Citadel Honey Bunny Review: हनी के किरदार में सामंथा को मिलीं सबसे ज्यादा तालियां, काशवी मजूमदार दूसरे नंबर पर
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राज और डीके के हाथों इन दिनों बटेर लगी हुई है। बड़े परदे के लिए अपनी दुकान का शटर पूरी तरह गिरा चुकी इस निर्देशक जोड़ी ने पहले ‘फैमिली मैन’ में मनोज बाजपेयी को डिजिटल स्टार बनाया। फिर शाहिद कपूर की ‘कबीर सिंह’ वाली शोहरत को अपनी वेब सीरीज ‘फर्जी’ में भुनाया। और, अब वह कोशिश कर रहे हैं वरुण धवन का करियर बचाने की। नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो दोनों उन पर मेहरबान हैं। और, सीरीज दर सीरीज दर्शक उन्हें पहलवान बनाते जा रहे हैं। दोनों की नई वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ दरअसल बीते साल आई प्रियंका चोपड़ा की सीरीज ‘सिटाडेल’ से पहले की कहानी है। इस सीरीज में प्रियंका के किरदार नाडिया का बचपन है। सामंथा और वरुण इस किरदार के माता-पिता बने हैं। एजेंट नाडिया सिंह याद है न आपको?
सुना गया है कि राज और डीके व उनके साथ उनकी बरसों पुरानी राइटर दोस्त सीता आर मेनन को रूसो ब्रदर्स मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स का एक नया सुपरहीरो रचने हॉलीवुड ले जा रहे हैं। तीनों की तिकड़ी में दम तो है, बस अपनी लकीर को ही पीटते रहने की आदत अगर वह छोड़ सके तो तीनों कुछ तो कालजयी रच ही सकते हैं। वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ उनका इसी काम का पहला इम्तिहान है और बहुत कमाल का काम भले तीनों ने यहां न किया हो लेकिन ये सीरीज कम से कम ‘सिटाडेल’ से थोड़ी बेहतर बन पड़ी है। सामंथा को ओटीटी के दीवाने इसके पहले ‘फैमिली मैन’ के सीजन 2 में देख चुके हैं। वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ में वह स्कूल में पढ़ने वाली सात-आठ साल की बच्ची के मां के किरदार में हैं। बच्ची अपनी उम्र से ज्यादा होशियार है और हिंदी, तेलुगु, अंग्रेजी समेत चार भाषाएं बोलती है।
वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ की कहानी भी ओरिजिनल ‘सिटाडेल’ की तरह दो काल खंडों 1992 और 2000 में चलती है। ‘सिटाडेल’ तो आपको याद ही है कि 2023 और उसके आठ साल पहले की कहानी है। इन दोनों के बीच में एक कहानी ‘सिटाडेल डायना’ भी बीते महीने रिलीज हो चुकी है। दो ऐसी ही कहानियां अभी स्पैनिश और मैक्सिकन भाषाओं में आनी है। हॉलीवु की दिग्गज कंपनी एमजीएम स्टूडियो खरीद चुका अमेजन अब खुलकर फिल्म और वेब सीरीज निर्माण में उतर चुका है। पहली ‘सिटाडेल’ का बजट ही बताते हैं कोई ढाई हजार करोड़ रुपये रखा गया था। उस लिहाज से वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ बहुत भव्य तो नहीं है लेकिन इसमें भी बजट अच्छा खासा लगा दिखता है।
वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ शुरू होती है हिंदी सिनेमा के गोविंदा काल से, जहां राही गंभीर यानी बनी, स्टंट डुप्लीकेट का काम करता नजर आता है। कुछ लोगों के साथ मिलकर वह एक्स्ट्रा टाइम में कुछ जासूसी टाइप काम भी करता है। उसका कोड नेम बनी है। हनी उसे वहीं फिल्म के सेट पर मिलती है। बैकग्राउंड डांसर और जूनियर आर्टिस्ट जैसे काम करती है और अब ये काम भी उसे मिल नहीं पा रहा। पैसे की तंगी है तो वह बनी के साथ उसके इस जासूसी टाइप काम में मददगार बनने को तैयार हो जाती है। जो काम वह कैमरे के सामने नहीं कर पाई, एक्टिंग को वह काम उसे असल जिंदगी में करने को मिलता है तो उसे मानसिक चरम सुख मिलता है। लेकिन, फाइनली उसे पता चल ही जाता है कि बनी का पूरा गैंग किसी एजेंसी के लिए काम कर रहा है। एजेंसी कौन सी है? पता नहीं चलता। सिटाडेल का नाम भी वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ में पहली बार चौथे एपिसोड में सामने आता है।
