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Hindi News ›   Entertainment ›   Supreme Court refuses to stay release Mahaprabhu Jagannath animated film raises concern over pleas to ban art

एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार; इस बात को लेकर जताई चिंता

Wed, 29 Jul 2026 04:29 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Wed, 29 Jul 2026 04:29 PM IST
सार

Supreme Court On Mahaprabhu Jagannath Release: एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज पर रोक से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। साथ ही कहा कि यह फिल्म प्रभु जगन्नाथ की भक्ति को कम नहीं करती है।

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Supreme Court refuses to stay release Mahaprabhu Jagannath animated film raises concern over pleas to ban art
फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही संवेदनशीलता के आधार पर कला पर बैन लगाने की बढ़ती याचिकाओं पर चिंता भी जताई। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन सुप्रीम की बेंच ने यह भी कहा कि फिल्म किसी भी तरह से भगवान जगन्नाथ से जुड़ी भक्ति या श्रद्धा को कम नहीं करती है।

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रिलीज पर रोक वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म की रिलीज रोकने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी है। साथ ही 17 जुलाई के अपने उस ऑर्डर को बदलने से भी इनकार कर दिया, जिसमें प्रोड्यूसर को 28 जुलाई को पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा खत्म होने के बाद फिल्म रिलीज करने की इजाजत दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि भगवान जगन्नाथ को एनिमेटेड रूप में दिखाना गलत है। कोर्ट ने कहा कि अगर आर्ट को इसलिए कम किया जाता है, क्योंकि इससे कुछ लोगों की सेंसिटिविटी को ठेस पहुंचती है, तो 'रामायण' और 'महाभारत' पर आधारित काम कभी नहीं बन सकते। श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन और एक भक्त ने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए 17 जुलाई के ऑर्डर में बदलाव के लिए एप्लीकेशन फाइल की थी।

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'कड़े ऑर्डर देने पड़ सकते हैं'
आज सुनवाई के दौरान बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि सिर्फ इसलिए कि कला और रचनात्मकता कुछ लोगों की भावनाओं से मेल नहीं खाती, उन पर ज्यूडिशियल बैन लगाने की मांग बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी याचिकाएं फाइल होती रहीं, तो कोर्ट को आखिर में हिंदू देवी-देवताओं को किसी भी तरह से आर्टिस्टिक रूप में दिखाने पर रोक लगाने के लिए कड़े ऑर्डर देने पड़ सकते हैं। 
पूरे भारत में 'रामायण' के कई वर्जन और देश की समृद्ध कला परंपराओं का जिक्र करते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इस तरह के कदम से हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों, टीवी सीरियलों, पेंटिंग, मूर्तियों और अन्य रचनात्मक कार्यों पर असल में रोक लग जाएगी। बेंच ने कहा, 'अगर ऐसी सोच और संवेदनशीलता हो और दो-तीन लोग रिट याचिका दायर कर दें, तो हम ऐसा आदेश दे देंगे कि हिंदू देवी-देवताओं या पौराणिक कथाओं से जुड़ी भारत में कोई भी कलाकृति न रहे'।

कहा- 'फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई'
जस्टिस नागरत्ना ने मंदिर प्रशासन की ओर से पेश हुए ओडिशा के एडवोकेट जनरल प्रीतांबर आचार्य से कहा, 'हमारे पास कबीर की रामायण है, हर राज्य की अपनी रामायण है। हर व्यक्ति की अपनी रचनात्मकता होती है। अगर हम ऐसा कोई आदेश पारित करते हैं, तो टेलीविजन पर सभी 'रामायण' और 'महाभारत' बंद हो जाएंगे। हिंदू देवी-देवताओं की किसी भी रूप में कला - चाहे वह टेलीविजन हो, रचनात्मकता हो, पेंटिंग हो या मूर्ति। अगर आप चाहें, तो हम ऐसा आदेश पारित कर देंगे'।
याचिकाकर्ता ने कहा कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ को 'डोरेमोन' और 'स्पाइडरमैन' के रूप में दिखाया गया है। बेंच ने भगवान जगन्नाथ को एनिमेटेड रूप में दिखाए जाने पर आचार्य की आपत्ति को खारिज कर दिया और कहा कि यह फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई थी।

प्रोड्यूसर से सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बेंच ने आदेश दिया, 'हमने एडवोकेट जनरल को सुना। हम ऑर्डर में बदलाव नहीं करना चाहते। एप्लीकेशन खारिज की जाती है'। ऑर्डर सुनाने के बाद, बेंच ने फिल्म के प्रोड्यूसर से कहा कि वह अपनी अंतरात्मा की आवाज पर, जो भी सही लगे, उसमें कोई भी बदलाव करने के लिए आजाद हैं। साथ ही यह भी साफ किया कि कोर्ट ऐसे क्रिएटिव फैसलों पर फैसला नहीं सुनाएगा।

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