सलीम खान से एस. जानकी तक; जब इन दिग्गज हस्तियों ने ठुकराए पद्म पुरस्कार; जानिए और कौन-कौन है लिस्ट में शामिल?
Celebs Who Turned Down Padma Awards: प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार जिसे मिले, उस शख्स की खुशी सातवें आसमान पर होती है। मगर, कुछ ऐसे दिग्गज भी हैं, जिन्होंने अपने लिए इस पुरस्कार का एलान होने के बाद इसे लेने से इनकार कर दिया। भारतीय सिनेमा और संगीत जगत के कई बड़े नामों ने अलग-अलग दौर में पद्म पुरस्कार लेने से इनकार किया। जानिए
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हर साल कला, साहित्य और शिक्षा, सामाजिक कार्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, खेल-कूद और सिविल सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चुनिंदा लोगों को प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। इनका एलान गणतंत्र दिवस के अवसर पर किया जाता है। फिर, राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति विजेताओं को सम्मानित करते हैं। तमाम लोग इस पुरस्कार का सपना देखते हैं। सिनेमा जगत से हर साल कला के क्षेत्र में योगदान के लिए सेलेब्स को यह पुरस्कार दिया जाता है। मगर, कुछ ऐसे दिग्गज भी हैं, जिन्होंने इस सम्मान को लेने से इनकार कर दिया। सबके अलग-अलग कारण थे। किसी ने कहा सम्मान देर से मिला, किसी ने इसे छोटा बताया तो कुछ कलाकारों ने सिस्टम और राजनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए।
सलीम खान
भारतीय सिनेमा को 'एंग्री यंग मैन' देने वाले सलीम खान उन नामों में शामिल हैं, जिन्होंने पद्म पुरस्कार लेने से मना कर दिया था। साल 2015 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया था। मगर, उन्होंने इसे लेने से इनकर कर दिया। सलीम खान ने कभी भी इस पर कोई खुली प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक वे सम्मान की कैटेगरी से खुश नहीं थे। इंडस्ट्री में बाद में यह चर्चा भी रही कि भारतीय सिनेमा में उनके योग्यदान को देखते हुए उन्हें बड़ा सम्मान मिलना चाहिए।
एस. जानकी
मशहूर सिंगर एस. जानकी को 'दक्षिण भारत की कोकिला' कहा जाता है। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी भाषाओं में उन्होंने 48 हजार से अधिक गाने अपनी सुरीली आवाज से सजाए हैं। उनके इसी योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2013 में पद्म पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था, लेकिन उन्होंने इसे लेने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि उन्हें ये पुरस्कार बहुत देर से दिया जा रहा है। साथ ही कहा कि दक्षिण भारत के कलाकारों को नेशनल लेवल पर वह पहचान नहीं मिलती जिसके वो हकदार हैं। जानकी ने यह भी कहा कि वे अपने फैंस के प्यार को किसी भी पुरस्कार से बड़ा मानती हैं।
खुशवंत सिंह
खुशवंत सिंह ने अपनी कलम से राजनीति, धर्म और समाज पर बेबाकी से सवाल उठाए। उन्होंने 'ट्रेन टू पाकिस्तान' और 'ए हिस्ट्री ऑफ द सिख्स' जैसी किताबें लिखी थी। फिल्मों में भी उन्होंने स्क्रिप्ट लेखन का काम किया। उनके इस योगदाव को देखते हुए साल 1974 में उन्हें पद्म पुरस्कार दिया गया था, लेकिन साल 1984 में उन्होंने यह सम्मान वापस लौटा दिया। यह फैसला उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार और गोल्डन टेंपल में सेना की कार्रवाई के विरोध में लिया था।
संध्या मुखोपाध्याय
प्लेबैक सिंगर और संगीतकार संध्या मुखोपाध्याय ने बंगाली संगीत जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। वे भारतीय संगीत जगत की सबसे प्रतिष्ठित गायिकाओं में से एक थीं। उन्हें खासकर बंगाली संगीत और सिनेमा में अपनी सुरीली आवाज के लिए जाना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2022 में उन्होंने पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था। उनके परिवार की ओर से कहा गया था कि इतने लंबे और ऐतिहासिक करियर के बाद पद्म श्री उनके कद के मुकाबले छोटा सम्मान है। उनका मानना था कि उन्हें इससे बड़ा सम्मान मिलना चाहिए था। गणतंत्र दिवस 2022 के अवसर पर उन्हें पद्मश्री सम्मान के लिए उनकी सहमति लेने हेतु फोन किया था, तब गायिका ने इसे अस्वीकार कर दिया था। बता दें कि उसी वर्ष फरवरी में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
विलायत खान
दिगग्ज सितार वादक उस्ताद विलायत खान का नाम भी इस लिस्ट में है। उन्होंने सितार को भारत में नहीं, बल्कि पूरे विश्व में पहचान दिलाई थी। उन्हें तीन बार पद्म पुरस्कार दिए थे और उन्होंने तीनों बार उसे वापस कर दिया था। साल 1964 में पद्म श्री, 1968 में पद्म भूषण और साल 2000 में पद्म विभूषण के लिए उनके नाम का एलान हुआ, लेकिन हर बार उन्होंने लेने से इनकार कर दिया। खान सहाब का कहना था कि उनके लिए पुरस्कार से ज्यादा महत्वपूर्ण उनकी कला और उसकी सही पहचान है। बता दें कि मार्च 2004 में विलायत खान ने दुनिया को अलविदा कह दिया।