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Ambala News: बिजली चोरी के आरोपी को किया बरी
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- साक्ष्यों के अभाव का मिला फायदा, कोर्ट ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। बिजली चोरी के मामले में विशेष अदालत के न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार ने आरोपी जसविंदर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित करने में विफल रहा। फैसले के अनुसार, मुख्य गवाह एसडीओ यशपाल राणा ने स्वीकार किया कि वह मौके पर मौजूद नहीं थे जबकि रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर थे।
लैब में मीटर टेस्टिंग के समय आरोपी को नियमानुसार कोई नोटिस नहीं दिया गया था। बिजली अधिनियम के नियमों के अनुसार, चेकिंग के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। इस मामले में काफी देरी की गई जिसका पुलिस ठोस कारण नहीं दे सकी। मीटर हटाने या चेकिंग के दौरान टीम ने किसी भी स्वतंत्र स्थानीय व्यक्ति को गवाह के तौर पर शामिल नहीं किया था।
अदालत ने यह की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि हो सकता है कि चोरी हुई हो और चोरी हुई है, के बीच लंबा फासला होता है जिसे केवल कानूनी और विश्वसनीय सबूतों से ही भरा जा सकता है। साक्ष्यों की कड़ी टूटने के कारण आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायाधीश ने आरोपी के निजी मुचलके को स्वीकार करते हुए उसे डिस्चार्ज करने के आदेश दिए। 7 अक्टूबर 2017 को उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की टीम ने नारायणगढ़ के गांव लोट्टों के निवासी जसविंदर सिंह के परिसर की जांच की थी। आरोप था कि मीटर जानबूझकर जलाया गया था जिससे निगम को करीब 1,37,708 रुपये का नुकसान हुआ। इस संबंध में फरवरी 2018 में थाना सिंचाई एवं बिजली, अंबाला में मामला दर्ज किया गया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। बिजली चोरी के मामले में विशेष अदालत के न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार ने आरोपी जसविंदर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित करने में विफल रहा। फैसले के अनुसार, मुख्य गवाह एसडीओ यशपाल राणा ने स्वीकार किया कि वह मौके पर मौजूद नहीं थे जबकि रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर थे।
लैब में मीटर टेस्टिंग के समय आरोपी को नियमानुसार कोई नोटिस नहीं दिया गया था। बिजली अधिनियम के नियमों के अनुसार, चेकिंग के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। इस मामले में काफी देरी की गई जिसका पुलिस ठोस कारण नहीं दे सकी। मीटर हटाने या चेकिंग के दौरान टीम ने किसी भी स्वतंत्र स्थानीय व्यक्ति को गवाह के तौर पर शामिल नहीं किया था।
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अदालत ने यह की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि हो सकता है कि चोरी हुई हो और चोरी हुई है, के बीच लंबा फासला होता है जिसे केवल कानूनी और विश्वसनीय सबूतों से ही भरा जा सकता है। साक्ष्यों की कड़ी टूटने के कारण आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायाधीश ने आरोपी के निजी मुचलके को स्वीकार करते हुए उसे डिस्चार्ज करने के आदेश दिए। 7 अक्टूबर 2017 को उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की टीम ने नारायणगढ़ के गांव लोट्टों के निवासी जसविंदर सिंह के परिसर की जांच की थी। आरोप था कि मीटर जानबूझकर जलाया गया था जिससे निगम को करीब 1,37,708 रुपये का नुकसान हुआ। इस संबंध में फरवरी 2018 में थाना सिंचाई एवं बिजली, अंबाला में मामला दर्ज किया गया था।