यौन उत्पीड़न मामले में 'मंजुम्मेल बॉयज' के निर्देशक चिदंबरम को कोर्ट से मिली राहत, अदालत ने सशर्त दी जमानत
Chidambaram: 'मंजुम्मेल बॉयज' के निर्देशक चिदंबरम को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ये राहत 2022 के एक मामले में मिली है। जानिए क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने निर्देशक पर लगाईं क्या पाबंदियां…
विस्तार
मलयालम फिल्म 'मंजुम्मेल बॉयज' के निर्देशक चिदंबरम को 7 मार्च को एर्नाकुलम जिला एवं सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई है। यह जमानत मई 2022 में हुई एक घटना के बाद दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत के आधार पर दी गई। न्यायालय ने कुछ शर्तें भी लगाईं, जिनमें चिदंबरम को जांच में सहयोग करना, सबूतों से छेड़छाड़ न करना और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास न करना शामिल है।
एक अभिनेत्री ने दर्ज कराई थी शिकायत
शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर एर्नाकुलम दक्षिण पुलिस स्टेशन में 28 फरवरी को मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक अभिनेत्री ने दावा किया कि फिल्म निर्माता ने 2022 में कोच्चि के एक अपार्टमेंट में उनके साथ दुर्व्यवहार किया था।
अधिकारियों ने निर्देशक पर बीएनएस की धारा 74 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) और धारा 75 (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया है। चिदंबरम की जमानत याचिका 3 मार्च को दाखिल की गई थी और अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
चिदंबरम ने जवाबी याचिका दायर की
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, चिदंबरम ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी मुलाकात शिकायतकर्ता से फिल्म 'मंजुम्मेल बॉयज' के निर्माण के दौरान हुई थी, जहां उन्हें एक भूमिका के लिए चुना जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि उनका व्यवहार पेशेवर था और आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए एक अभियान शुरू किया।
शिकायतकर्ता ने इंस्टाग्राम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए एक रील पोस्ट की थी और उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में उसके खिलाफ हर्जाने का मुकदमा दायर किया था। दिसंबर 2025 में एक अंतरिम आदेश जारी किया गया था जिसमें उसे मानहानिकारक समाचार प्रकाशित करने से रोक दिया गया था।
यह खबर भी पढ़ेंः अरिजीत के प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने पर विशाल ददलानी ने दी प्रतिक्रिया, बोले- ‘जो दिल करे, वही करो’
अदालत ने कही ये बात
अदालत ने जमानत देते हुए पिछले आपराधिक रिकॉर्ड की कमी और याचिका दायर करने में देरी का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। आरोपों की प्रकृति से याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ का संकेत नहीं मिलता है।
घटना वर्ष 2022 में हुई थी। याचिका दायर करने में चार साल की देरी हुई है। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया जिसमें शिकायतकर्ता को किसी भी प्लेटफॉर्म पर कोई भी मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया गया था। अदालत ने चिदंबरम को पुलिस जांच में सहयोग करने का भी आदेश दिया है।
कमेंट
कमेंट X