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पहले बॉलीवुड में 'कुर्बानी' दी फिर करियर के शिखर पर बने थे संन्यासी, निधन के बाद मिला बड़ा सम्मान
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दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना को इस बार का दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया जाएगा। दादा साहेब फाल्के भारतीय फिल्म उद्योग का सर्वोच्च सम्मान है। विनोद खन्ना का पिछले साल 27 अप्रैल को कैंसर के कारण 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। विनोद खन्ना 1968 में 'मन का मीत' फिल्म से कैरियर की शुरुआत की थी इस फिल्म में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया और उनकी आखिरी फिल्म 'एक थी रानी ऐसी भी' थी। विनोद खन्ना ने अपने करियर में 150 से ज्यादा फिल्में की।
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विनोद खन्ना
- फोटो : SELF
विनोद खन्ना पंजाब के गुरदासपुर से बीजेपी सांसद थे। विनोद बॉलीवुड के इकलौते ऐसे एक्टर कहे जाते हैं जिन्होंने अपने करियर की चोटी पर आकर रिटायरमेंट लिया। अपने करियर से रिटायरमेंट लेकर विनोद संन्यासी बन गए थे।
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vinod khanna
विनोद खन्ना का नाम ऐसे एक्टर्स में शुमार था जिन्होंने शुरुआत तो विलेन के किरदार से की थी लेकिन बाद में हीरो बन गए। विनोद खन्ना ने 1971 में सोलो लीड रोल में फिल्म ‘हम तुम और वो’ में काम किया था। 1999 में विनोद खन्ना को उनके इंडस्ट्री में योगदान के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।
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यादों के झरोखे से/विनोद खन्ना
विनोद खन्ना अमिताभ बच्चन के कड़े प्रतिद्वंदी माने जाते थे। दोनों सुपरस्टार्स ने ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘परवरिश’, ‘अमर अकबर एंथॉनी’ जैसी फिल्मों में साथ में काम किया था। वह बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन और गुड लुकिंग एक्टर्स में शुमार थे।
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विनोद खन्ना
विनोद खन्ना के काम की पहचान तब हुई जब सन 1980 के दौर में वह शिखर पर थे लेकिन एक दिन उन्होंने ओशो रजनीश से प्रभावित होकर फिल्म और परिवार दोनों से संन्यास ले लिया। पत्नी गीतांजली से 1985 में तलाक के बाद अपने अकेलेपन से विनोद खन्ना अपना मानसिक संतुलन भी कुछ हद तक खो चुके थे लेकिन फिल्मों में फिर से काम और सफलता मिलने और फिर 1990 में कविता दफ्तरी से दूसरी शादी कर वो पुराने विनोद खन्ना बन लौटे।
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