‘नाना पाटेकर उतने सख्त नहीं, जितना लोग समझते हैं’; ‘संकल्प’ फेम सौरभ गोयल ने सुनाए मजेदार किस्से
Saurabh Goyal Exclusive Interview: अक्षय कुमार के साथ फिल्म 'सरफिरा' और नाना पाटेकर के साथ सीरीज 'संकल्प' जैसे प्रोजेक्ट कर चुके सौरभ गोयल अमर उजाला के साथ अपने करियर को लेकर खास बातचीत की है। पढ़िए, बातचीत के प्रमुख अंश-
विस्तार
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के किच्छा से निकले सौरभ गोयल ने कम समय में ही सीरीज और फिल्मों की दुनिया में अपने लिए खास जगह बना ली है। फिल्म ‘सरफिरा’ और ‘छोरी’ के अलावा ‘संकल्प’ सीरीज में उनके अभिनय को सराहा गया है। सौरभ ने बताया कि छोटे रोल्स से शुरुआत करने के बाद उन्होंने कैसे अपने लिए एक्टिंग की दुनिया में जगह बनाई। इस दौरान किन लोगों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया? करियर में कैसे उतार-चढ़ाव आए? इन बातों पर खुलकर बातचीत की है।
थिएटर से शुरू हुआ सफर, इंजीनियरिंग के बाद पहुंचे मुंबई
सौरभ गोयल ने एक्टिंग को शुरुआत में करियर के तौर पर नहीं देखा था। वह कहते हैं, ‘‘मैंने कभी ऐसा सोचा नहीं था कि प्रोफेशनल एक्टिंग को चुनूंगा। स्कूल में थोड़ा बहुत नाच-गाना कर लिया था। फिर कॉलेज टाइम में एक थिएटर वर्कशॉप का हिस्सा बना। वहीं से मुझे लगा कि शायद यह ऐसा काम है, जहां मुझे सराहा जाएगा। तब लगा मैं इसको अपना प्रोफेशन भी बना सकता हूं। फिर तो मैंने अपनी इंजीनियरिंग पूरी की और उसके बाद मुंबई आ गया।'
आशुतोष गोवारिकर ने दिया मौका
शुरुआत में सौरभ को छोटे रोल्स मिले लेकिन इनसे से ही आगे के रास्ते बने। वह बताते हैं, 'मैंने बहुत छोटे छोटे प्रोजेक्ट किए हैं। टीवी शो ‘परवरिश’ में मुझे पहली बार मौका मिला, यह एक कैमियो रोल था। शायद 2013 की बात है। उसके बाद मैंने आशुतोष गोवारिकर सर के साथ 'एवरेस्ट’ सीरीज की। धीरे-धीरे मैंने वेब सीरीज और फिल्मों में काम करना शुरू किया। जब वेब सीरीज का दौर शुरू हुआ, तब मैंने काफी काम किया। नागेश कुकुनूर के साथ ‘द टेस्ट केस’ किया और ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’ किया। ऐसे ही सफर चलता रहा।'
नागेश कुकुनूर ने दूसरा टेक नहीं मांगा
एक्टिंग करियर में सौरभ गोयल के लिए सबसे खास अनुभवों में से एक नागेश कुकुनूर के साथ काम करना रहा है। वह कहते हैं, 'नागेश सर के साथ बहुत अच्छे एक्सपीरियंस रहे हैं। बहुत ही सिंपल इंसान हैं, बहुत ही ईजी गोइंग हैं। मैं एक फिल्म उनके साथ कर रहा था, जो बाद में रिलीज नहीं हुई। लेकिन जब मैंने उसमें पहला शॉट दिया, वो मेरा पहला सीन था। उन्होंने मुझे कहा कि दूसरा टेक नहीं चाहिए। साथ् ही मेरी तारीफ भी की। वह बोले थे कि अपने अगले प्रोजेक्ट में मुझे जरूर शामिल करेंगे। यह बात मेरे लिए अभी तक का बेस्ट मोमेंट है। उसके बाद मैंने उनके साथ 'द टेस्ट केस' और 'सिटी ऑफ ड्रीम्स' किया था।’
नुसरत भरुचा ने कभी नया महसूस नहीं होने दिया
फिल्म ‘छोरी’ सौरभ गाेयल के करियर के लिए अहम पड़ाव साबित हुई। यह उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी। यह ऐसा मौका था, जहां उन्हें पहली बार बड़ा रोल मिला। वह कहते हैं, 'इसमें मैं बतौर लीड काम कर रहा था। पहली बार नुसरत के साथ काम कर रहा था। लेकिन जिस तरीके से उन्होंने मुझे वेलकम किया और मुझे कंफर्टेबल फील कराया, ऐसा कभी नहीं लगा कि मैं नया एक्टर हूं। जब हम सीन करते थे, तो हम एक्टर्स की तरह आमने-सामने होते थे। मेरे लिए उनके साथ काम करना बहुत अच्छा अनुभव रहा है।'
छोरी ने करियर को दिया नया मोड़
फिल्म ‘छोरी’ ने सौरभ गोयल को एक बड़ा मंच भी दिया। वह बताते हैं, 'यह फिलम मेरे लिए बहुत अच्छा प्रोजेक्ट था। अमेजन प्राइम वीडियो पर आया, तो एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिला और काफी सराहना भी मिली। उसके बाद ‘छोरी 2’ भी की थी।’
प्रकाश झा के साथ सीन को समझने की मिली आजादी
सीरीज ‘संकल्प’ को लेकर पिछले दिनों सौरभ गोयल चर्चा में रहे। इसे प्रकाश झा ने निर्देशित किया था। इस सीरीज के बारे में संकल्प का कहना है, 'यह एक पॉलिटिकल रिवेंज ड्रामा है। इसमें नाना पाटेकर सर और कई अच्छे कलाकार हैं। डायरेक्टर प्रकाश झा का काम करने का तरीका बहुत साफ है। उन्हें पता होता है कि एक्टर और सीन से क्या चाहिए? सेट पर वो ज्यादा समझाते नहीं हैं। बस एक दो बातें कहते हैं और आपको अपने तरीके से काम करने देते हैं। मैंने इस सीरीज में वासुदेव रंजन का रोल किया है। उस कैरेक्टर के अलग शेड्स थे।’
नाना पाटेकर को लेकर बनी छवि से अलग अनुभव सौरभ गोयल को हुआ था। ‘संकल्प’ के सेट पर उनके साथ बिताया समय संकल्प के लिए यादगार रहा है। वह कहते हैं, ‘मेरे लिए तो नाना सर बहुत मस्तीखोर निकले। सेट पर माहौल हल्का रखते थे। बातें करते थे, साथ बैठते थे। कई बार खुद बुलाकर पास बैठा लेते थे। इस दौरान सिर्फ सीन या शूट की बातें नहीं होती थीं, जिंदगी की बातें भी होती थीं।'
सौरभ आगे कहते हैं, ‘जो हम सुनते आए हैं कि वो बहुत गुस्सा करते हैं, ऐसा कुछ नहीं है। सेट पर वो बहुत प्रोफेशनल रहते हैं। बहुत ही अच्छे इंसान हैं। सीन डिस्कस करते थे, कहानियां सुनाते हैं। यह सब मेरे लिए बहुत मोटिवेटिंग एक्सपीरियंस रहा। नाना सर ने मुझे कहा था कि कभी खुद को किसी से कम मत समझो और अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा रखो। उनकी कही यह बात आज भी मेरे मन में बसी है।’