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Ambala News: ग्लासवेयर के बड़े उत्पादों का बंद किया उत्पादन
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ज्यादा एलपीजी की जरूरत के कारण उठाया कदम, कर्मचारियों को बैठाया घर
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। ग्लासवेयर (कांच) उद्योग इस समय ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। एलपीजी की भारी कमी और आपूर्ति में आ रही बाधाओं के कारण कांच की भटि्ठयां ठंडी पड़ने लगी हैं जिससे उत्पादन का ग्राफ तेजी से गिरा है। हालात यह हैं कि जिन ग्लासवेयर के जिन बड़े उत्पादों में ज्यादा एलपीजी लगती है उनका उत्पादन रोक दिया गया है।
इन कर्मचारियों को भी घर बैठाया गया है। सिर्फ छोटे उत्पाद बनाए जा रहे हैं। अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बाजार में कांच के उत्पादों की भारी किल्लत और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।
औद्योगिक एलपीजी की नियमित आपूर्ति न होने के कारण कुछ कारोबारियों ने घरेलू प्रयोग के एलपीजी सिलिंडर को प्रयोग में लाना शुरू किया है। उनका कहना है कि अगर ऐसा न करें तो कारोबार ठप पड़ जाएगा और कर्मचारियों को घर बैठाना पड़ेगा। हालांकि यह न तो सुरक्षित है और न ही औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त। छोटे स्तर की इकाइयां किसी तरह काम खींच रही हैं, लेकिन बड़े कारखानों में मशीनों को पूरी क्षमता से चलाना अब असंभव होता जा रहा है।
उत्पादन में गिरावट
एलपीजी की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। उत्पादन क्षमता में 30-40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। डिलीवरी के ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे निर्यात बाजार में भी साख खराब होने का डर है।
और बढ़ सकती है मुश्किल
ग्लासवेयर उद्योगपति डॉ. संजीव शर्मा का मानना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों ने एलपीजी के औद्योगिक कोटे को सुव्यवस्थित नहीं किया तो कई इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगी। आने वाले समय में मांग और अंतरराष्ट्रीय आडर्स को देखते हुए यह स्थिति उद्योग के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। फिलहाल उद्योग जगत को सरकार से किसी विशेष राहत पैकेज या ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले ठोस कदम का इंतजार है।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। ग्लासवेयर (कांच) उद्योग इस समय ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। एलपीजी की भारी कमी और आपूर्ति में आ रही बाधाओं के कारण कांच की भटि्ठयां ठंडी पड़ने लगी हैं जिससे उत्पादन का ग्राफ तेजी से गिरा है। हालात यह हैं कि जिन ग्लासवेयर के जिन बड़े उत्पादों में ज्यादा एलपीजी लगती है उनका उत्पादन रोक दिया गया है।
इन कर्मचारियों को भी घर बैठाया गया है। सिर्फ छोटे उत्पाद बनाए जा रहे हैं। अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बाजार में कांच के उत्पादों की भारी किल्लत और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।
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औद्योगिक एलपीजी की नियमित आपूर्ति न होने के कारण कुछ कारोबारियों ने घरेलू प्रयोग के एलपीजी सिलिंडर को प्रयोग में लाना शुरू किया है। उनका कहना है कि अगर ऐसा न करें तो कारोबार ठप पड़ जाएगा और कर्मचारियों को घर बैठाना पड़ेगा। हालांकि यह न तो सुरक्षित है और न ही औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त। छोटे स्तर की इकाइयां किसी तरह काम खींच रही हैं, लेकिन बड़े कारखानों में मशीनों को पूरी क्षमता से चलाना अब असंभव होता जा रहा है।
उत्पादन में गिरावट
एलपीजी की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। उत्पादन क्षमता में 30-40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। डिलीवरी के ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे निर्यात बाजार में भी साख खराब होने का डर है।
और बढ़ सकती है मुश्किल
ग्लासवेयर उद्योगपति डॉ. संजीव शर्मा का मानना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों ने एलपीजी के औद्योगिक कोटे को सुव्यवस्थित नहीं किया तो कई इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगी। आने वाले समय में मांग और अंतरराष्ट्रीय आडर्स को देखते हुए यह स्थिति उद्योग के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। फिलहाल उद्योग जगत को सरकार से किसी विशेष राहत पैकेज या ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले ठोस कदम का इंतजार है।