञापन
आज के दौर में फिल्म के विषय बदल गए हैं, कहानियां अलग लिखी जाने लगी हैं। नई तरह से किरदार गढ़े जाने लगे हैं। इसी क्रम में एक अरसे से हीरोइनों के किरदार में भी कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं। किरदार पहले की तुलना में अब ज्यादा प्रयोगवादी हो गए हैं।
विज्ञापन
पहले फिल्मों की हीरोइन निगेटिव रोल करने में संकोच करती थीं। क्योंकि उन्हें इससे दर्शकों के बीच छवि खराब हो जाने का डर सताता था। पहले राखी और नंदा जैसी गिनी चुनी नायिकाओं ने यह खतरा मोल उठाया।
विज्ञापन
90 के दशक से बदलाव
90 के दशक से हीरोइनों ने ग्रे और निगेटिव किरदारों में रुझान दिखाना शुरू किया। पॉजिटिव के बजाय निगेटिव शेड को उन्होंने अभिनय के जौहर दिखाने के बेहतरीन मौके के तौर पर लिया। इसके बाद काजोल और प्रियंका के ग्रे शेड वाले जबरदस्त किरदारों ने दर्शकों के बीच खलबली मचा दी।
दर्शकों की चहेती काजोल को जब निर्देशक राजीव राय ने `गुप्त’ फिल्म में निगेटिव किरदार ऑफर किया तो उन्होंने हां करने में देरी नहीं की। फिल्म में एक तरफ प्रेमिका और दूसरी तरफ खून खराबे से भी गुरेज न करने वाली लड़की, दोनों चरित्रों को काजोल ने बड़ी खूबसूरती से निभाया। 1998 में इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला।
प्रतिभा की धनी प्रियंका चोपड़ा की बात करें, तो उन्होंने भी सकारात्मक किरदारों से अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत की लेकिन 2005 में `ऐतराज’ के जरिए उन्होंने साबित कर दिया कि वह अच्छे और बुरे दोनों किरदार निभाने में बखूबी सक्षम हैं।
नायिकाओं ने किए प्रयोग
विशाल भारद्वाज की फिल्म 'सात खून माफ' ने उन्हें अभिनय की ऊंचाइयों पर एक कदम और आगे बढ़ा दिया। इस फिल्म में उनके जज्बात और क्रूरता दोनों ने दर्शकों को हिला कर रख दिया।
रामू की 'रंगीला' से रातोंरात सुर्खियां बटोरने वाली उर्मिला मातोंडकर ने भी लीक से हट कर किए रोल के लिए खूब वाहवाही बटोरी। 'प्यार तूने क्या किया' में एकतरफा प्रेमिका के किरदार में उन्होंने जान डाल दी। रामू की ही एक और सस्पेंस थ्रिलर 'कौन' में उन्होंने अपनी अभिनय की बदौलत क्लाइमेक्स तक सस्पेंस बरकरार रखा।
2002 में निगेटिव रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड मिला। कैटरीना कैफ ने 'रेस' में नकारात्मक रोल से दर्शकों को तगड़ा झटका दिया। उनके किरदार को सराहना भी मिली। अभिनय के मामले में अव्वल विद्या बालन ने `इश्किया’ में अपने रूप का ऐसा जादू चलाया कि नसीरुद्दीन शाह और अरशद वारसी के किरदार भी उनसे पार नहीं पा सके।
नए किरदारों की खोज
शानदार अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों में जगह बना चुकी कोंकणा सेन ने भी अंग्रेजी फिल्म 'द प्रेसिडेंट इज कमिंग' और 'एक थी डायन' के नकारात्मक किरदार बखूबी निभाए। इसी फेहरिस्त में ग्लैमरस और हॉट बिपाशा बसु के 'जिस्म' के किरदार ने नकारात्मक होने के बावजूद लोगों को दीवाना बना दिया।
बच्चों जैसे मासूमियत वाली प्रीति जिंटा ने भी रोमांटिक रोल से इतर 'अरमान' फिल्म में दिमागी तौर पर विक्षिप्त लड़की का किरदार बेहतरीन ढंग से निभाया।
आने वाले समय में भी नायिकाएं अपने लिए ऐसे रोल खोज रही हैं जहां उनके अभिनय करने की संभावना सबसे ज्यादा हो। फिर वह रोल निगेटिव ही क्यों न हो।