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Sholay 50: 'शोले' की शूटिंग के वक्त गांव वालों ने धर्मेंद्र को दी थी सूखी मछली, बदले में मिली थी बिरयानी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Fri, 15 Aug 2025 01:54 PM IST
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सार
Sholay Shooting: फिल्म 'शोले' को रिलीज हुए आज 50 साल हो गए। इस मौके पर आज हम आपको बता रहे हैं कि जहां पर इसकी शूटिंग हुई थी उस जगह के लोग इसे कैसे याद करते हैं।
शोले के कलाकार
- फोटो : एक्स
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विस्तार
साल 1975 में स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज होने वाली फिल्म 'शोले' ने नवी मुंबई के कई गांवों के निवासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। आधी सदी बाद भी पनवेल-उरण रोड के किनारे बसे गांवों के निवासी आज भी इस फिल्म की शूटिंग की यादों को संजोए हुए हैं। उस क्षेत्र के प्रमुख समुदाय अगरी और कोली, जो उस वक्त धान की खेती करते थे और मछली पकड़ते थे, वह शूटिंग के वक्त हर दिन सेट पर उमड़ पड़ते थे। यहां 1972 के आसपास शूटिंग होती थी।
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खाने का आदान-प्रदान होता था
62 साल के संजय शेलार ने कहा 'धर्मेंद्र जिन्होंने वीरू का किरदार निभाया था, वह कभी-कभी स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिल जाते थे। उन्होंने सूखी मछली और चावल के आटे की रोटी खाई थी। बदले में धर्मेंद्र स्थानीय लोगों को बिरयानी या उनके लिए विशेष रूप से पकाए गए भोजन देते थे।'
सिर्फ सुपरस्टार ही नहीं, क्रू के सदस्यों ने भी स्थानीय लोगों के साथ खाने की अदला बदली की। उन्होंने बताया कि वे अपने पेय पदार्थ ग्रामीणों को देते थे। गांव वाले उनके लिए घर का बना पेय लाते थे।
62 साल के संजय शेलार ने कहा 'धर्मेंद्र जिन्होंने वीरू का किरदार निभाया था, वह कभी-कभी स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिल जाते थे। उन्होंने सूखी मछली और चावल के आटे की रोटी खाई थी। बदले में धर्मेंद्र स्थानीय लोगों को बिरयानी या उनके लिए विशेष रूप से पकाए गए भोजन देते थे।'
सिर्फ सुपरस्टार ही नहीं, क्रू के सदस्यों ने भी स्थानीय लोगों के साथ खाने की अदला बदली की। उन्होंने बताया कि वे अपने पेय पदार्थ ग्रामीणों को देते थे। गांव वाले उनके लिए घर का बना पेय लाते थे।
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शोले स्टार कास्ट
- फोटो : एक्स
गांव में हुई थी फिल्म की शूटिंग
शेलार ने बताया कि रमेश सिप्पी की फिल्म के कई दृश्य पनवेल-उरण मार्ग पर फिल्माए गए थे। हालांकि, शोले का ज्यादातर हिस्सा बेंगलुरु से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक चट्टानी पहाड़ी श्रृंखला में फिल्माया गया था।
फिल्म की पूरी टीम, जिसमें धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और हेमा मालिनी शामिल थे, पुराने पनवेल स्थित प्रवीण होटल में ठहरते थे। शेलार ने बताया कि घोड़ों को रखने के लिए होटल के पीछे जगह बनाई गई थी।
यह खबर भी पढ़ें: Sholay Cast: 50 साल बाद अब कैसी दिखती है 'शोले' की कास्ट? देखें धर्मेंद्र से लेकर हेमा मालिनी की तस्वीरें
शेलार ने बताया कि रमेश सिप्पी की फिल्म के कई दृश्य पनवेल-उरण मार्ग पर फिल्माए गए थे। हालांकि, शोले का ज्यादातर हिस्सा बेंगलुरु से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक चट्टानी पहाड़ी श्रृंखला में फिल्माया गया था।
फिल्म की पूरी टीम, जिसमें धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और हेमा मालिनी शामिल थे, पुराने पनवेल स्थित प्रवीण होटल में ठहरते थे। शेलार ने बताया कि घोड़ों को रखने के लिए होटल के पीछे जगह बनाई गई थी।
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पनवेल में फिलमाए गए 'शोले' के दृश्य
शेलार के मुताबिक जिस दृश्य में 'बसंती' (हेमा मालिनी) 'जय' (अमिताभ बच्चन) और 'वीरू' को रेलवे स्टेशन से रामगढ़ ले जाती हैं, वह दृश्य पनवेल रेलवे स्टेशन के पास फिल्माया गया था।
शूटिंग के वक्त सैकड़ों युवा और बच्चे काम और स्कूल छोड़कर शूटिंग देखने आते थे।
शेलार के मुताबिक जिस दृश्य में 'बसंती' (हेमा मालिनी) 'जय' (अमिताभ बच्चन) और 'वीरू' को रेलवे स्टेशन से रामगढ़ ले जाती हैं, वह दृश्य पनवेल रेलवे स्टेशन के पास फिल्माया गया था।
शूटिंग के वक्त सैकड़ों युवा और बच्चे काम और स्कूल छोड़कर शूटिंग देखने आते थे।
गैराज ने ली आम के बाग की जगह
जिस दृश्य में वीरू पिस्तौल से आमों पर निशाना साधता है, वह चिंचपाड़ा के आम के बाग में फिल्माया गया था। इस दृश्य में, वीरू बसंती को निशानेबाजी सिखाने के बहाने उसके साथ छेड़खानी करने की कोशिश करता है। आज आम के बाग की जगह एक वाहन गैराज ने ले ली है।
जिस दृश्य में वीरू पिस्तौल से आमों पर निशाना साधता है, वह चिंचपाड़ा के आम के बाग में फिल्माया गया था। इस दृश्य में, वीरू बसंती को निशानेबाजी सिखाने के बहाने उसके साथ छेड़खानी करने की कोशिश करता है। आज आम के बाग की जगह एक वाहन गैराज ने ले ली है।
इलाके के निवासियों को है गर्व
इलाके के निवासी पाटिल ने कहा 'हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे गांव इतने खूबसूरत थे कि निर्माता और निर्देशक उन्हें शूटिंग के लिए चुनते थे।'
सिर्फ 'शोले' ही नहीं, पनवेल-उरण रोड के किनारे कई गांव 'नास्तिक', 'यादों की बारात' और 'पापी' जैसी फिल्मों में भी दिखाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 'शोले' ने पीढ़ियों पर जो प्रभाव छोड़ा है, वह कुछ और ही है।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा 'यही बात है कि 50 साल बाद भी लोग उस शूटिंग स्थल पर जाते हैं, यही 'शोले' की असली सफलता है।'
इलाके के निवासी पाटिल ने कहा 'हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे गांव इतने खूबसूरत थे कि निर्माता और निर्देशक उन्हें शूटिंग के लिए चुनते थे।'
सिर्फ 'शोले' ही नहीं, पनवेल-उरण रोड के किनारे कई गांव 'नास्तिक', 'यादों की बारात' और 'पापी' जैसी फिल्मों में भी दिखाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 'शोले' ने पीढ़ियों पर जो प्रभाव छोड़ा है, वह कुछ और ही है।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा 'यही बात है कि 50 साल बाद भी लोग उस शूटिंग स्थल पर जाते हैं, यही 'शोले' की असली सफलता है।'

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