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दूरी बनाकर चलना वाहन चालक का कर्तव्य : ट्रिब्यूनल
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- सड़क हादसे का 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग वाली याचिका को किया खारिज
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि दुर्घटना दूसरे वाहन चालक की लापरवाही से हुई थी। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि वाहन चलाते समय पीछे चल रहे चालक का कर्तव्य है कि वह आगे वाले वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखे जिससे अचानक ब्रेक लगने की स्थिति में टक्कर को टाला जा सके।
बतौरा गांव निवासी मदन लाल ने याचिका दायर कर बताया था कि 26 अगस्त 2020 को जब वह अपनी मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। तब नारायणगढ़ बस स्टैंड रोड के पास एक कार ने उन्हें ओवरटेक किया और अचानक उनके आगे ब्रेक लगा दिए। इस टक्कर में मदन लाल के दोनों पैरों में फ्रैक्चर और सिर में गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने ड्राइवर, मालिक और इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजे की मांग की थी।
एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई
पीठासीन अधिकारी वीरेंद्र मलिक ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। न ही कोई मेडिकल लीगल रिपोर्ट पेश की गई जो यह साबित करे कि चोटें सड़क दुर्घटना में ही लगी थीं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि दूरी न बनाए रखना गलती है। पीछे चल रहे वाहन चालक की जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षित दूरी बनाए रखे। याचिकाकर्ता ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस भी पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि वह वाहन चलाने के लिए अधिकृत था। ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे प्रतिवादी चालक की लापरवाही सिद्ध हो सके। ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मदन लाल की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि बिना पुख्ता चिकित्सा रिकॉर्ड और दुर्घटना के साक्ष्यों के, विपक्षी चालक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
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अंबाला सिटी। मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि दुर्घटना दूसरे वाहन चालक की लापरवाही से हुई थी। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि वाहन चलाते समय पीछे चल रहे चालक का कर्तव्य है कि वह आगे वाले वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखे जिससे अचानक ब्रेक लगने की स्थिति में टक्कर को टाला जा सके।
बतौरा गांव निवासी मदन लाल ने याचिका दायर कर बताया था कि 26 अगस्त 2020 को जब वह अपनी मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। तब नारायणगढ़ बस स्टैंड रोड के पास एक कार ने उन्हें ओवरटेक किया और अचानक उनके आगे ब्रेक लगा दिए। इस टक्कर में मदन लाल के दोनों पैरों में फ्रैक्चर और सिर में गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने ड्राइवर, मालिक और इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजे की मांग की थी।
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एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई
पीठासीन अधिकारी वीरेंद्र मलिक ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। न ही कोई मेडिकल लीगल रिपोर्ट पेश की गई जो यह साबित करे कि चोटें सड़क दुर्घटना में ही लगी थीं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि दूरी न बनाए रखना गलती है। पीछे चल रहे वाहन चालक की जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षित दूरी बनाए रखे। याचिकाकर्ता ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस भी पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि वह वाहन चलाने के लिए अधिकृत था। ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे प्रतिवादी चालक की लापरवाही सिद्ध हो सके। ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मदन लाल की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि बिना पुख्ता चिकित्सा रिकॉर्ड और दुर्घटना के साक्ष्यों के, विपक्षी चालक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।