‘उन्हें डर है पंजाब एक हो जाएगा’, ‘सतलुज’ के बैन पर बोले डायरेक्टर हनी त्रेहान; CBFC को लेकर दिया बड़ा बयान
Honey Trehan: फिल्ममेकर हनी त्रेहान ने अपनी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चल रहे विवाद पर खुलकर बात की है। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फिल्ममेकर हनी त्रेहान ने ‘सतलुज’ को लेकर कहा कि फिल्म को लेकर डर इसलिए पैदा हुआ क्योंकि यह पंजाब को एकजुट कर सकती है। साथ ही उन्होंने कई बड़े बयान दिए।
कई जगह दिखाई जा रही फिल्म
फिल्म ‘सतलुज’ को ZEE5 से हटाए जाने के बाद भी लोग इसे अलग-अलग जगहों पर देख रहे हैं। फिल्मफेयर से बातचीत में हनी त्रेहान ने बताया कि अब यह फिल्म गुरुद्वारों और कम्युनिटी सेंटर्स में दिखाई जा रही है। सिर्फ पंजाब ही नहीं, बल्कि जम्मू, हरियाणा, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में भी इसकी स्क्रीनिंग हो रही है।
उन्होंने कहा, ‘लोग गुरुद्वारों में फिल्म देख रहे हैं और उसके बाद लंगर भी हो रहा है। यह हमारे लिए काफी हैरान करने वाला था।’ हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह पायरेसी का समर्थन नहीं करते, भले ही फिल्म की पायरेटेड कॉपी ऑनलाइन घूम रही हो।
शायद उन्हें डर है कि पंजाब एक हो जाएगा
हनी त्रेहान का कहना है कि फिल्म को लेकर जो डर जताया जा रहा है, वह सही नहीं है। उन्होंने कहा, ‘शायद उन्हें डर है कि पंजाब एकजुट हो जाएगा। जहां यह फिल्म लोगों को जोड़ रही है, वहीं कुछ नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जो लोगों को बांटने का काम करते हैं।’
उन्होंने यह भी कहा कि यह मानना गलत है कि एक फिल्म देश की शांति या सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। उनके मुताबिक, भारत एक मजबूत देश है और ऐसी बातें बेवजह का डर पैदा करती हैं।
CBFC से तीन साल तक चला विवाद
डायरेक्टर ने बताया कि इस फिल्म को सेंसर बोर्ड (CBFC) से सर्टिफिकेट मिलने में करीब तीन साल लग गए। फिल्म के विषय और ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं, जिसकी वजह से यह प्रक्रिया लंबी चली।
उन्होंने बताया कि एक सुनवाई के दौरान रिवाइजिंग कमेटी के एक सदस्य ने कहा था कि आजकल कोई इतनी खुलकर सच्चाई नहीं बोलता। हनी त्रेहान के मुताबिक, यही बात बताती है कि फिल्म को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
डर सच्चाई का है
जब उनसे पूछा गया कि आखिर लोग किस बात से डर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘डर सच्चाई का है।’ उन्होंने कहा कि फिल्म एक आम इंसान की कहानी है, जो सिस्टम के खिलाफ खड़ा होता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि फिल्म में पूरी पुलिस फोर्स को गलत नहीं दिखाया गया है। उन्होंने कहा, ‘फिल्म में कई बार कहा गया है कि कुछ पुलिसकर्मी थे, जिन्होंने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया। हर सिस्टम में कुछ लोग ऐसा करते हैं, और फिल्म उसी के बारे में बात करती है।’
सच्ची घटनाओं पर आधारित है फिल्म
हनी त्रेहान के मुताबिक, ‘सतलुज’ कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि यह कानूनी दस्तावेजों और कोर्ट के फैसलों पर आधारित है। इसमें CBI स्पेशल कोर्ट, सेशंस कोर्ट, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मामलों का जिक्र है।
सेंसरशिप पर भी उठाए सवाल
उन्होंने सेंसरशिप पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह तय नहीं करना चाहिए कि लोग क्या देखें या क्या लिखें। उनके मुताबिक, यह काम दर्शकों पर छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘सरकार हमें क्यों बताए कि हमें क्या देखना है, क्या करना है या क्या लिखना है? इससे देश मजबूत नहीं बनता।’
‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित फिल्म है। इसे 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन दो दिन बाद ही प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इसके बाद से यह फिल्म अलग-अलग जगहों पर स्क्रीन की जा रही है और इसके मेकर्स अब भी इसे हटाए जाने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
ये भी पढ़ें- 'दिलजीत दोसांझ ने सच दिखाया है'; फिल्म 'सतलुज' विवाद पर पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख ने की टिप्पणी