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Sitaare Zameen Par Review: सिनेमा को सराहने की मेधा है तो जरूर देखें ये फिल्म, मकसद सिर्फ एंटरटेनमेंट न हो
सार
Sitaare Zameen Par Movie Review: स्पैनिश फिल्म ‘कैम्पियॉन्स (चैंपियंस)’ की आधिकारिक हिंदी रीमेक ‘सितारे जमीन पर’ अब सिनेमाघरों में हैं। ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बाद निर्माता-अभिनेता आमिर खान की ये नई रीमेक कैसी है, आइए जानते हैं..
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सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
सितारे जमीन पर
कलाकार
आमिर खान
,
जेनेलिया देशमुख
,
डॉली अहलूवालिया
,
सिमरन मंगेशकर
,
आयुष भंसाली
,
आशीष पेंडसे
,
गोपी कृष्णन वर्मा
,
वेदांत शर्मा
,
ऋषभ जैन
,
आरुष दत्ता
,
ऋषि साहनी
,
नमन मिश्रा
,
ब्रजेंद्र काला
और
निखत खान आदि
लेखक
दिव्य निधि शर्मा
निर्देशक
आर एस प्रसन्ना
निर्माता
आमिर खान
और
अपर्णा पुरोहित
रिलीज
20 जून 2025
रेटिंग
3/5
विस्तार
आमिर खान की पिछली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ कमाल की फिल्म रही। जिसने भी इसे देखा उसने इसकी तारीफ की और तमाम ऐसे लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर जमकर धोया, जिन्होंने इस देखा ही नहीं। फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ की रिलीज से पहले ही इसकी टीम इस मामले में काफी सचेत रही। हालांकि, फिल्म की ओटीटी बिक्री और सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर फैलाई गई गलत सूचनाओं ने फिल्म की हाइप थोड़ी कमजोर की और इसका असर सिनेमाघरों में पहले दिन पहला शो देखने पहुंचे लोगों की संख्या पर भी पड़ा, लेकिन हिंदी सिनेमा में ‘सितारे जमीन पर’ और इसके निर्माता आमिर खान को हर दौर मे याद किया जाएगा कि विपरीत परिस्थिति में कमर्शियल सिनेमा के दायरे में रहते हुए भी आर्ट सिनेमा बनाने की हिम्मत कैसे दिखाई जाती है।
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सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
स्पैनिश फिल्म की आधिकारिक रीमेक
फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ की कहानी सबको फिल्म की रिलीज होने से पहले से पता है। स्पैनिश फिल्म ‘कैम्पियॉन्स (चैंपियंस)’ की ये रीमेक है। लेकिन, जो पता है, उसका असर यहां इसलिए लापता है क्योंकि आमिर खान को पहले से पता है कि आखिर उनकी अदाकारी का पता इस पते में क्या रहने वाला है। अगर वाक्य जलेबी जैसा गोल गोल लगा हो तो फिल्म का भाव आपने बिल्कुल ठीक पकड़ा है। यहां कौन किसको सिखा रहा है और कौन किससे क्या सीख रहा है, इसमें भेद कर पाने की मोहलत दर्शक को न देना ही फिल्म की पटकथा का असल मूल मंत्र है। एक अति लोकप्रिय कहानी पर ढाई घंटे से ऊपर की पटकथा लिखना आसान काम नहीं है, लेकिन दिव्य निधि शर्मा ने कुछ जगह दृश्यों को अनावश्यक लंबा खींचने के अलावा एक अच्छी फिल्म लिखने में कामयाबी पाई है।
फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ की कहानी सबको फिल्म की रिलीज होने से पहले से पता है। स्पैनिश फिल्म ‘कैम्पियॉन्स (चैंपियंस)’ की ये रीमेक है। लेकिन, जो पता है, उसका असर यहां इसलिए लापता है क्योंकि आमिर खान को पहले से पता है कि आखिर उनकी अदाकारी का पता इस पते में क्या रहने वाला है। अगर वाक्य जलेबी जैसा गोल गोल लगा हो तो फिल्म का भाव आपने बिल्कुल ठीक पकड़ा है। यहां कौन किसको सिखा रहा है और कौन किससे क्या सीख रहा है, इसमें भेद कर पाने की मोहलत दर्शक को न देना ही फिल्म की पटकथा का असल मूल मंत्र है। एक अति लोकप्रिय कहानी पर ढाई घंटे से ऊपर की पटकथा लिखना आसान काम नहीं है, लेकिन दिव्य निधि शर्मा ने कुछ जगह दृश्यों को अनावश्यक लंबा खींचने के अलावा एक अच्छी फिल्म लिखने में कामयाबी पाई है।
