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PM मोदी के एलान पर CJP का पलटवार: कहा- मरहम नहीं, पेपर लीक रोकने की व्यवस्था चाहिए; शिक्षा मंत्री दें इस्तीफा

Thu, 23 Jul 2026 11:53 AM IST
Rahul Kumar Tiwari आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Thu, 23 Jul 2026 11:53 AM IST
सार

नीट-यूजी पेपर लीक पर पीएम नरेंद्र मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले एलान के बाद सीजेपी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सख्त सजा नहीं, बल्कि पेपर लीक रोकने की व्यवस्था और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही ही स्थायी समाधान है।

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CJP leader Ashutosh Ranka responded regarding matter of PM Modi statement on fast-track courts
आशुतोष रांका का आया बयान - फोटो : ANI/अमर उजाला GFX

विस्तार

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों को जल्द सख्त सजा दिलाने की घोषणा की। इस पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पेपर लीक के मूल कारणों पर सवाल उठाए।
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आशुतोष रांका ने कहा कि पेपर लीक इसलिए हो रहे हैं क्योंकि व्यवस्था में नाकाबिल लोग बैठे हैं। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के मन में डर पैदा करने की बात कही। रांका ने व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया ताकि पेपर लीक की गुंजिश न रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक एक संगठित गिरोह के जरिये होता है। इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक कई लोग शामिल होते हैं और आर्थिक लाभ उठाते हैं। रांका ने कहा कि केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था को बदलना जरूरी है। उन्होंने पीएम के एक्स पोस्ट पर टिप्पणी की कि यह चोट लगने के बाद मरहम लगाने जैसा है। उनकी लड़ाई चोट लगने के कारणों को लेकर है।

सीजेपी की मांगें और आरोप
आशुतोष रांका ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने बताया कि देश में कई बड़े मामलों में ऐसे कोर्ट बने, पर मूल समस्या खत्म नहीं हुई। सरकार ने मूल कारणों और व्यवस्था से जुड़ी खामियों को दूर नहीं किया। रांका ने शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं की जड़ अक्षमता और भ्रष्टाचार को बताया। उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय तक जाती है। रांका ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
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छात्रों और प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया
जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री को सबसे पहले छात्रों की आवाज सुननी चाहिए। लाखों युवा सड़क पर हैं, पर उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारी ने शांतिपूर्ण आंदोलन की बात कही और बातचीत से समाधान की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें आंदोलन का रास्ता बदलने पर मजबूर न किया जाए। एक अन्य छात्र ने संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।
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स्थायी समाधान की आवश्यकता
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस पूरे मामले का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। उन्होंने केवल मुद्दे को दबाने की कोशिश न करने की बात कही। एक प्रदर्शनकारी ने प्रधानमंत्री से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने को कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री से जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया, न कि केवल सामाजिक मंच पर बयान देने पर। एक युवक ने कहा कि केवल एक्स पोस्ट करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने जमीन पर कार्रवाई की आवश्यकता बताई। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार के वास्तविक कदम बयान से ज्यादा जरूरी हैं। उन्होंने ठोस कार्रवाई देखने की इच्छा व्यक्त की।



पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा ट्वीट पर लिखा कि, पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने, मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित विभागों और अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दे दिए गए हैं। पीएम मोदी ने कहा, विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक अहम कदम है।
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