Haryana: अंबाला में 17 करोड़ की योजना में भ्रष्टाचार, तीन साल की जांच के बाद 16 के खिलाफ; महकमे में मचा हड़कंप
एसीबी की जांच में आया कि विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उन लोगों को योजना का लाभ दिया गया, जो इसके हकदार ही नहीं थे। नियमों के मुताबिक, आवेदन मिलने के बाद तहसील कल्याण अधिकारी को मौके पर जाकर मकान का भौतिक निरीक्षण करना होता है।
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अंबाला जिले में गरीब परिवारों के हकों पर डाका डालकर सरकारी धन की सरेआम बंदरबांट करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बीपीएल और अनुसूचित जाति के परिवारों के कच्चे मकानों की मरम्मत के लिए चलाई गई डॉ. भीमराव आंबेडकर मकान नवीनीकरण अनुदान योजना में अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से 17 करोड़ रुपये का बड़ा गोलमाल किया गया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने तीन साल तक चली गहन जांच के बाद गुरुवार को इस मामले में 16 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
बिना निरीक्षण बांटे गए करोड़ों रुपये
एसीबी की जांच में आया कि विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उन लोगों को योजना का लाभ दिया गया, जो इसके हकदार ही नहीं थे। नियमों के मुताबिक, आवेदन मिलने के बाद तहसील कल्याण अधिकारी को मौके पर जाकर मकान का भौतिक निरीक्षण करना होता है। लेकिन अधिकारियों ने धरातल पर उतरे बिना ही, सिर्फ कागजों में हवा-हवाई मकान दिखाकर आवेदन स्वीकृत कर दिए। यह पूरा खेल वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच खेला गया। इस अवधि में 3,922 लाभार्थियों को आरटीजीएस के जरिये 17 करोड़ 3 लाख 34 हजार रुपये की राशि जारी की गई।
एजेंटों ने पास रखे एटीएम कार्ड, काटा मोटा कमीशन
इस बड़े गोरखधंधे की जांच हरियाणा के मुख्य सचिव के निर्देश पर 15 जून 2022 को शुरू हुई थी। इसी बीच साहा निवासी रामस्वरूप की शिकायत ने मामले की परतें खोल दीं। जांच में सामने आया कि एजेंटों ने ही लाभार्थियों के बैंक खाते खुलवाए, लेकिन उनके एटीएम कार्ड अपने पास गिरवी रख लिए। जैसे ही सरकार से अनुदान खाते में आता, एजेंट अपना मोटा कमीशन निकालकर ही कार्ड लाभार्थियों को सौंपते थे।
अनुदान राशि बढ़ते ही तेज हुई धांधली
सरकार ने वर्ष 2018 में इस योजना के तहत दी जाने वाली राशि 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये और फिर 2021 में इसे 80 हजार रुपये कर दिया था। जांच में स्पष्ट हुआ है कि जैसे-जैसे सरकार ने अनुदान राशि बढ़ाई, अधिकारियों और दलालों की भूख भी बढ़ती गई और धांधली का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा।
इन अधिकारियों और एजेंटों पर गिरी गाज
विजिलेंस ने इस घोटाले में तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी कमल कुमार, वर्तमान जिला कल्याण अधिकारी शीशपाल, तत्कालीन तहसील कल्याण अधिकारी (बराड़ा) दीपिका और रुमाल कौर, जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय की उप अधीक्षक सुषमा समेत कई कर्मचारियों पर शिकंजा कसा है। इसके अलावा सतीश कुमार उर्फ रवि, समीर बक्शी उर्फ मन्नू और जसविंद्र सिंह उर्फ बिंदर जैसे एजेंटों पर भी केस दर्ज किया गया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
इन सभी पर धारा 120-बी आपराधिक साजिश, 409 लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग, 420 धोखाधड़ी, 467 मूल्यवान दस्तावेज की जालसाजी, 468 धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी, 471 जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। तहरीर में आरोप है कि अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंटों ने मिलकर योजना की पात्रता शर्तों को दरकिनार किया। एजेंट लाभार्थियों के बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड अपने पास रखते थे और अनुदान राशि जमा होते ही कथित कमीशन निकालने के बाद कार्ड वापस करते थे।