के के मेनन यहां बाबा बने हैं। बाबा यानी अनाथ बच्चों के लिए पिता तुल्य एक शख्सीयत। अनाथालय के बच्चों पर दया दिखाना। उन्हें पढ़ाना लिखाना और ट्रेनिंग देना। और, फिर इन बच्चों के बड़ा होने पर उन्हें जासूस बनाकर उनका रिंग मास्टर बन जाना। वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ के लिए ये किरदार ही सीरीज की कमजोर कड़ी है। सिटाडेल नाम की एजेंसी यहां क्या कर रही है, यही इस वेब सीरीज का असली खेल है। उधर, हनी और बनी की जोड़ी बन जाती है। दोनों बाबा के कहने पर बेलग्रेड जाते हैं और वहां एक मिशन के दौरान ही हनी के गर्भवती होने की बात पता चलती है। और, जिस दिन बनी को पता चलता है कि वह बाप बनने वाला है, दोनों बिछड़ जाते हैं। आगे की कहानी महेंद्र संधू वाली फिल्म ‘एजेंट विनोद’जैसी है। एक एजेंट विनोद यहां भी है। शोर शराबा खूब है। लेकिन, एक जासूसी सीरीज सा बीपी बढ़ने नहीं पाता।
शाहरुख खान की फिल्म ‘जवान’ के संवाद लिखने वाले सुमित अरोड़ा ने वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ के भी संवाद लिखे हैं। फिल्म के मुख्य महिला किरदार से ‘आई एम ऐन एक्सक्लूसिव पीस’ जैसे संवाद बुलवाकर वह भी महिलाओं को ‘चीज’ समझने वाली मनोधारणा की तरफ बढ़ते दिखते हैं। सामंथा चूंकि हिंदी अच्छे से नहीं बोल पाती हैं तो उनके संवाद एक भाषा से दूसरी भाषा और दूसरी से तीसरी भाषा तक फिसलते रहते हैं। इस पर पर्दा डालने के लिए सुमित हनी और बनी की बेटी से कहलवा भी लेते हैं, ‘कैन वी टॉक इन वन लैंग्वेज टुडे!’ वरुण धवन के संवाद कहीं कहीं बहुत अच्छे हैं और कहीं कहीं बहुत चलताऊ। शिवांकित परिहार और सोहम मजूमदार ने वरुण के दोस्तों का किरदार निभाया है। ये सब भी बाबा के लाए हुए हैं। बाबा यानी के के मेनन ऐसी जासूसी सीरीज में अब इतने रोल कर चुके हैं कि टाइपकास्ट दिखने लगे हैं।
फिल्म ‘रॉकेट्री’ में पिछली बार आर माधवन जैसे दमदार अभिनेता के साथ दिखीं अभिनेत्री सिमरन वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ में क्या कर रही हैं, शायद खुद उनको नहीं पता। एक दमदार कलाकार को एक हाशिये के किरदार में कैसे जाया किया जाता है, यहां पता चलता है। सिकंदर खेर उनके सिपहसालार हैं और उनका किरदार बस इतना ही है। कहानी में कोई फर्क उनके होने या न होने स नहीं आता। उधर बाबा के खासमखास सिपहसालार बनी की जगह लेने के लिए एजेंट केडी बेचैन है। और, इस बेचैन आत्मा के किरदार में हैं, साकिब सलीम। साकिब सलीम ने अपने किरदार से, अपने लुक्स से और अपनी संवाद शैली से यहां सिकंदर और वरुण से बेहतर काम किया है। वह इस सीरीज के असल कैटलिस्ट हैं। ये और बात है कि उन्हें इस सीरीज के प्रचार, प्रसार में कतई तवज्जो नहीं दी गई और बताते हैं कि इसी के चलते वह सीरीज के मुंबई में हुए प्रीमियर में भी नहीं पहुंचे।
वरुण धवन की ओटीटी डेब्यू वेब सीरीज ‘सिटाडेल हनी बनी’ की कमजोरियां तमाम हैं। पहली कमजोरी तो ये कि यहां सब बोल बोलकर सबको स्कीम बता दे रहे हैं। कोई कुछ करके जितना दिखाता है, उससे ज्यादा वह बोलकर पकाता है। अंकल वी, ऑपरेशन तलवार और डिवाइस जैसे नाम सुरेंद्र मोहन पाठक और वेद प्रकाश शर्मा के जासूसी उपन्यासों से उठाए लगते हैं। रूसो ब्रदर्स के स्पाईवर्स की ये तीसरी दुनिया है। पहले की दोनों कहानियों से थोड़ा बेहतर है। हिंदी ओटीटी सीरीज में हीरोइन का कपड़े उतारना जरूरी नहीं है, ये प्राइम वीडियो को सामंथा ने अच्छे से समझाया है। सामंथा और काशवी में मां-बेटी की केमिस्ट्री कमाल है और बनी को ये कष्ट है कि क्या बेटी उसको पापा कहकर बुलाएगी या फिर हनी की तरह ही बनी कहकर? सामंथा ही सीरीज की असल हीरो हैं। फीयरलेस नाडिया की फिल्में पसंद करने वाली हनी की बेटी के रोल में काशवी का काम खूब खूब तारीफ के लायक है।