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'कुंभ की वायरल गर्ल को मध्य प्रदेश पुलिस को न सौंपा जाए'; केरल हाईकोर्ट का राज्य सरकार को निर्देश

Wed, 29 Jul 2026 04:57 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Wed, 29 Jul 2026 04:57 PM IST
सार

Kerala High Court On Kumbh Mela Girl: केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रयागराज कुंभ मेला से चर्चा में आई वायरल गर्ल को मध्य प्रदेश पुलिस को न सौंपा जाए।

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Ensure viral kumbh mela girl not handed over to Madhya Pradesh police Kerala High Court to state government
मोनालिसा-फरमान खान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को निर्देश दिया कि प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई लड़की को कोर्ट के आदेश के बिना मध्य प्रदेश पुलिस या किसी और को न सौंपा जाए। 

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नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स पर सवाल उठाया
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह निर्देश जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने तब जारी किया, जब कोर्ट को बताया गया कि नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स ने केरल के राज्य पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया है कि वे लड़की को तुरंत मध्य प्रदेश पुलिस को सौंप दें। हाई कोर्ट ने कहा कि आयोग न तो कोई कोर्ट है, न ही कोई ट्रिब्यूनल या फैसला करने वाली संस्था और पहली नजर में उसके पास केवल सिफारिश करने की पावर हैं।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
केरल हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा कि नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स (NCST) ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता, जो किसी व्यक्ति के जीवन के अधिकार को प्रभावित करता हो। हाईकोर्ट का यह भी मानना है कि कमीशन का आदेश बताता है कि लड़की को अपनी जान को खतरा होने का डर सही था। याचिकाकर्ता (लड़की) को केरल से मध्य प्रदेश तक सुरक्षित पहुंचाने का आदेश जारी करने के लिए उक्त आयोग का अधिकार क्षेत्र संदिग्ध है। यह बात तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जब यह अदालत याचिकाकर्ता के उस दावे पर विचार कर रही है कि कई लोगों द्वारा उसके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करने की कोशिश की जा रही है।

कहा- 'उचित सुरक्षा दी जाए'
हाई कोर्ट ने आगे कहा, 'हाई कोर्ट का मानना है कि याचिकाकर्ता को अपनी जान का जो खतरा महसूस हो रहा है, वह वास्तविक है'। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पुलिस (जिसमें कोच्चि शहर के पुलिस कमिश्नर भी शामिल हैं, जिनके अधिकार क्षेत्र में लड़की रहती है) को यह सुनिश्चित करने के लिए कहे कि जब तक लड़की जान की सुरक्षा की याचिका का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उसे हाई कोर्ट के आदेश के बिना और उसकी मर्जी के खिलाफ वहां से न हटाया जाए। कोर्ट ने कहा, 'प्रतिवादियों (राज्य और पुलिस) को यह सुनिश्चित करना होगा कि याचिकाकर्ता को उचित सुरक्षा दी जाए और इस कोर्ट के आदेश के बिना उसे किसी भी व्यक्ति को नहीं सौंपा जाए। इसमें मध्य प्रदेश की पुलिस भी शामिल है।

कब होगी अगली सुनवाई?
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख तय की। आयोग का यह आदेश उत्तर प्रदेश के एक सोशल वर्कर की याचिका पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि लड़की नाबालिग है और उसने अलग धर्म के व्यक्ति से शादी की है। लड़की के पति, फरमान पर उसे अगवा करने का आरोप है। यह मामला मध्य प्रदेश पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर दर्ज किया है, जिन्होंने दावा किया है कि वह नाबालिग है।

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