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Exclusive: गुजराती फिल्म ‘धबकारो’ से कैसे जुड़े साजिद नाडियावाला? निर्देशक ने साझा की फिल्म से जुड़ी खास बातें

Kiran Vinod Kumar Jain Kiran Vinod Kumar Jain
Updated Sat, 02 May 2026 04:47 PM IST
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सार

Director Abhishek Shah Exclusive Interview: रिजनल सिनेमा की कई फिल्मों ने देश और दुनिया में खूब वाहा-वाही हासिल की है। गुजराती सिनेमा भी लगातार अलग तरह की कहानियां दर्शकों के लिए लेकर आ रहा है। हाल ही में अभिषेक शाह निर्देशित फिल्म ‘धबकारो’ रिलीज हुई। अमर उजाला से इस फिल्म के निर्देशक ने लंबी बातचीत की है। 

Abhishek Shah Dhabkaaro Gujarati Movie Director Exclusive Interview Share Films Details
फिल्म 'धबकारो' के निर्देशक अभिषेक शाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गुजराती सिनेमा को नई पहचान देने वाले निर्देशक अभिषेक शाह अपनी अगली फिल्म ‘धबकारो’ के कारण एक बार फिर से चर्चा में हैं। ‘हेलारो’ जैसी नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म देने के बाद उनसे उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। लेकिन निर्देशक अभिषेक शाह इन उम्मीदों को अपने काम पर हावी नहीं होने देते हैं। हाल ही में अमर उजाला डिजिटल से एक खास बातचीत उन्होंने की है। इस बातचीत में निर्देशक अभिषेक शाह ने फिल्म ‘धबकारो’ पर खुलकर बात की है। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश- 

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नेशनल अवॉर्ड के प्रेशर को हावी नहीं होते देते हैं 
निर्देशक अभिषेक शाह को फिल्म ‘हेलारो’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। इस फिल्म के बाद उनकी सोच में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया। वह कहते हैं, ‘जिस दिन मुझे नेशनल अवॉर्ड मिला, उसी दिन मैंने उसे अपने दिमाग से हटा दिया। अगर मैं उसे खुद पर हावी होने देता, तो हर अगली फिल्म पर यही प्रेशर रहता कि इसे पहली वाली से बेहतर बनाना है। फिर उससे भी बेहतर बनाना है। सच यह है कि हर फिल्म को नेशनल अवॉर्ड नहीं मिलता है। मैंने कभी फिल्म अवॉर्ड के लिए बनाई भी नहीं थी।’

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वह आगे कहते हैं, ‘अगर मैं यह सोचने लगूं कि मेरी फिल्म ‘अवॉर्ड विनिंग’ होगी या नहीं, लोग मुझे जज करेंगे कि मैंने पहले नेशनल अवॉर्ड जीता है, तो क्रिएटिविटी खत्म हो जाएगी। मैं सिर्फ कहानी पर ध्यान देता हूं, उसे ईमानदारी से कैसे कहूं, बस यही सोचता हूं।’ 

 

Abhishek Shah Dhabkaaro Gujarati Movie Director Exclusive Interview Share Films Details
फिल्म 'धबकारो' का एक सीन - फोटो : अमर उजाला

फिल्म ‘धबकारो’ एक खास कहानी है 
अपनी नई फिल्म ‘धबकारो’ के बारे में बात करते हुए अभिषेक शाह कहते हैं, ‘जब हमारा जन्म होता है, तब से लेकर मृत्यु तक एक चीज हमारे साथ रहती है, वो है हमारी हार्टबीट। उसी के एक खास रिदम को गुजराती में ‘धबकारो’ कहा जाता है। यह ऐसी चीज है, जो हमेशा हमारे साथ रहती है, लेकिन हम अक्सर उस पर ध्यान नहीं देते। हमारी फिल्म भी एक ऐसे इंसान की कहानी है, जिसका दिल सही रिदम में नहीं धड़कता है। उसका ‘धबकार’ बिगड़ा हुआ है। लेकिन फिल्म में कुछ ऐसा होता है, जिससे वह अपनी खोई हुई रिदम को वापस हासिल करता है। उसी सफर की कहानी ‘धबकारो’ है।’

हर कहानी अपनी सच्चाई लेकर आती है
अभिषेक शाह फिल्म के कलाकारों के चयन के बारे में कहते हैं, ‘जब मैं किसी एक्टर को अप्रोच करता हूं, तो यह नहीं सोचता कि उनके मन में मेरे लिए क्या इमेज होगी? मैं खुद भी उनके पास किसी प्री-कंसीव्ड नोटशन के साथ नहीं जाता हूं। वैसे भी हर स्क्रिप्ट अपनी एक अलग पहचान और सच्चाई लेकर आती है, उसी हिसाब से कलाकार भी फिल्म से जुड़ते हैं।’

Abhishek Shah Dhabkaaro Gujarati Movie Director Exclusive Interview Share Films Details
फिल्म 'धबकारो' के कलाकार - फोटो : अमर उजाला

फिल्म बनाने के पीछे एक खास मकसद होता है
अपनी फिल्मों में दिखने वाले सोशल एंगल पर निर्देशक कहते हैं, ‘यह कोई कॉन्शियस डिसीजन नहीं है, यह मेरे अंदर से आता है। मैं जिस माहौल में पला-बढ़ा हूं, वहां से यह चीज आई है। मुझे हमेशा लगता है कि अगर मैं समाज से कुछ कह नहीं पा रहा हूं, तो मेरे काम का कोई मतलब नहीं है। लोग सोचते हैं कि सोशल फिल्में कमर्शियल नहीं हो सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। ‘दंगल’ जैसी फिल्म इसका उदाहरण है, वह कमर्शियल भी थी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक भी। मेरे लिए कमर्शियल सिनेमा वही है, जो लोगों को पसंद आए। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि मैं अपनी कहानी ईमानदारी से कह पाऊं। बाकी क्या होगा? अवॉर्ड मिलेगा या नहीं? वह बाद की बात है।’

साजिद नाडियाडवाला के साथ कैसे जुड़े? 
‘धबकारो’ फिल्म के साथ साजिद नाडियाडवाला का प्रोडक्शन हाउस भी जुड़ा है। यह कैसे मुमकिन हुआ? पूछने पर निर्देशक अभिषेक शाह कहते हैं, ‘जब साजिद नाडियाडवाला और उनकी टीम से बातचीत हुई, तो यह हमारे लिए बहुत खास पल था। उनका गुजरात से जो जुड़ाव है, वह दिल को छूने वाला था। उन्होंने खुद कहा कि वह गुजराती फिल्म बनाना चाहते हैं। जब उन्होंने फिल्म देखी और हमारे साथ जुड़ने का फैसला लिया, तो यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात थी। गुजराती सिनेमा अभी भी उतना बड़ा नहीं है, ऐसे में इतना बड़ा नाम जुड़ता है तो लोगों का परसेप्शन बदलता है। हमें भी साफ दिखा कि फिल्म को लेकर लोगों का एंगेजमेंट और एक्साइटमेंट बढ़ा है।’

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