गणतंत्र दिवस परेड में दिखी भारतीय सिनेमा की झलक; भंसाली ने पेश की झांकी, बोले- 'मेरे लिए सम्मान की बात है'
Republic Day 2026: हर साल गणतंत्र दिवस परेड पूरे आयोजन का खास आकर्षण होती है। इस बार यह और भी खास रही। पहली बार परेड में भारतीय सिनेमा से संबंधित झांकी की झलक दिखी। इसे नामी निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली ने तैयार किया।
विस्तार
आज 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भारत की ताकत दिखी। आकाश लड़ाकू विमानों की गगनभेदी गर्जना से गूंज उठा। इसी के साथ भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति की झलक भी दिखाई दी। हर साल परेड में झांकियां मन मोह लेती हैं। इस बार कर्तव्य पथ पर भारतीय सिनेमा की झलक भी देखने को मिली। दरअसल, पहली बार 'भारत गाथा' झांकी को पेश किया गया। इस झांकी की थीम संजय लील भंसाली ने तैयार किया। उन्होंने इसे लेकर खुशी जताई है। साथ ही इसे सम्मान की बात कहा है।
भंसाली ने दिखाई भारतीय सिनेमा की झलक
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारतीय सिनेमा और इसकी कहानी कहने की परंपरा को सेलिब्रेट करते हुए गणतंत्र दिवस परेड में झांकी पेश करने की कमान संजय लीला भंसाली को दी थी। भंसाली अपनी फिल्मों के भव्य सेट निर्माण के लिए जाने जाते हैं। परेड में भारतीय सिनेमा की गौरवशाली कहानी दिखाने की जिम्मेदारी भी उन्होंने बखूबी निभाई है। कर्तव्य पथ पर जब 'भारत गाथा' झांकी निकली तो लोग देखते रह गए। इसमें भारतीय सिनेमा की झलक और बॉक्स ऑफिस का नजारा देखने को मिला।
सिनेमा को बताया भारत की कहानी कहने का जरिया
इस झांकी के नाम से ही समझा जा सकता है कि भंसाली ने इसके जरिए भारतीय सिनेमा को भारत की गाथा कहने का माध्यम बताया। कर्तव्य पथ पर जब 'भारत गाथा' झांकी निकली तो यह हर सिनेमा प्रेमी के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पल रहा। यह पहला मौका था जब जब किसी भारतीय फिल्म निर्देशक ने देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह में भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व किया। भारत गाथा के तहत बनाई गई इस झांकी में सिनेमा को सिर्फ कला या मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की पुरानी कहानी कहने की परंपरा का एक ताकतवर हिस्सा दिखाया गया है। ये परंपरा लोककथाओं और महाकाव्यों से शुरू होकर थिएटर, संगीत और आखिरकार सिनेमा की वैश्विक भाषा तक पहुंची है। भारत गाथा में सिनेमा को ऐसा माध्यम दिखाया गया है जो भारत की कहानियों, सोच और भावनाओं को पीढ़ियों और जगह-जगह तक पहुंचाता है।
भंसाली ने जताई खुशी
'भारत गाथा' को पेश करने पर भंसाली ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, 'थीम 'भारत गाथा' के तहत गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा और क्रिएटर कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ मिलकर इस झांकी को तैयार करना भारत की पुरानी कहानियों और उन्हें सिनेमा के जरिए दोबारा कहने की ताकत को सलाम है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को भी दिखाता है, जिसमें भारतीय कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने और सिनेमा को भारत की सबसे मजबूत सांस्कृतिक आवाज के रूप में पेश करने की बात है'।
झांकी में क्या-क्या देखने को मिला?
भंसाली ने इस झांकी को 'भारत कथा: श्रुति, कृति, दृष्टि' थीम पर बनाया। झांकी की शुरुआत 'ओम' की ब्रह्मांडीय गूंज से हुई, जो ध्वनि, ज्ञान और सृष्टि की उत्पत्ति का प्रतीक है। पहले सेगमेंट, श्रुति में भारत की समृद्ध मौखिक परंपराओं को एक पीपल के पेड़ के नीचे शिष्यों को ज्ञान देते हुए गुरु के माध्यम से दिखाया गया। इसमें बहती हुई ध्वनि-तरंगों के मोटिफ्स बोली गई बात के माध्यम से ज्ञान के संचार को दर्शाते हैं। दूसरा सेगमेंट, कृति है। इसमें मौखिक से लिखित अभिव्यक्ति में बदलाव को दिखाया, जिसमें भगवान गणेश महाभारत लिखते हुए दिखाए गए हैं, जो पवित्र लेखन और ज्ञान के संरक्षण का प्रतीक है। अंतिम सेगमेंट, दृष्टि है। इसमें भारत के आधुनिक मीडिया परिदृश्य को दिखाता है, जिसमें पुराने कैमरे, फिल्म रील, सैटेलाइट प्रतीक, अखबार और बॉक्स-ऑफिस की तस्वीरें सिनेमा, प्रसारण और प्रिंट मीडिया के विकास को दिखाती हैं।