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सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
खुद पर भरोसा करने की कहानी
हम होंगे कामयाब गीत यदि आपने गाया है तो इसके पहले की दोनों लाइनें आपको याद होंगी ही कि मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब, एक दिन। फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ बस इन तीन लाइनों का पूरा लेखा जोखा है। गुलशन एक अलग ही समय चक्र से गुजर रहा है। पत्नी और मां पूरी कोशिश करती हैं कि उसे उसके अपने नॉर्मल मे ही बनाए रखा जाए। गुलशन के सामने चुनौती है अपना खोया सम्मान वापस पाने की। मामला कुछ कुछ ‘तारे जमीन पर’ सा भी होता दिखता है लेकिन वहां टीचर एक बच्चे की मदद करता दिखता है, यहां नौ लड़के और एक लड़की मिलकर अपने गुरु को नया ज्ञान देते हैं। ज्ञान की गंगा हमेशा गंगोत्री से गंगासागर की तरफ ही नहीं बहती होती है। इसीलिए, तो कहा गया है कि ज्ञान जहां से भी मिल रहा है, ले लो और गुलशन इस मामले में खुद को इक्कीस साबित कर ही देता है।
हम होंगे कामयाब गीत यदि आपने गाया है तो इसके पहले की दोनों लाइनें आपको याद होंगी ही कि मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब, एक दिन। फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ बस इन तीन लाइनों का पूरा लेखा जोखा है। गुलशन एक अलग ही समय चक्र से गुजर रहा है। पत्नी और मां पूरी कोशिश करती हैं कि उसे उसके अपने नॉर्मल मे ही बनाए रखा जाए। गुलशन के सामने चुनौती है अपना खोया सम्मान वापस पाने की। मामला कुछ कुछ ‘तारे जमीन पर’ सा भी होता दिखता है लेकिन वहां टीचर एक बच्चे की मदद करता दिखता है, यहां नौ लड़के और एक लड़की मिलकर अपने गुरु को नया ज्ञान देते हैं। ज्ञान की गंगा हमेशा गंगोत्री से गंगासागर की तरफ ही नहीं बहती होती है। इसीलिए, तो कहा गया है कि ज्ञान जहां से भी मिल रहा है, ले लो और गुलशन इस मामले में खुद को इक्कीस साबित कर ही देता है।
सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
सतरंगी अभिनय अनोखे कलाकारों का
गोलू और गुलशन की कहानी के बीच बंधे तार पर संतुलन बनाकर चलती ‘सितारे जमीन पर’ की कहानी में अपने बालों को अजब ढंग से सजाने वाले आयुष भंसाली हों या सेक्योरिटी गार्ड बने आशीष पेंडरे, एंग्री गर्ल सिमरन मंगेशलकर, हमेशा अपने कान खींचते रहने वाले किरदार में वेदांत शर्मा और नहाने से दूर भागने वाले गुड्डू के किरदार में गोपी कृष्णन वर्मा ने खूब रंग जमाया है। ये इन किरदारों के इंद्रधनुषी रंग ही हैं जो फिल्म के कैनवस को आखिर तक सजाए रखते हैं। माली बने ऋषभ जैन, ऑटो मैकेनिक सतबीर के किरदार में आरुष दत्ता, करीम के किरदार में समंवित ने भी प्रभावित किया है।
गोलू और गुलशन की कहानी के बीच बंधे तार पर संतुलन बनाकर चलती ‘सितारे जमीन पर’ की कहानी में अपने बालों को अजब ढंग से सजाने वाले आयुष भंसाली हों या सेक्योरिटी गार्ड बने आशीष पेंडरे, एंग्री गर्ल सिमरन मंगेशलकर, हमेशा अपने कान खींचते रहने वाले किरदार में वेदांत शर्मा और नहाने से दूर भागने वाले गुड्डू के किरदार में गोपी कृष्णन वर्मा ने खूब रंग जमाया है। ये इन किरदारों के इंद्रधनुषी रंग ही हैं जो फिल्म के कैनवस को आखिर तक सजाए रखते हैं। माली बने ऋषभ जैन, ऑटो मैकेनिक सतबीर के किरदार में आरुष दत्ता, करीम के किरदार में समंवित ने भी प्रभावित किया है।
सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
कहानी लंबी और पटकथा सुस्त रफ्तार में
