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Ambala News: मैदान न कोच, खेल छोड़ने को मजबूर खिलाड़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:54 AM IST
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No field, no coach, players forced to leave the game
विनोद राणा।
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क्षेत्र में एक ही खेल स्टेडियम, वह भी कई किलोमीटर दूर
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पूर्ण सिंह

बराड़ा। क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन सुविधाओं के अभाव में ये अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते। ग्राउंड से लेकर कोचिंग और उपकरणों तक, हर स्तर पर कमी साफ नजर आती है। क्षेत्र में एक ही खेल स्टेडियम है जो सरकपुर में है। यहां से कई गांव दूर हैं।
इस कारण खिलाड़ी यहां तक नहीं पहुंच पाते और यदि जो पहुंच जाते हैं, उन्हें यहां सुविधाएं नहीं मिलती। यहां न तो कोच है और न ही उपकरण। सुविधाएं न मिलने के कारण कई खिलाड़ी बीच में ही खेल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इससे क्षेत्र की खेल प्रतिभा लगातार प्रभावित हो रही है। जो खिलाड़ी अपने स्तर पर प्रैक्टिस करते हैं, वह किसी तरह अपने खर्च पर प्रतियोगिताओं में पहुंचकर नाम चमकाते हैं।
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थंबड़ के ग्राउंड में अपने स्तर पर युवाओं को नौकरी और खेलों के लिए कोंचिंग दे रहे कोच विनोद राणा का कहना है कि सुविधाएं न होने के कारण क्षेत्र के खिलाड़ी बड़े मुकाबलों में नहीं पहुंच पाते। गांवों में खेल मैदान होने चाहिए, जिससे युवा वहां प्रेक्टिस कर सकें। अगर ग्राउंड होगा तो उसमें कोच भी होगा जो खिलाडिय़ों को तराशने में मदद करेगा। विनोद राणा ने कहा कि प्रतिभाएं तो बहुत हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या आर्थिक मदद की आड़े आती है।

आर्थिक मदद की दरकार

धनौरा का खिलाड़ी विक्रम नेपाल में इंडो नेपाल गेम्स में तीन किमी दौड़ में रजत पदक हासिल किया। गरीब परिवार से संबंधित विक्रम अभी आर्थिक मदद की दरकार में है। विक्रम ने बताया कि न तो उन्हें कोच मिल रहा है और ना ही आर्थिक मदद, जिस कारण वह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। अंतराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल कर चुके विक्रम का कहना है कि उसका सपना है वह दुनिया में अपने अपने देश का नाम रोशन कर सके, लेकिन परिवार इतना समर्थ नहीं कि वह बड़े शहर में जाकर महंगी कोचिंग ले सकें।





दम तोड़ रहीं प्रतिभाएं : विनोद

कोच विनोद राणा से कोचिंग लेकर थंबड़ की भारती ने दौड़ में गोल्ड मेडल जीता और नेशनल गेम्स के लिए उनका चयन हुआ है। वहीं विनोद राणा की टीम से अंशिका पहले राज्य स्तर पर जीत हासिल कर चुकी हैं। अब भी दौड़ में उत्कृष्ट स्थान पर रहीं। कोच विनोद राणा ने बताया कि वर्ष 2013-14 में लगातार दो साल कुरूक्षेत्र युनिवर्सिटी की टीम उनकी कप्तानी में राष्ट्रीय स्तर पर इनाम जीतती रही। उस समय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें सम्मानित किया। ग्रामीण अंचल में प्रतिभाओं को निखाने के लिए वह गांव थंबड़ के मैदान में युवाओं को नौकरी में भर्ती और खेलों का अभ्यास करवाते हैं। अपने स्तर पर ही उन्हें बिना किसी आर्थिक मदद के खिलाडिय़ों को कोचिंग देनी पड़ रही है।

विनोद राणा।

विनोद राणा।

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