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Mohammed Rafi: मोहम्मद रफी के बेटे का आशा भोसले-लता मंगेशकर पर बड़ा आरोप, बोले- अब्बा का करियर बर्बाद कर दिया
Thu, 04 Sep 2025 05:23 PM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Thu, 04 Sep 2025 05:23 PM IST
सार
Mohammed Rafi Son Accuses Asha Bhosle: मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में आशा भोसले और दिवंगत सिंगर लता मंगेशकर पर बड़ा आरोप लगाया है।
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मोहम्मद रफी बेटा शाहिद
- फोटो : एक्स
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विस्तार
हिंदी सिनेमा की दुनिया में मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे नाम किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इन तीनों गायकों ने दशकों तक अपने सुरों से लोगों का दिल जीता और भारतीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। लेकिन इन चमकदार कहानियों के पीछे कई अनकहे किस्से भी छिपे हुए हैं। हाल ही में मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी ने एक इंटरव्यू में अपनी बात रखी और कई चौंकाने वाले आरोप लगाए।
आशा और लता पर गंभीर आरोप
शाहिद रफी ने विक्की लालवानी के साथ इंटरव्यू के दौरान कहा कि उनकी नजर में दोनों बहनों लता और आशा को उनके पिता की लोकप्रियता से जलन थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी ईर्ष्या की वजह से मोहम्मद रफी का करियर बुरी तरह प्रभावित हुआ। शाहिद का दावा है कि दोनों बहनों ने मिलकर उनके पिता को पीछे करने की कोशिश की और संगीत जगत में उनके योगदान को कमतर दिखाने की कोशिश की।
गिनीज रिकॉर्ड का विवाद
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे ज्यादा गाने गाने वाले गायक का नाम दर्ज कराने का मौका पहले मोहम्मद रफी को मिला था। शाहिद का कहना है कि जब उनका नाम सामने आया तो दिवंगत लता मंगेशकर ने आपत्ति जताई और खुद को आगे रखा। इसी विवाद के बाद गिनीज में रफी साहब का नाम पीछे कर दिया गया और मामला लंबित रह गया। शाहिद का मानना है कि अगर यह हस्तक्षेप नहीं होता तो उनके पिता को यह सम्मान जरूर मिलता।
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आशा भोसले पर तीखा हमला
इतना ही नहीं, आशा भोसले के एक बयान पर शाहिद रफी ने कड़ी नाराजगी जताई। बता दें आशा जी ने कभी कहा था कि रफी साहब की आवाज में रेंज नहीं थी। इस पर शाहिद ने कहा कि उनके पिता की आवाज की विविधता पर सवाल उठाना नासमझी है। उन्होंने याद दिलाया कि रफी साहब कभी यह नहीं पूछते थे कि गाना किस अभिनेता पर फिल्माया जाएगा, बल्कि वह गाने की स्थिति और भावनाओं के हिसाब से अपनी आवाज को ढालते थे। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
लता मंगेशकर से अनबन और सुलह
रफी साहब और लता मंगेशकर के बीच मतभेद की बातें पहले भी सामने आती रही हैं। शाहिद ने खुलासा किया कि उनकी अनबन इतनी बढ़ गई थी कि दोनों ने एक-दूसरे से लंबे समय तक बात नहीं की। हालांकि बाद में अभिनेत्री नरगिस और संगीतकार जयकिशन की पहल पर रफी साहब ने लता जी को माफ कर दिया था। इसके बाद दोनों ने एक कार्यक्रम में साथ परफॉर्म भी किया।
‘अब्बा को कभी पतन का डर नहीं था’
शाहिद ने यह भी कहा कि उनके पिता को करियर के पतन का डर कभी नहीं रहा। बल्कि वो लगातार नए-नए प्रयोग करते थे और हर तरह की जॉनर में गाना गाते थे। उनका मानना है कि इनसिक्योरिटी दूसरों के मन में थी, क्योंकि उस दौर में कई नई महिला गायिकाएं उभर रही थीं और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही थी।