फिल्म की कहानी भले जानी पहचानी हो, पटकथा थोड़ी सुस्त और लंबी सी हो, पर निर्देशक आर एस प्रसन्ना ने अपनी सारी कठपुतलियों की डोर बहुत सलीके और संयत तरीके से पूरी फिल्म में थामे रखी है। तमिल फिल्म कल्याण समयल साधम (Kalyana Samayal Saadham) से साल 2013 में डेब्यू करने वाले और बाद में इसी फिल्म को हिंदी में ‘शुभ मंगल सावधान’ नाम से बनाने वाले निर्देशक प्रसन्ना के साथ अच्छी बात ये है कि वह साउथ सिनेमा के दर्शकों के साथ साथ हिंदी फिल्म दर्शकों की अनुभूतियों को भी अच्छे से जांच चुके हैं। वह सिनेमा बनाते हैं, प्रोजेक्ट नहीं। और, ये बात फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ भी सौ फीसदी लागू होती है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कमाएगी, इसके बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है, लेकिन अगर आपमें धैर्य है, सिनेमा को सराहने की मेधा है और थियेटर में सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए जाना ही इकलौता उद्देश्य नहीं है तो फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी। फिल्म किस ओटीटी पर आएगी, ये तो अभी तय नहीं है लेकिन ये फिल्म जिस भी ओटीटी पर आएगी, व्यूज सौ फीसदी मिलियन्स में पाएगी।
फिल्म की कहानी भले जानी पहचानी हो, पटकथा थोड़ी सुस्त और लंबी सी हो, पर निर्देशक आर एस प्रसन्ना ने अपनी सारी कठपुतलियों की डोर बहुत सलीके और संयत तरीके से पूरी फिल्म में थामे रखी है। तमिल फिल्म कल्याण समयल साधम (Kalyana Samayal Saadham) से साल 2013 में डेब्यू करने वाले और बाद में इसी फिल्म को हिंदी में ‘शुभ मंगल सावधान’ नाम से बनाने वाले निर्देशक प्रसन्ना के साथ अच्छी बात ये है कि वह साउथ सिनेमा के दर्शकों के साथ साथ हिंदी फिल्म दर्शकों की अनुभूतियों को भी अच्छे से जांच चुके हैं। वह सिनेमा बनाते हैं, प्रोजेक्ट नहीं। और, ये बात फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ भी सौ फीसदी लागू होती है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कमाएगी, इसके बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है, लेकिन अगर आपमें धैर्य है, सिनेमा को सराहने की मेधा है और थियेटर में सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए जाना ही इकलौता उद्देश्य नहीं है तो फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी। फिल्म किस ओटीटी पर आएगी, ये तो अभी तय नहीं है लेकिन ये फिल्म जिस भी ओटीटी पर आएगी, व्यूज सौ फीसदी मिलियन्स में पाएगी।
सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
आमिर के लिए अब नई पारी का वक्त
रही बात आमिर के अभिनय की तो आमिर अब अपने जीवन के उस दौर में आ चुके हैं, जहां उनको सहज दिखना बहुत मुश्किल होता होगा। फिल्म में उनका किरदार जैसा है, वैसा अभिनय करना आसान नहीं है। लेकिन, मुश्किल और मेहनत से किया गया ‘लाल सिंह चड्ढा’ का किरदार भी तो दर्शकों ने नकार ही दिया था। आमिर की बहन निखत भी फिल्म में हरगोविंद की मां के रूप में दिखती है, लेकिन ये 10 स्पेशल कलाकार हैं फिल्म के जो फिल्म में एक अलग ही रंगत लेकर आते हैं। प्रसन्ना ने उनसे एक्टिंग नहीं कराई है, उन्हें बस खुद को जीने दिया है, ये ही वे सितारे हैं जो जमीन पर हैं और ये ही वे सितारे हैं जो फिल्म के असल सुपर सितारे भी हैं।
रही बात आमिर के अभिनय की तो आमिर अब अपने जीवन के उस दौर में आ चुके हैं, जहां उनको सहज दिखना बहुत मुश्किल होता होगा। फिल्म में उनका किरदार जैसा है, वैसा अभिनय करना आसान नहीं है। लेकिन, मुश्किल और मेहनत से किया गया ‘लाल सिंह चड्ढा’ का किरदार भी तो दर्शकों ने नकार ही दिया था। आमिर की बहन निखत भी फिल्म में हरगोविंद की मां के रूप में दिखती है, लेकिन ये 10 स्पेशल कलाकार हैं फिल्म के जो फिल्म में एक अलग ही रंगत लेकर आते हैं। प्रसन्ना ने उनसे एक्टिंग नहीं कराई है, उन्हें बस खुद को जीने दिया है, ये ही वे सितारे हैं जो जमीन पर हैं और ये ही वे सितारे हैं जो फिल्म के असल सुपर सितारे भी हैं।