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Kishore Kumar: अनूठा अंदाज; नेशनल अवॉर्ड लेने से इनकार, जानें किशोर दा की जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प किस्से
Mon, 04 Aug 2025 02:10 AM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Mon, 04 Aug 2025 02:10 AM IST
सार
Kishore Kumar Birthday: किशोर कुमार की आज 96वीं बर्थ एनिवर्सरी है। उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को हुआ था। इस मौके पर आपको उनकी जिदंगी से जुड़े दिलचस्प किस्से बताते हैं।
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किशोर कुमार
- फोटो : एक्स
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विस्तार
संगीत और अभिनय की दुनिया में एक ऐसा नाम है जो सदाबहार और हमेशा के लिए अमर है। वो नाम है किशोर कुमार का। दिग्गज सिंगर किशोर दा की आज 96वीं बर्थ एनिवर्सरी है। क्या आप जानते हैं कि इतने लंबे करियर में जहां उन्होंने कई सुपरहिट गाने दिए और लाखों-करोड़ों लोगों को दीवाना बनाया, वहीं उन्हें एक भी नेशनल अवॉर्ड नहीं मिला। हालांकि एक बार उन्हें पुरस्कार मिलने ही वाला था कि आखिरी वक्त पर खेल पलट गया। चलिए आपको उनकी जिदंगी से जुड़े दिलचस्प किस्सों को साझा करते हैं।
क्यों नहीं मिला नेशनल अवॉर्ड?
विक्की लालवानी से बातचीत के दौरान किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक पुराना वाकया साझा किया था, जब उनके पिता को नेशनल अवॉर्ड मिलने वाला था, लेकिन एक खास शर्त ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अमित कुमार ने बताया कि फिल्म 'दूर गांव की छांव में' के लिए किशोर कुमार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की पूरी संभावना थी। इस फिल्म में उन्होंने अपने बेटे अमित कुमार के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी और एक बेहद गंभीर किरदार में नजर आए थे।
किशोर कुमार की इस भूमिका को दर्शकों और आलोचकों से खूब सराहना मिली थी और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ी हिट साबित हुई थी। फिल्म को नेशनल अवॉर्ड के लिए नामांकित किया जाना तय था, लेकिन आखिरकार उसे अवॉर्ड नहीं मिला। वजह ये थी कि किशोर कुमार से इसके लिए रिश्वत मांगी गई थी, जिसे देने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कह दिया था कि वो किसी भी हाल में रिश्वत देकर पुरस्कार नहीं खरीदेंगे।
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अब किशोर कुमार की जिंदगी और उनसे जुड़े कुछ किस्सों पर एक नजर डालते हैं।
किशोर कुमार का प्रारंभिक जीवन
उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में हुआ था। उनका असली नाम था आभास कुमार गांगुली और उनके पिताजी कुंजालाल गांगुली एक प्रसिद्ध वकील और माताजी गौरी देवी गृहिणी थीं। नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे किशोर बचपन से संगीत और हास्य-रस दोनों में रुचि रखते थे। उन्हें गाने का बहुत शौक था।
किशोर कुमार का बचपन
खंडवा की गलियों में उनका बचपन आसान नहीं रहा, लेकिन कला की दुनिया से उनका लगाव बचपन से ही काफी ज्यादा था। पिता जी वकील थे लेकिन किशोर कुमार को ये सब समझ नहीं आता था। बचपन में ही वो अभिनय और गायन में अपनी रूचि दिखाने लगे थे। परिवार ने उनका नाम किशोर कुमार रखकर उनकी कला को नए आयाम देने की कोशिश की।
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सिनेमा में किशोर कुमार की पहचान
वो फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखते समय अपनी पहचान बदलकर किशोर कुमार बन गए। हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान एक अभिनेता और गायक दोनों के रूप में हुई। उनकी कॉमिक टाइमिंग, स्वभाव और स्वर में अनूठेपन ने सबको चौंका दिया। धीरे-धीरे वो डॉयरेक्टर, प्रोड्यूसर और लेखक भी बन गए।
किशोर कुमार का फिल्मी करियर
उन्होंने फिल्म ‘दोस्ती’, ‘हकीकत’, ‘दूर गगन की छांव में’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। लेकिन ‘दूर गगन की छांव में’ को लेकर बहुत उम्मीद थी। इस फिल्म में सिंगिंग और अभिनय दोनों के साथ-साथ निर्देशन भी किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और दर्शकों का प्यार मिला।