रफी साहब की विरासत
मोहम्मद रफी का 1980 में दिल और डायबिटीज की समस्या के चलते निधन हो गया। वो 55 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन पीछे छोड़ गए हजारों कालजयी गीत, जो आज भी सुनने वालों को उसी तरह सुकून और रोमांच देते हैं। उन्हें 1967 में पद्मश्री से नवाजा गया था। वहीं, लता मंगेशकर का साल 2022 में निधन हुआ था।
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आशा और लता पर गंभीर आरोप
शाहिद रफी ने विक्की लालवानी के साथ इंटरव्यू के दौरान कहा कि उनकी नजर में दोनों बहनों लता और आशा को उनके पिता की लोकप्रियता से जलन थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी ईर्ष्या की वजह से मोहम्मद रफी का करियर बुरी तरह प्रभावित हुआ। शाहिद का दावा है कि दोनों बहनों ने मिलकर उनके पिता को पीछे करने की कोशिश की और संगीत जगत में उनके योगदान को कमतर दिखाने की कोशिश की।
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गिनीज रिकॉर्ड का विवाद
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे ज्यादा गाने गाने वाले गायक का नाम दर्ज कराने का मौका पहले मोहम्मद रफी को मिला था। शाहिद का कहना है कि जब उनका नाम सामने आया तो दिवंगत लता मंगेशकर ने आपत्ति जताई और खुद को आगे रखा। इसी विवाद के बाद गिनीज में रफी साहब का नाम पीछे कर दिया गया और मामला लंबित रह गया। शाहिद का मानना है कि अगर यह हस्तक्षेप नहीं होता तो उनके पिता को यह सम्मान जरूर मिलता।
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आशा भोसले पर तीखा हमला
इतना ही नहीं, आशा भोसले के एक बयान पर शाहिद रफी ने कड़ी नाराजगी जताई। बता दें आशा जी ने कभी कहा था कि रफी साहब की आवाज में रेंज नहीं थी। इस पर शाहिद ने कहा कि उनके पिता की आवाज की विविधता पर सवाल उठाना नासमझी है। उन्होंने याद दिलाया कि रफी साहब कभी यह नहीं पूछते थे कि गाना किस अभिनेता पर फिल्माया जाएगा, बल्कि वह गाने की स्थिति और भावनाओं के हिसाब से अपनी आवाज को ढालते थे। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
लता मंगेशकर से अनबन और सुलह
रफी साहब और लता मंगेशकर के बीच मतभेद की बातें पहले भी सामने आती रही हैं। शाहिद ने खुलासा किया कि उनकी अनबन इतनी बढ़ गई थी कि दोनों ने एक-दूसरे से लंबे समय तक बात नहीं की। हालांकि बाद में अभिनेत्री नरगिस और संगीतकार जयकिशन की पहल पर रफी साहब ने लता जी को माफ कर दिया था। इसके बाद दोनों ने एक कार्यक्रम में साथ परफॉर्म भी किया।
‘अब्बा को कभी पतन का डर नहीं था’
शाहिद ने यह भी कहा कि उनके पिता को करियर के पतन का डर कभी नहीं रहा। बल्कि वो लगातार नए-नए प्रयोग करते थे और हर तरह की जॉनर में गाना गाते थे। उनका मानना है कि इनसिक्योरिटी दूसरों के मन में थी, क्योंकि उस दौर में कई नई महिला गायिकाएं उभर रही थीं और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही थी।
रफी साहब की विरासत
मोहम्मद रफी का 1980 में दिल और डायबिटीज की समस्या के चलते निधन हो गया। वो 55 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन पीछे छोड़ गए हजारों कालजयी गीत, जो आज भी सुनने वालों को उसी तरह सुकून और रोमांच देते हैं। उन्हें 1967 में पद्मश्री से नवाजा गया था। वहीं, लता मंगेशकर का साल 2022 में निधन हुआ था।