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'हिम्मतवाला': एक 'माइंडलेस' मनोरंजक फिल्म

रोहित मिश्र Updated Fri, 29 Mar 2013 03:12 PM IST
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movie review of 'himmatwala'
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"गरीब के पास दो चीजें होती हैं। पहली उसकी पगड़ी और दूसरी उसकी चप्पल। जब कोई उसकी पगड़ी उछालता है तो वह अपनी चप्पल उतार लेता है।" यदि यह डायलॉग आपको धांसू और मनोरंजक लगा हो तो यह मानिए कि 'हिम्मतवाला' आपके लिए है। इस फिल्म में इससे भी बढ़कर धुआंधार डायलॉग और सीन हैं।

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'हिम्मतवाला' दर्शक को एक भावुक और मनोरंजन का भूखा इंसान मानकर बनायी गयी फिल्म है। सच से कोसो दूर चल रही इस पारंपरिक मुंबईया मसाला फिल्म में सब कुछ नापतौल कर डाला गया है। एक एक्शन सीन, थोड़ा ड्रामा, थोड़ी कॉमेडी, फिर थोड़ा रोमांस और एक गाने का पैटर्न पूरी फिल्म दोहराता-तिहराता रहता है।
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1983 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म 'हिम्मतवाला' की इस रीमेक फिल्म की खासियत यह है कि यह अपने पिछड़ेपन पर खुद ही हंसती है। फिल्म में जहां भी लगता है कि यह 80 के दशक के ड्रामे को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले रही है तो वहीं कोई एक संवाद यह बता देता है कि यह फिल्म 2013 के लिए बनायी गयी है।

'हिम्मतवाला' जैसी कई फिल्में दर्शक पहले देख चुके हैं इसलिए कहानी में क्या होना है यह उन्हें मालूम होता है। फिल्म का नयापन उसे आज के अनुरूप फिल्माने में है। यह निर्देशक की खूबसूरती है कि घिसी-पिटी किस्सों को भी उन्होंने मनोरंजक तरीके से परोसा है। यदि आप फिल्म से सिर्फ मनोरंजन की उम्मीद करते हैं तो आपको जरूर यह फिल्म देखनी चाहिए।

कहानी रवि के इंतकाम की

यह कहानी रवि (अजय देवगन) के इंतकाम की है। वह लगभग बीस साल बाद मुंबई से अपने गांव रामनगर आता है। फ्लैशबैक से पता चलता है कि गांव का ताकतवर सरपंच शेर सिंह (महेश मांजरेकर), रवि के पिता को चोर साबित कर देता है। वह आत्महत्या कर लेते हैं। रवि की मां और बहन के घर को आग लगा दी जाती है।

रवि इस इंतकाम का बदला लेता है। छोटी-छोटी घटनाओं के बीच वह उनसे बदला ले रहा होता है। हर बात पर शेर सिंह और उसके साले नारायण दास (परेश रावल) की इज्जत नीलाम की जाती है। शेर सिंह की बिगड़ी हुई नकचढ़ी लड़की रेखा (तमन्ना) को सुधारते-सुधारते रवि उससे प्रेम करने लगता है।

इंटरवल के समय दर्शकों को पता चलता है कि यह असली रवि नहीं बल्कि रवि का दोस्त (फिर एक फ्लैशबैक) है। रवि एक एक्सीडेंट मारा जाता है। कहानी आगे बढ़ती है। सुधर चुकी रेखा अपने बाप को सबक सिखाने के लिए रवि से मिल जाती है।

फिल्म के क्लाइमेक्स में रवि की सच्चाई पूरे गांव के सामने आ जाती है। वह शेर सिंह को हरा देता है। बाद में वह उसी गांव का दुलारा बनकर बस जाता है।

जीतेंद्र से 21 साबित हुए अजय देवगन

जिन लोगों ने जीतेंद्र की 'हिम्मतवाला' देखी होगी उन्हें जीतेंद्र की तुलना में अजय देवगन की ऐक्टिंग ज्यादा रास आएगी। अजय देवगन ने इस फिल्म में जरूरत के मुताबिक अभिनय किया है। ड्रामे के साथ कॉमेडी के दृश्यों में वह अच्छे लगे हैं।