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बेटे की शादी टूटी तो पड़ा दिल का दौरा
1981 में उनके बेटे अमित कुमार की शादी तय हुई थी। लेकिन शादी के दस दिन पहले यह खबर आई कि दुल्हन पहले से विवाहित थी। सारा कार्ड छप चुका था। इस घटना ने किशोर जी को गहरी मानसिक पीड़ा दी। उन्होंने तुरंत कोलकाता जाने का निर्णय लिया जिस दिन शादी होनी थी—24 जनवरी। वहीं जाकर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
किशोर दा की सेहत में लगातार गिरावट
दिल का दौरा आने के बाद उनकी सेहत में तब सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बाकी उम्र में वे दोबारा पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाए। स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं बढ़ती रहीं, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ती गई।
किशोर कुमार के हिट गाने
उनकी संगीत प्रतिभा ने हिंदी सिनेमा को कई सुरों से भर दिया। उन्होंने अपने लंबे करियर में कई हिट गाने दिए। 'बाबुल का घर पन्ना की तमन्ना है', 'दिल क्या करें', 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू', 'नीले नीले अंबर पर', 'गाता रहे मेरा दिल', 'मेरे सामने वाली खिड़की में', 'कयामत होगी', ये सभी गीत उनकी अद्वितीय शैली को दर्शाते हैं। राजेश खन्ना और उनकी आवाज की जोड़ी ने कई गाने सुपरहिट बनाए। हालांकि एक बार उन्होंने फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ के एक भावुक गीत को ठुकरा भी दिया था, जिसने बाद में रफी साहब ने गाया था और वो गाना ब्लॉकबस्टर हो गया था।
किशोर कुमार की निजी जिंदगी
किशोर कुमार ने कुल चार शादियां की थीं। पहली शादी उन्होंने 1950 में गायिका रूमा गुहा ठाकुरता से की, जिससे उन्हें बेटा अमित कुमार हुआ, लेकिन ये रिश्ता 1958 में खत्म हो गया। दूसरी शादी 1960 में अभिनेत्री मधुबाला से की, जो उस वक्त गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं; उनका साथ 1969 में मधुबाला की मौत तक रहा। तीसरी बार उन्होंने 1976 में योगिता बाली से शादी की, लेकिन दो साल में ही 1978 में तलाक हो गया। चौथी और आखिरी शादी 1980 में लीना चंद्रावरकर से की, जो उनके अंतिम समय तक उनके साथ रहीं।
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किशोर कुमार का निधन
13 अक्टूबर 1987 को 58 साल की उम्र में किशोर कुमार ने दुनिया को अलविदा कहा। उनका निधन एक लंबी बीमारी और दिल की समस्या की वजह से हुआ। वो शारीरिक रूप से तो जा चुके हैं, पर संगीत, हास्य और अनूठी आवाज की वजह से आज भी उनके प्रशंसकों के दिलों में जिंदा हैं।
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क्यों नहीं मिला नेशनल अवॉर्ड?
विक्की लालवानी से बातचीत के दौरान किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक पुराना वाकया साझा किया था, जब उनके पिता को नेशनल अवॉर्ड मिलने वाला था, लेकिन एक खास शर्त ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अमित कुमार ने बताया कि फिल्म 'दूर गांव की छांव में' के लिए किशोर कुमार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की पूरी संभावना थी। इस फिल्म में उन्होंने अपने बेटे अमित कुमार के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी और एक बेहद गंभीर किरदार में नजर आए थे।
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किशोर कुमार की इस भूमिका को दर्शकों और आलोचकों से खूब सराहना मिली थी और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ी हिट साबित हुई थी। फिल्म को नेशनल अवॉर्ड के लिए नामांकित किया जाना तय था, लेकिन आखिरकार उसे अवॉर्ड नहीं मिला। वजह ये थी कि किशोर कुमार से इसके लिए रिश्वत मांगी गई थी, जिसे देने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कह दिया था कि वो किसी भी हाल में रिश्वत देकर पुरस्कार नहीं खरीदेंगे।
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अब किशोर कुमार की जिंदगी और उनसे जुड़े कुछ किस्सों पर एक नजर डालते हैं।
किशोर कुमार का प्रारंभिक जीवन
उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में हुआ था। उनका असली नाम था आभास कुमार गांगुली और उनके पिताजी कुंजालाल गांगुली एक प्रसिद्ध वकील और माताजी गौरी देवी गृहिणी थीं। नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे किशोर बचपन से संगीत और हास्य-रस दोनों में रुचि रखते थे। उन्हें गाने का बहुत शौक था।
किशोर कुमार का बचपन
खंडवा की गलियों में उनका बचपन आसान नहीं रहा, लेकिन कला की दुनिया से उनका लगाव बचपन से ही काफी ज्यादा था। पिता जी वकील थे लेकिन किशोर कुमार को ये सब समझ नहीं आता था। बचपन में ही वो अभिनय और गायन में अपनी रूचि दिखाने लगे थे। परिवार ने उनका नाम किशोर कुमार रखकर उनकी कला को नए आयाम देने की कोशिश की।
ये खबर भी पढ़ें: Parineeti Chopra: परिणीति चोपड़ा ने राघव के साथ पहली डेट का खोला राज, गूगल पर सर्च किया था मैरिटल स्टेटस
सिनेमा में किशोर कुमार की पहचान
वो फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखते समय अपनी पहचान बदलकर किशोर कुमार बन गए। हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान एक अभिनेता और गायक दोनों के रूप में हुई। उनकी कॉमिक टाइमिंग, स्वभाव और स्वर में अनूठेपन ने सबको चौंका दिया। धीरे-धीरे वो डॉयरेक्टर, प्रोड्यूसर और लेखक भी बन गए।
किशोर कुमार का फिल्मी करियर
उन्होंने फिल्म ‘दोस्ती’, ‘हकीकत’, ‘दूर गगन की छांव में’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। लेकिन ‘दूर गगन की छांव में’ को लेकर बहुत उम्मीद थी। इस फिल्म में सिंगिंग और अभिनय दोनों के साथ-साथ निर्देशन भी किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और दर्शकों का प्यार मिला।
ये खबर भी पढ़ें: Arpita Khan: भाभी शूरा खान ने अर्पिता संग किया डांस, वीडियो शेयर कर दी जन्मदिन की बधाई
बेटे की शादी टूटी तो पड़ा दिल का दौरा
1981 में उनके बेटे अमित कुमार की शादी तय हुई थी। लेकिन शादी के दस दिन पहले यह खबर आई कि दुल्हन पहले से विवाहित थी। सारा कार्ड छप चुका था। इस घटना ने किशोर जी को गहरी मानसिक पीड़ा दी। उन्होंने तुरंत कोलकाता जाने का निर्णय लिया जिस दिन शादी होनी थी—24 जनवरी। वहीं जाकर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
किशोर दा की सेहत में लगातार गिरावट
दिल का दौरा आने के बाद उनकी सेहत में तब सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बाकी उम्र में वे दोबारा पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाए। स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं बढ़ती रहीं, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ती गई।
किशोर कुमार के हिट गाने
उनकी संगीत प्रतिभा ने हिंदी सिनेमा को कई सुरों से भर दिया। उन्होंने अपने लंबे करियर में कई हिट गाने दिए। 'बाबुल का घर पन्ना की तमन्ना है', 'दिल क्या करें', 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू', 'नीले नीले अंबर पर', 'गाता रहे मेरा दिल', 'मेरे सामने वाली खिड़की में', 'कयामत होगी', ये सभी गीत उनकी अद्वितीय शैली को दर्शाते हैं। राजेश खन्ना और उनकी आवाज की जोड़ी ने कई गाने सुपरहिट बनाए। हालांकि एक बार उन्होंने फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ के एक भावुक गीत को ठुकरा भी दिया था, जिसने बाद में रफी साहब ने गाया था और वो गाना ब्लॉकबस्टर हो गया था।
किशोर कुमार की निजी जिंदगी
किशोर कुमार ने कुल चार शादियां की थीं। पहली शादी उन्होंने 1950 में गायिका रूमा गुहा ठाकुरता से की, जिससे उन्हें बेटा अमित कुमार हुआ, लेकिन ये रिश्ता 1958 में खत्म हो गया। दूसरी शादी 1960 में अभिनेत्री मधुबाला से की, जो उस वक्त गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं; उनका साथ 1969 में मधुबाला की मौत तक रहा। तीसरी बार उन्होंने 1976 में योगिता बाली से शादी की, लेकिन दो साल में ही 1978 में तलाक हो गया। चौथी और आखिरी शादी 1980 में लीना चंद्रावरकर से की, जो उनके अंतिम समय तक उनके साथ रहीं।
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किशोर कुमार का निधन
13 अक्टूबर 1987 को 58 साल की उम्र में किशोर कुमार ने दुनिया को अलविदा कहा। उनका निधन एक लंबी बीमारी और दिल की समस्या की वजह से हुआ। वो शारीरिक रूप से तो जा चुके हैं, पर संगीत, हास्य और अनूठी आवाज की वजह से आज भी उनके प्रशंसकों के दिलों में जिंदा हैं।