Bad Cop 2024 Review: आदित्य दत्त ने दिखाई एक्शन पर मजबूत पकड़, दमदार टीम मिली तो जरूर बसेगी हैरतअंगेज दुनिया
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गीतकार आनंद बक्षी को ‘डैडी’ कहकर बुलाने वाले उनके नवासे आदित्य दत्त ने हिंदी सिनेमा को ‘कमांडो 3’ जैसी फिल्म से एक्शन सिनेमा के नए मायने समझाए। फिर, अपने ही बनाए पाठ में वह विद्युत जामवाल के चक्कर में उलझकर ‘क्रैक’ हुए और अब फ्रीमैंटल इंडिया की पहली फिक्शन सीरीज ‘बैड कॉप’ के निर्देशन के जरिये वह फिर से दर्शकों को असल एक्शन के मायने समझा रहे हैं। एक ही दिशा में भागते एक ही जैसे दिखते दो किरदारों में से एक का गोली मारकर कांच तोड़ना और दूसरे का उसी टूटते कांच से आकर अपने हमशक्ल से आ मिलने वाला दृश्य हिंदी सिनेमा में एक्शन दृश्यावलियों को उत्साह से सजाने का नया पैमाना है। सीरीज आहिस्ता आहिस्ता रंग जमाने के लिए है। दलाल बंधुओं में से भी एक है यहां इस रंग को जमने न देने के लिए। वह हैं तो गालियां और देह दृश्य भी हैं। और, ‘कोहरा’ वाली हरलीन सेठी से लेकर ‘स्पेशल ऑप्स’ वाली ऐश्वर्या सुष्मिता और ‘केनेडी’ की रिलीज के इंतजार में साल भर से ज्यादा समय से बैठे अनुराग कश्यप भी हैं।
वेब सीरीज ‘बैड कॉप’ में अनाथालय में रहकर बड़े हुए दो जुड़वा भाई बातें ऐसे ही करते हैं कि जैसे अनुराग की किसी फिल्म से निकले किरदार हों। एक भाई दूसरे के मरने पर भी उसके जुदा न होने की बात करता है और अगले ही सीन में दोनों भाई समंदर में कूदते दिखते हैं। एक का चेहरा कैमरे की तरफ, दूसरे की पीठ। ये दिखाने के लिए गोली किसे कहां लगनी है? गोलियों के ये स्थान भी कहानी के गुणसूत्र बनते हैं। यहां ये भी बताते चलें कि एक जैसी शक्ल वाले ये दो किरदार दरअसल कानून के दोनों किनारे हैं। एक मुंबई में पुलिस इंस्पेक्टर है। बीवी उसकी उसके ही थाने में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर है। दूसरा चोर है। लोगों को ठगने का धंधा करता है। गर्लफ्रेंड उसकी थोड़ी बिंदास ज्यादा ही है। चार खानों के सोलह कोनों में उछलती घूमती इस कहानी में कब्जे का किरदार रामगोपाल वर्मा की फिल्मों से रंग भरने आता है।
बताते हैं कि ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ और ‘इंडियन आयडल’ जैसे विदेशी फॉर्मेट पर देसी रियलिटी शो बनाने वाली कंपनी फ्रीमैंटल ने जब ये जर्मन सीरीज ‘बैड कॉप’ का हिंदी संस्करण बनाने का फैसला किया तो डिज्नी प्लस हॉटस्टार ने इसे तुरंत लपक लिया। अनुराग कश्यप का इस सीरीज में विलेन जैसा किरदार इसकी यूएसपी है। अनुराग को इसका इलहाम भी है। हिंदी सिनेमा में ये काम इन दिनों खूब हो रहा है, मल्टीटास्किंग का। अनुराग की एक्टिंग पहले भी छोटे छोटे किरदारों में दिख चुकी है। अब वह फुलटाइम विलेन हैं। विजय सेतुपति की फिल्म ‘महाराजा’ भी देखने की इच्छा है, पर उससे पहले ‘बैड कॉप’ में उन्होंने सीरीज के लिए जरूरी गालियों का कोटा पूरा किया है। किरदार के लिए ज्यादा कुछ उन्हें करना नहीं पड़ा है। जैसे नए लोगों को उनके हाव भाव और ‘बुलीइंग’ वाली शख्सीयत से डर लगता रहा है, वैसा ही उनका सीरीज में किरदार है। एक्टिंग जीरो परसेंट। रिजल्ट हंड्रेड परसेंट।
सीरीज के दो एपिसोड एक साथ रिलीज हुए हैं। आगे के छह एपिसोड अब हर हफ्ते रिलीज होंगे। पहले दो एपिसोड के हिसाब से सीरीज के हीरो गुलशन देवैया का अभिनय इस सीरीज की जान दिख रहा है। दोनों किरदारों में उन्होंने अच्छा काम किया है। थाने में बीवी को मैम बोलने वाला करण घर में कैसे चौड़े होकर बात करता है, देखने लायक है। उधर, अर्जुन जिस तरह से अपनी गर्लफ्रेंड के सामने दब्बू सा बना रहता है, वह रंग भी रोचक है। हरलीन सेठी और ऐश्वर्या सुष्मिता के लिए पहले के तीन एपिसोड मे ज्यादा कुछ करने को है नहीं। हां, सौरभ सचदेवा के सीबीआई अफसर वाले तेवर आगे की कहानी को दिलचस्प बनाते दिख रहे हैं। मुंबइया माहौल की ये राम गोपाल वर्मा, सुधीर मिश्रा, अनुराग कश्यप वाले टैम्पलेट जैसी सीरीज है और देसी क्राइम सीरीज से थके दर्शकों के लिए मेट्रो क्राइम का बेहतर डोज भी।
आदित्य दत्त के लिए वेब सीरीज ‘बैड कॉप’ किसी जीवन चक्र के पूरे होने जैसी है। राजीव खंडेलवाल के साथ जब आदित्य ने ‘टेबल नंबर 21’ बनाई थी तो उसे देखने के बाद भी अनुराग ने इसके बारे में ट्वीट करने से मना कर दिया था। अब बताते हैं कि वही अनुराग खुद आदित्य को फोन कर उनकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं। फ्रीमैंटल की प्रोडक्शन टीम की मानें तो पूरी सीरीज में अनुराग ने बहुत ही अच्छे कलाकार की तरह शूटिंग भी की है। जैसे न वह अपने कलाकारों को स्क्रिप्ट देते हैं, वैसे ही उन्होंने भी कभी अपने लिए यहां स्क्रिप्ट की मांग नहीं की। और, सीरीज के पहले तीन एपिसोड देखकर ये समझ आता है कि स्क्रिप्ट ही इस सीरीज की सबसे कमजोर कड़ी है। आदित्य को कभी यशराज फिल्म्स स्पाई यूनिवर्स की कोई फिल्म निर्देशित करने को मिली, तो उनका एक्शन कैनवस वाकई देखने लायक होगा।