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Ambala News: कागजों में बाढ़ से बचाने के दावे, मिट्टी निकाली न बनाया बांध
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टांगरी नदी किनारे सरसेहड़ी-चंदपुरा तक अधूरा पड़ा बांध। प्रवक्ता
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- टांगरी नदी में 20 हजार मिट्टी के कट्टे रखने का दावा पर कहीं नजर नहीं आ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। मानसून नजदीक है लेकिन छावनी को बाढ़ से बचाने के प्रशासनिक दावे केवल कागजों में नजर आ रहे हैं। इससे पहाड़ों में होने वाली बारिश से एक बार फिर टांगरी नदी के उफान पर आने का खतरा मंडराने लगा है। नदी के बहाव क्षेत्र से न तो मिट्टी उठाई गई है और न ही प्रस्तावित बांध का निर्माण कार्य पूरा हो सका है। वहीं, जो 20 हजार मिट्टी के कट्टे रखने का दावा किया जा रहा है, वो कहीं नजर नहीं आ रहे। करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे बाढ़ नियंत्रण के कार्य धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। इसे लेकर नदी किनारे बसे चंदपुरा, रामपुर, सरसेहड़ी गांव, औद्योगिक क्षेत्र, करधान सहित कई कॉलोनियों के लोगों में रोष है।
समीक्षा बैठक में अफसरों का गोलमोल जवाब
शनिवार को जिला सचिवालय में आयोजित बाढ़ नियंत्रण की समीक्षा बैठक में सिंचाई विभाग और संबंधित अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बैठक के दौरान जब उपायुक्त ने तैयारियों की समीक्षा की तो अधिकारियों ने गोलमोल जवाब दिए। अधिकारियों ने डीसी को गुमराह करते हुए दावा किया कि नदी के भीतर खोदाई का काम तेजी से चल रहा है और बांध निर्माण का कार्य प्रगति पर है लेकिन पड़ताल में प्रशासनिक दावों की हकीकत बिल्कुल उलट नजर आई। वार्ड पार्षद 11 की पार्षद नीलम कश्यप और 14 के पार्षद हरमिंदर हीरा सहित अधूरे बांध को पूरा करवाने में जुटे स्थानीय निवासी कमल, रामचंद्र सैनी का कहना है कि वे कई महीनों से प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। हर जगह सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा।
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खोदाई तक नहीं हुई
हमें यहां रहते हुए लंबा समय हो गया है। हर साल मानसून में घरों में पानी घुस जाता है। दो साल पहले आई बाढ़ का मंजर हम आज तक नहीं भूले। प्रशासन केवल कागजों में काम दिखा रहा है, जमीन पर कोई खोदाई नहीं हुई है। वहीं, जो 20 हजार मिट्टी के कट्टे रखने का दावा किया जा रहा है वो कहीं नजर नहीं आ रहे।
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- कमल कांत, स्थानीय निवासी
पांच स्पैन अब भी बंद
नदी के तल में भारी मात्रा में गाद और मिट्टी जमी हुई है। इस वजह से थोड़ा सा पानी आते ही नदी ओवरफ्लो हो जाती है और पानी सीधे कॉलोनियों में घुस जाता है। हकीकत यह है कि न तो टांगरी नदी से गाद निकाली जा रही है और न ही मिट्टी। वहीं, टांगरी बांध के 5 स्पैन अब भी बंद हैं।
- रामचंद्र सैनी, स्थानीय निवासी
- टांगरी नदी से मिट्टी निकालने का कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जहां बांध की ऊंचाई कम है, वहां एजेंसी की मदद से मिट्टी के कट्टे लगाए जाएंगे।
- कृष्ण कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। मानसून नजदीक है लेकिन छावनी को बाढ़ से बचाने के प्रशासनिक दावे केवल कागजों में नजर आ रहे हैं। इससे पहाड़ों में होने वाली बारिश से एक बार फिर टांगरी नदी के उफान पर आने का खतरा मंडराने लगा है। नदी के बहाव क्षेत्र से न तो मिट्टी उठाई गई है और न ही प्रस्तावित बांध का निर्माण कार्य पूरा हो सका है। वहीं, जो 20 हजार मिट्टी के कट्टे रखने का दावा किया जा रहा है, वो कहीं नजर नहीं आ रहे। करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे बाढ़ नियंत्रण के कार्य धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। इसे लेकर नदी किनारे बसे चंदपुरा, रामपुर, सरसेहड़ी गांव, औद्योगिक क्षेत्र, करधान सहित कई कॉलोनियों के लोगों में रोष है।
समीक्षा बैठक में अफसरों का गोलमोल जवाब
शनिवार को जिला सचिवालय में आयोजित बाढ़ नियंत्रण की समीक्षा बैठक में सिंचाई विभाग और संबंधित अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बैठक के दौरान जब उपायुक्त ने तैयारियों की समीक्षा की तो अधिकारियों ने गोलमोल जवाब दिए। अधिकारियों ने डीसी को गुमराह करते हुए दावा किया कि नदी के भीतर खोदाई का काम तेजी से चल रहा है और बांध निर्माण का कार्य प्रगति पर है लेकिन पड़ताल में प्रशासनिक दावों की हकीकत बिल्कुल उलट नजर आई। वार्ड पार्षद 11 की पार्षद नीलम कश्यप और 14 के पार्षद हरमिंदर हीरा सहित अधूरे बांध को पूरा करवाने में जुटे स्थानीय निवासी कमल, रामचंद्र सैनी का कहना है कि वे कई महीनों से प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। हर जगह सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा।
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खोदाई तक नहीं हुई
हमें यहां रहते हुए लंबा समय हो गया है। हर साल मानसून में घरों में पानी घुस जाता है। दो साल पहले आई बाढ़ का मंजर हम आज तक नहीं भूले। प्रशासन केवल कागजों में काम दिखा रहा है, जमीन पर कोई खोदाई नहीं हुई है। वहीं, जो 20 हजार मिट्टी के कट्टे रखने का दावा किया जा रहा है वो कहीं नजर नहीं आ रहे।
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- कमल कांत, स्थानीय निवासी
पांच स्पैन अब भी बंद
नदी के तल में भारी मात्रा में गाद और मिट्टी जमी हुई है। इस वजह से थोड़ा सा पानी आते ही नदी ओवरफ्लो हो जाती है और पानी सीधे कॉलोनियों में घुस जाता है। हकीकत यह है कि न तो टांगरी नदी से गाद निकाली जा रही है और न ही मिट्टी। वहीं, टांगरी बांध के 5 स्पैन अब भी बंद हैं।
- रामचंद्र सैनी, स्थानीय निवासी
- टांगरी नदी से मिट्टी निकालने का कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जहां बांध की ऊंचाई कम है, वहां एजेंसी की मदद से मिट्टी के कट्टे लगाए जाएंगे।
- कृष्ण कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग

टांगरी नदी किनारे सरसेहड़ी-चंदपुरा तक अधूरा पड़ा बांध। प्रवक्ता

टांगरी नदी किनारे सरसेहड़ी-चंदपुरा तक अधूरा पड़ा बांध। प्रवक्ता