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'न किसी विचारधारा का प्रचार, न कोई एजेंडा', फिल्म 'कांतारा चैप्टर 1' को लेकर बोले ऋषभ शेट्टी
Sun, 12 Oct 2025 05:59 PM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Sun, 12 Oct 2025 05:59 PM IST
सार
Rishab Shetty on Kantara Chapter 1: अभिनेता-निर्देशक ऋषभ शेट्टी ने हाल ही में फिल्म 'कांतारा चैप्टर 1' को लेकर बात की है। उन्होंने फिल्म को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाओं पर भी बात की है।
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कांतारा चैप्टर 1
- फोटो : एक्स
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विस्तार
कन्नड़ सिनेमा की फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1’ रिलीज के बाद से हर तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है। 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आई इस फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर 600 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया, बल्कि दर्शकों के दिलों में भी गहरी छाप छोड़ी। अब फिल्म के निर्माता, निर्देशक और अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने फिल्म को लेकर अपनी सोच और अनुभव साझा किए हैं।
ऋषभ शेट्टी ने शेयर किए अनुभव
हाल ही में फिल्म पर बात करते हुए ऋषभ शेट्टी ने बताया कि ‘कांतारा: चैप्टर 1’ किसी राजनीतिक विचारधारा या प्रचार का हिस्सा नहीं है। यह कहानी विश्वास, आस्था और प्रकृति के प्रति इंसान के जुड़ाव की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'मैंने इस फिल्म को किसी विचारधारा से नहीं जोड़ा, बस एक ऐसी कहानी कहना चाहता था जो इंसान के भीतर की अनुभूति को जगाए। यह हमारी लोककथाओं और भारतीयता की आत्मा से जुड़ी कहानी है।'
यह खबर भी पढ़ें: ‘काश उस पल को महसूस कर पाती’, ‘जिगरा’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिलने पर इमोशनल हुईं आलिया भट्ट
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ऋषभ शेट्टी ने फिल्म पर की बात
फिल्म में विश्वास और अध्यात्म के कई गहरे प्रतीक देखने को मिलते हैं। ऋषभ शेट्टी ने बताया कि उनके लिए अध्यात्म कोई दिखावे की चीज नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'मेरी मां बहुत पूजा करती हैं और यह परंपरा हमारे परिवार की जीवनशैली बन चुकी है। मैं जब शूटिंग शुरू करता हूं, तो कैमरे की पूजा करके आरंभ करता हूं। यह सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि हमारी आस्था का प्रतीक है।' उनका मानना है कि जैसे मंदिर में जाकर व्यक्ति ईश्वर से एक आत्मिक संवाद करता है, उसी तरह फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1’ भी दर्शकों को एक अनुभव देती है- यह तय करना दर्शकों पर निर्भर है कि वे उसे कैसे महसूस करते हैं।
चुनौती भरी रही कहानी की खोज
ऋषभ शेट्टी के मुताबिक, ‘कांतारा: चैप्टर 1’ की सबसे बड़ी चुनौती इसकी कहानी तैयार करना थी। 2022 की फिल्म ‘कांतारा’ की तुलना में यह अध्याय अधिक जटिल और गहराई लिए हुए है। निर्देशक बताते हैं, “पहले भाग में कहानी सीधी थी, लेकिन इस बार किरदारों के उद्देश्य, उनके संबंध और भावनाओं को स्थापित करना सबसे कठिन हिस्सा था।'
फिल्म की पृष्ठभूमि औपनिवेशिक काल से पहले के कर्नाटक की है, जहां जंगलों में रहने वाले जनजातियों और एक अत्याचारी राजा के बीच टकराव को दिखाया गया है। इस कालखंड की ऐतिहासिक सच्चाइयों और लोककथाओं को जीवंत बनाने के लिए टीम ने महीनों तक शोध किया।
‘कांतारा’ की दुनिया अब और फैलेगी
फिल्म की सफलता के बाद ऋषभ शेट्टी ने यह भी संकेत दिया कि ‘कांतारा यूनिवर्स’ अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'इस लोकविश्व में अभी कई कहानियां हैं जिन्हें मैं आगे चलकर बताना चाहता हूं। लेकिन यह कब और कैसे होगा, यह समय तय करेगा।' इसके साथ ही उन्होंने अपने अगले प्रोजेक्ट ‘जय हनुमान’ की भी घोषणा की, जिसकी शूटिंग अगले वर्ष शुरू होने की संभावना है।
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ऋषभ शेट्टी ने शेयर किए अनुभव
हाल ही में फिल्म पर बात करते हुए ऋषभ शेट्टी ने बताया कि ‘कांतारा: चैप्टर 1’ किसी राजनीतिक विचारधारा या प्रचार का हिस्सा नहीं है। यह कहानी विश्वास, आस्था और प्रकृति के प्रति इंसान के जुड़ाव की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'मैंने इस फिल्म को किसी विचारधारा से नहीं जोड़ा, बस एक ऐसी कहानी कहना चाहता था जो इंसान के भीतर की अनुभूति को जगाए। यह हमारी लोककथाओं और भारतीयता की आत्मा से जुड़ी कहानी है।'
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ऋषभ शेट्टी ने फिल्म पर की बात
फिल्म में विश्वास और अध्यात्म के कई गहरे प्रतीक देखने को मिलते हैं। ऋषभ शेट्टी ने बताया कि उनके लिए अध्यात्म कोई दिखावे की चीज नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'मेरी मां बहुत पूजा करती हैं और यह परंपरा हमारे परिवार की जीवनशैली बन चुकी है। मैं जब शूटिंग शुरू करता हूं, तो कैमरे की पूजा करके आरंभ करता हूं। यह सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि हमारी आस्था का प्रतीक है।' उनका मानना है कि जैसे मंदिर में जाकर व्यक्ति ईश्वर से एक आत्मिक संवाद करता है, उसी तरह फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1’ भी दर्शकों को एक अनुभव देती है- यह तय करना दर्शकों पर निर्भर है कि वे उसे कैसे महसूस करते हैं।
चुनौती भरी रही कहानी की खोज
ऋषभ शेट्टी के मुताबिक, ‘कांतारा: चैप्टर 1’ की सबसे बड़ी चुनौती इसकी कहानी तैयार करना थी। 2022 की फिल्म ‘कांतारा’ की तुलना में यह अध्याय अधिक जटिल और गहराई लिए हुए है। निर्देशक बताते हैं, “पहले भाग में कहानी सीधी थी, लेकिन इस बार किरदारों के उद्देश्य, उनके संबंध और भावनाओं को स्थापित करना सबसे कठिन हिस्सा था।'
फिल्म की पृष्ठभूमि औपनिवेशिक काल से पहले के कर्नाटक की है, जहां जंगलों में रहने वाले जनजातियों और एक अत्याचारी राजा के बीच टकराव को दिखाया गया है। इस कालखंड की ऐतिहासिक सच्चाइयों और लोककथाओं को जीवंत बनाने के लिए टीम ने महीनों तक शोध किया।
‘कांतारा’ की दुनिया अब और फैलेगी
फिल्म की सफलता के बाद ऋषभ शेट्टी ने यह भी संकेत दिया कि ‘कांतारा यूनिवर्स’ अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'इस लोकविश्व में अभी कई कहानियां हैं जिन्हें मैं आगे चलकर बताना चाहता हूं। लेकिन यह कब और कैसे होगा, यह समय तय करेगा।' इसके साथ ही उन्होंने अपने अगले प्रोजेक्ट ‘जय हनुमान’ की भी घोषणा की, जिसकी शूटिंग अगले वर्ष शुरू होने की संभावना है।