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Iqbal Qureshi: बॉलीवुड का ये सितारा जिसने मोहम्मद रफी संग दिए हिट गाने, आखिरी वर्षो में गुमनामी में बीता जीवन

Mon, 12 May 2025 05:37 PM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: आराध्य त्रिपाठी Updated Mon, 12 May 2025 05:37 PM IST
सार

Iqbal Qureshi Birthday: हिंदी फिल्मों में संगीत की आत्मा बनकर उभरे संगीतकार इकबाल कुरैशी का आज जन्मदिन है। संगीत निर्देशन की दुनिया में उन्होंने जो छाप छोड़ी, वह आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसी हुई है। इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन के कुछ अनकहे पहलुओं के बारे में।

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music composer director Iqbal Qureshi Birth anniversary worked with mohammad rafi lata mangeshkar
इकबाल कुरैशी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज में गाया हुआ गीत 'एक चमेली के मंडवे तले' तो आपको याद ही होगा। इस गाने में जो दर्द, मोहब्बत और जुदाई का तालमेल देखने को मिला उसने इस गाने को हमेशा के लिए अमर बना दिया। इस गीत को दर्शकों तक पहुंचाने वाले संगीतकार थे इकबाल कुरैशी, जिनका नाम आज की पीढ़ी के लिए भले ही अपरिचित हो, लेकिन 50 और 60 के दशक के सिनेमा प्रेमी उनके सुरों के जादू से खूब वाकिफ हैं। इकबाल कुरैशी ने अपने करियर में मोहम्मद रफी, मुकेश, लता मंगेशकर, आशा भोंसले और महेंद्र कपूर जैसे दिग्गज गायकों के लिए धुनें बनाईं, जिन्हें सुनकर आज भी श्रोताओं की आंखें नम हो जाती हैं या चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

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बचपन से संगीत का साथ
12 मई 1930 को औरंगाबाद में जन्मे इकबाल कुरैशी ने काफी कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के कार्यक्रमों में गाना शुरू कर दिया था। साथ ही वह पब्लिक गैदरिंग में भी गाया करते थे। बाद में वह हैदराबाद से मुंबई आ गए, जहां उन्होंने इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन से जुड़कर नाटकों के लिए संगीत देना शुरू किया। यही वह दौर था जब उनकी मुलाकात मशहूर शायर मखदूम मोहिउद्दीन और अभिनेता चंद्रशेखर से हुई, जिन्होंने उनके करियर को नया मोड़ दिया।

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इकबाल कुरैशी - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्मी सफर की शुरुआत
साल 1958 में 'पंचायत' फिल्म से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ। इस फिल्म में उन्होंने भारतीय लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत को नए तरीके से पेश किया। गीत 'ता थैया करके आना' ने खासी लोकप्रियता हासिल की। फिल्म 'लव इन शिमला' का गाना 'गाल गुलाबी किसके हैं' लंबे समय तक लोगों की जुबान पर रहा।

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इकबाल का सबसे लोकप्रिय गाना 
साल 1964 में आई फिल्म 'चा चा चा' में इकबाल कुरैशी ने संगीत की दुनिया में जो नगीना जड़ा, वह आज भी अमर है। इस फिल्म का गाना 'एक चमेली के मंडवे तले' उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुआ। यह गीत मखदूम मोहिउद्दीन की कविता पर आधारित था और इसके संगीत में जो दर्द और मोहब्बत थी, उसने इसे कालजयी बना दिया।

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इकबाल कुरैशी - फोटो : सोशल मीडिया
गुमनामी में बीते आखिरी साल
'लंबे अरसे तक भारतीय संगीत की दुनिया में शानदार गाने देने के बाद साल 1964 के बाद उनकी फिल्में उतनी लोकप्रिय नहीं रहीं। हालांकि उन्होंने 1986 तक कुल 25 फिल्मों के लिए संगीत दिया। 1973 में आई 'आलम आरा' की रीमेक में भी उन्होंने संगीत दिया है। यह वही फिल्म थी, जिसे भारतीय सिनेमा की पहली बोलने वाली फिल्म के तौर पर भी जाना जाता है। 21 मार्च 1998 को 68 साल की उम्र में मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली। यह दुख की बात है कि एक ऐसा संगीतकार, जिसने हिंदी सिनेमा को इतने खूबसूरत और यादगार नगमे दिए, वो अपने आखिरी सालों में गुमनामी में रहा।
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