"आई हेट गरीब्स" के डायलॉग के साथ पर्दे पर आयी तमन्ना सिर्फ गानों में अच्छी लगती हैं। वह जब तक एक बदमिजाज लड़की बनी होती हैं तब तक वह श्रीदेवी की नकल करती दिखती हैं लेकिन जैसे ही उनकी अंतरआत्मा में बदलाव होता है वह एक बेहद सामान्य लड़की लगने लगती हैं।

ठेठ कॉमेडी भूमिकाएं करने से पहले परेश रावल एक मसखरे विलेन की भूमिकाएं किया करते थे। इस फिल्म में दर्शकों को वही परेश रावल नजर आएंगे। एक खतरनाक सरपंज के रूप में महेश मांजरेकर सिर्फ उन दृश्यों में अच्छे लगते हैं जहां वह कॉमेडी कर रहे होते हैं।

सस्ता मनोरंजन, सस्ता निर्देशन

'हे बेबी', 'हाउसफुल', 'हाउसफुल 2' जैसी फिल्मों का निर्देशन करने वाले साजिद खान ने यह फिल्म निर्देशित की है। साजिद एक नहीं कई बार कह चुके हैं कि वह फिल्म अवॉर्ड या पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि लोगों के मनोरंजन के लिए बनाते हैं।

मनोंरजन करने के लिए साजिद इस बाद थोड़ा सस्ता रास्ता पकड़ा है। 'हाउसफुल' और 'हाउसफुल 2' पूरी तरह से मौलिक फिल्में थीं। इस बार साजिद ने एक सुपरहिट फिल्म को फिर से एक स्मार्ट एडटिंग करके दर्शकों के लिए परोस दिया है।

पुरानी 'हिम्मतवाला' में जो कमियां रह गयी थीं उन कमियों का साजिद ने मेकअप करके भव्यता से फिर पेश कर दिया है। सफेद धोती में लिपटी विधवा मां, एक अबला जवान बहन, 20 साल बाद अथाह ताकत लेकर वापस लौटा भाई, खतरनाक सरपंच से उसकी जंग सरीखे प्लाट दर्शकों का मनोरंजन ठीक उस समय कर रह होते हैं जब सीन उनकी आंखों के सामने होता है।

इस बीच दर्शक यदि फिल्म छोड़कर पॉपकार्न खरीदने के लिए भी बाहर निकलता है तो उसे यह फिल्म खराब और भूल जाने वाली लगती है। 'यूज एंड थ्रो' के इस निर्देशकीय फॉर्मूले से साजिद पैसा तो कमा सकते हैं लेकिन उनकी गिनती फिर एक निर्देशक के रूप में शायद ही हो।

जो देखेंगे आप बहुत दिन बाद

सफेद साड़ी में लिपटी और रोज मंदिर जाती हुई मां।

एक ऐसी अबला बहन जिसके साथ कोई भी बलात्कार कर सकता है।

क्लाइमेक्स में मर रहे हीरो की मां का मंदिर में जाकर प्रार्थना करना और भगवान को चैलेंज करना।

शंख बजने के साथ ही एक अद्भुत शक्ति के रूप में शेर का प्रकट हो जाना।

कॉमेडी करते बिलने के साले को, जो बड़े प्यार से उन्हें जीजा जी कहता है।

खून से भरे नायक के हाथ में नायिका का अपने दुपट्टे से पट्टी बांधना।


मनोरंजक हैं गाने

फिल्म के सभी गाने मजेदार हैं। फिल्म को उनका फिल्माया भी बहुत ड्रामेटिक अंदाज में गाया है। "नैनो में सपना" और "ताकी ताकी" गाने सुनने में अच्छे लगते हैं। सोनाक्षी सिन्हा पर फिल्माया गया आयटम नंबर "थैक्स गॉड इट्स फ्राइडे" भी अच्छा है।

"बम पे लात" गाना बच्चों के लिए बनाया गया है। कुल मिलाकर एक म्यूजिक एलबम के रूप में 'हिम्मतवाला' का संगीत निराश नहीं करता।

क्यों देखें

यदि आप फिल्म को फिल्म की तरह देखकर भूल जाना चाहते हो। साथ ही अस्सी के दशक को 2013 में देखने के लिए भी।

क्यों न देखें

यदि आप यथार्थ के आसपास की फिल्में देखना पसंद करते हों।

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