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Samwad 2026: 'यूट्यूब से फिल्मों तक पहुंच गया'; संवाद में बोले अगु स्टेनली, आयुष्मान भी मंच पर हैं मौजूद
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Jyoti Raghav
Updated Tue, 19 May 2026 05:42 PM IST
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सार
Amar Ujala Samwad Lucknow 2026: अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026 राजधानी लखनऊ में जारी है। दो दिवसीय संवाद के दूसरे दिन आज मंगलवार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अगु स्टेनली, आयुष्मान पंडिता और यश व ज्ञान मौजूद हैं। वे संवाद में 'कंटेंट, क्रिएटिविटी और क्रेज' विषय पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अगु स्टेनली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026 का आयोजन लखनऊ में हुआ है। इस वैचारिक कार्यक्रम में राजनीति, खेल, अध्यात्म, स्वास्थ्य और मनोरंजन जगत के तमाम दिग्गज शामिल हो रहे हैं। इस दो दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन, आज मंगलवार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अगु स्टेनली, आयुष्मान पंडिता और यश व ज्ञान (फ्लाइंग बॉयज) ने शिरकत की है। मूल रूप से नाइजीरियन अगु स्टेनली ने कई दिलचस्प सवालों के जवाब दिए। वहीं, आयुष्मान ने भी रोचक किस्से साझा किए। पढ़िए कुछ अंश...
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अगु आप सात साल से भारत में हैं। आपने जिस तरह कंटेंट की दुनिया में जगह बनाई है। बॉलीवुड से भी कॉल आ गई। अपनी यात्रा के बारे में बताइए?
अगु स्टेनली: मैं यहां पढ़ाई करने सात साल पहले नाइजीरिया से आया था। मैंने लखनऊ से बी.फार्मा किया। तीन साल से कंटेंट बना रहा हूं। अब मुंबई शिफ्ट हो गया हूं। वहां अनुराग कश्यप का कॉल आ गया बॉबी देओल के साथ फिल्म 'बंदर' करने के लिए। इसके अलावा साउथ की भी एक फिल्म करने जा रहा हूं मैं। मजा आ रहा है बहुत इस यात्रा में।
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कंटेंट आजकल सबके फोन में हैं। मगर, जो क्रिएटिविटी के साथ बात रखता है तो बात अलग होती है। ताऊ और चाचा साथ हैं तो यह प्लान कैसे हुआ?
यश और ज्ञान: देखिए रिलेटेबल कंटेंट आजकल हर कोई बनाने की कोशिश कर रहा है। हम भी सोच रहे थे कि क्या अलग करें। मैंने एक बार घर में देखा कि मेरे पापा और ताऊ जब बात कर रहे थे तो काफी ऑकवर्ड होकर बात कर रहे थे। हमने बात की, कि इस रिलेशन पर कोई बात नहीं कर रहा। ऐसे ही चाचा-ताऊ की यात्रा शुरू हुई।
आप सात साल पहले भारत आए। तब ऐसी कोई प्लानिंग नहीं रही होगी। आप अब गाली वाले कंटेंट नहीं बनाते..यह बदलाव कैसै शुरू हुआ?
अगु स्टेनली: गाली अच्छी चीज नहीं है। मैं यूपी में रहा सात साल तो जान गया। कुछ ऑब्जर्वेशन से हुआ और कुछ दोस्तों ने भी सिखाया। अब ये कंटेंट नहीं बनाता।
एआई से डरने वालों के लिए कोई मैसेज?
आयुष्मान पंडिता: आप एक वीडियो बनाने के लिए भी दो-तीन एआई टूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, प्रोसेस में इंसान इनवॉल्व है। एआई आपके प्रोसेस को आसान बना देगा और काम जल्दी होगा। एआई को लेकर लोग डर जाते हैं। मैं हर एक को कहता हूं कि अभी हम जो एआई का बूम देख रहे हैं, वह कुछ इंटरनेट के बूम जैसा है, जब लगा था कि बहुत सारी जॉब चली जाएंगी। नौकरी गईं भी लेकिन, बहुत सारी नई जॉब आई भी तो हैं। एआई को लेकर भी यह अनिश्चितता का दौर है, जो हर किसी के लिए कंसर्निंग होता है। मगर, दो-तीन साल में सब दिखाई देने लगेगा।
आपने कंटेंट स्विच कर लिया है। मुंबई रहने लगे हो तो कंटेंट भी बदला है। आप यूथ बेस्ड कंटेंट बनाते हो। ऐसा कंटेंट बहुत से लोग बना रहे हैं। अब आगे क्या प्लानिंग करेंगे?
अगु स्टेनली: अगर आप ऑथेंटिंक नहीं हो तो दर्शकों से जुड़ नहीं पाओगे। मेरी कोशिश होती है ऑथेंटिंक कंटेंट बनाने की और लोगों से जुड़ने की। मैंने एआई की मदद कभी नहीं ली। मैं आइडिया के लिए मदद लेता हूं।
अगर बॉलीवुड से ऑफर आए किसी हीरोइन के साथ काम करने का तो कौन होगी वो?
अगु स्टेनली: जो मिल जाए, उसी के साथ काम कर लूंगा। लेकिन मेरी फेवरेट आलिया भट्ट और प्रियंका चोपड़ा हैं।
लाइट-कैमरा-एक्शन की दुनिया कितनी अलग है?
अगु स्टेनली: हर कंटेंट क्रिएटर एक आर्टिस्ट है। शुरुआत में मुझे बहुत नर्वस फील होता था। कैमरा के पीछे सौ-दो सौ लोग होते थे। मैं कैमरा के साथ अकेला वीडियो बनाता था। मगर, धीरे-धीरे आदत हो गई।
लॉन्ग टर्म कंटेंट या शॉर्ट टर्म कंटेंट, किसका ज्यादा भविष्य है?
आयुष्मान पंडिता: मैं खुद भी यह सोचता हूं कि किस पर ज्यादा फोकस करना है। मेरी यूट्यूब पर लॉन्ग फॉर्म की है। इंस्टाग्राम पर शॉर्ट फॉर्म की वीडियो हैं। यूट्यूब से शुरुआत की थी तो वह मेरे लिए गर्लफ्रेंड की तरह है। कंटेंट क्रिएटर्स के पास पैसे वैसे ब्रांड्स के जरिए ज्यादा आते हैं। हालांकि, इंसान अब ज्यादा देर किसी एक चीज पर अटेंशन दे नहीं पाते तो मेरा सबको सुझाव है कि आप छोटी वीडियो से शुरुआत करो पर फ्यूचर दोनों का है।
यश और ज्ञान.. हैलो गाइज, वेलकम बैक टू माय चैनल के दौर में आपके दिमाग में ऐसा रिलेटेबल कंटेंट बनाने का आइडिया कैसे आया?
यश और ज्ञान: कंटेंट क्रिएशन को सरकार ने भी बोल दिया कि यह अब प्रॉपर जॉब है। इसका दुख है। हम जॉब छोड़कर पैशन फॉलो करने आए थे और अब ये भी जॉब हो गई।
बाकी रिलेटेबल कंटेंट की बात है तो हम सोचते ही नहीं कि मार्केट में क्या चल रहा है। क्या एल्गोरिदम चल रहा है। हम बस यही सोचते हैं कि क्या करने में मजा आ रहा है। हमें जो अंदर से इंट्यूशन से जो आता है, वही बनाते हैं। हमारा कंटेंट पूरा इंट्यूशन बेस्ड है।