Exclusive: ‘मुझे कॉमेडी में फंसा दिया गया था’, देवेन भोजानी ने साझा की फिल्म ‘धबकारो’ और करियर से जुड़ी बातें
Deven Bhojani Exclusive Interview: करीब 40 साल तक ऑडियंस को हंसाने वाले देवेन भोजानी अब अपनी ही बनाई इमेज से बाहर निकलना चाहते हैं। हाल ही में अभिनेता ने अपनी गुजराती फिल्म ‘धबकारो’ और करियर को लेकर अमर उजाला से खास बातचीत की है।
विस्तार
अभिनेता देवेन भोजानी मानते हैं कि कॉमेडी ने उन्हें पहचान दी, लेकिन उसी ने उन्हें सीमित भी कर दिया। अब वे गुजराती फिल्म ‘धबकारो’ में नजर आ रहे हैं। इसके जरिए उन्हें खुद को एक अलग रूप में पेश करने का मौका है। अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में उन्होंने टाइपकास्टिंग, अपने करियर के उतार-चढ़ाव, ‘धुरंधर’ में राकेश बेदी की कास्टिंग और इंडस्ट्री के नजरिए पर खुलकर बात की।
‘मुझे कॉमेडी में सीमित कर दिया गया था’
देवेन कहते हैं, ‘मैंने कॉमेडी बहुत की है और मुझे उस पर गर्व है, क्योंकि कॉमेडी करना सबसे मुश्किल होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मुझे उसी में सीमित कर दिया गया। लोगों ने मान लिया कि मैं सिर्फ यही कर सकता हूं, जबकि मेरे अंदर और भी बहुत कुछ है। एक बार आपने जो कर लिया, लोग आपको उसी में फिट कर देते हैं।’
‘थिएटर में विलेन किया पर किसी ने देखा नहीं’
देवेन आगे बताते हैं, ‘थिएटर में मैंने बहुत अलग-अलग तरह के रोल किए हैं। अपने पहले प्ले में मैंने एक विलेन का रोल किया था और उसके लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला था। यानी शुरुआत से ही मैंने खुद को अलग-अलग किरदारों में आजमाया है। लेकिन टीवी और फिल्मों में लोगों को यह पता ही नहीं है, इसलिए वे उसी सुरक्षित रास्ते पर चलते हैं। उन्हें जो दिखता है, वही सच लगने लगता है।’
‘स्क्रिप्ट सुने बिना ही आधा मन बना लिया था’
नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर अभिषेक शाह के साथ काम करने के अनुभव को लेकर देवेन कहते हैं, ‘जब अभिषेक का फोन आया तो मैं बहुत खुश हो गया। मैंने उनकी फिल्म ‘हेलारो’ देखी थी और मैं पहले से ही उनके काम से प्रभावित था। सच कहूं तो ‘धबकारो’ की स्क्रिप्ट सुने बिना ही मेरा 50 प्रतिशत मन बन गया था। फिर जिस तरह उन्होंने नैरेशन दिया, मुझे पूरी फिल्म आंखों के सामने नजर आने लगी और समझ आ गया कि यह कुछ अलग और खास है।’
‘राकेश बेदी और गौरव गेरा हमारी उम्मीद बढ़ाते हैं’
अंत में देवेन कहते हैं, ‘राकेश बेदी जी को ‘धुरंधर’ में अलग तरह के किरदार में देखना अच्छा लगा। इतने साल तक उन्हें कॉमेडी में ही देखा गया, लेकिन इस तरह की कास्टिंग हम जैसे एक्टर्स के लिए उम्मीद बढ़ाती है। गौरव गेरा को भी जिस तरह नए नजरिए से कास्ट किया गया, वह भी काबिल-ए-तारीफ है। मैं आदित्य धर और मुकेश छाबड़ा को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने ऐसा फैसला लिया। जब कलाकारों को नए नजरिए से देखा जाता है, तो लगता है कि हमें भी अलग तरह के किरदार करने का मौका मिल सकता है।’
‘यह फिल्म मेरे लिए गेम चेंजर हो सकती है’
देवेन कहते हैं, ‘पिछले कुछ साल में मुझे अलग-अलग तरह के रोल करने का मौका मिलना शुरू हुआ है, लेकिन ‘धबकारो’ उन सब से एक कदम आगे है। इसमें जो किरदार है, वह मुझे पूरी तरह एक्सप्लोर करने का मौका देता है। मुझे लगता है कि यह फिल्म मेरे लिए गेम चेंजर हो सकती है और लोग मुझे एक नए नजरिए से देखेंगे।’
‘साराभाई पहले नहीं चला, बाद में कल्ट बना’
अपने टीवी शो ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ को याद करते हुए देवेन कहते हैं, ‘शुरुआत में यह शो इतना पॉपुलर नहीं था। लोगों को उसका ह्यूमर समझ नहीं आया। लेकिन जब रिपीट टेलीकास्ट हुए, तो धीरे-धीरे यह लोगों के बीच लोकप्रिय हुआ और आज इसे कल्ट शो कहा जाता है। दूसरा सीजन बनाना सबसे मुश्किल था, क्योंकि हमें समझ नहीं आ रहा था कि पुराना फ्लेवर रखें या कुछ नया करें। तीसरे सीजन को लेकर हमने तय किया है कि जब तक 110 प्रतिशत यकीन नहीं होगा, तब तक हम इसे नहीं बनाएंगे, क्योंकि ऑडियंस की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं।’