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Ambala News: अंबाला इंडस्ट्रियल एस्टेट को बाढ़ से बचाने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स
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कैंट के इंडस्टि्रयल एरिया में खड़े सफेदे के पेड़। संवाद
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- सुरक्षा दीवार बनाने में आड़े आ रहे 230 यूकेलिप्टस के पेड़ काटने की मांगी इजाजत, 17 को होगी सुनवाई
- उद्यमी बोले- पिछले वर्ष पानी भरने से हो चुका बड़ा नुकसान, इस बार बचाया जाए
वैभव शर्मा
अंबाला। मानसून की आहट के साथ ही अंबाला कैंट के एचएसआईआईडीसी इंडस्ट्रियल एस्टेट के उद्यमियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। पिछले वर्षों में आई बाढ़ के नुकसान से सबक लेते हुए अब हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
चैंबर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर इंडस्ट्रियल एस्टेट के चारों तरफ आरसीसी रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) बनाने के लिए आड़े आ रहे 230 यूकेलिप्टस के पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी है। इनमें से करीब 70 पेड़ पूरी तरह से सूख चुके हैं। उद्यमियों का कहना है कि अगर मानसून से पहले यह सुरक्षा दीवार नहीं बनी, तो इस बार भी औद्योगिक क्षेत्र में पानी भर जाएगा जिससे फैक्ट्रियों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पेड़ काटने पर हाईकोर्ट ने लगा रखी है रोक
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बीते 1 अप्रैल 2026 को पूरे हरियाणा में किसी भी प्रकार के पेड़ काटने पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यह सख्त कदम हरियाणा में महज 3.65 प्रतिशत वन क्षेत्र होने और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए उठाया था। इसी आदेश के चलते अंबाला में सुरक्षा दीवार का काम अटक गया है।
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पिछली बार डूब गई थी फैक्ट्रियां
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रुपिंदर एस. खोसला और वकील सर्वेश मलिक ने कोर्ट को बताया कि वे पर्यावरण संरक्षण के फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन इस पूर्ण प्रतिबंध से व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। अंबाला के आर्य नगर निवासी आशवंत गुप्ता की ओर से दायर इस अर्जी में कहा गया है कि मानसून सिर पर है। अगर रिटेनिंग वॉल का निर्माण तुरंत शुरू नहीं हुआ, तो ड्रेनेज ओवरफ्लो होने से पूरी इंडस्ट्री जलमग्न हो जाएगी।
कोर्ट ने अन्य मामलों में दी है राहत
इसी जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने बहादुरगढ़ के मुंगेशपुर ड्रेन के पास 149 पेड़ काटने की शर्तिया मंजूरी दी थी, जहां प्रशासन को 10 गुना ज्यादा (यानी 1490) पौधे लगाने का आदेश दिया गया था। अब देखना यह होगा कि क्या हाईकोर्ट अंबाला के उद्यमियों को भी भारी नुकसान से बचाने के लिए क्षतिपूरक वनीकरण की शर्त पर पेड़ काटने की ढील देता है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी। इसी पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
- उद्यमी बोले- पिछले वर्ष पानी भरने से हो चुका बड़ा नुकसान, इस बार बचाया जाए
वैभव शर्मा
अंबाला। मानसून की आहट के साथ ही अंबाला कैंट के एचएसआईआईडीसी इंडस्ट्रियल एस्टेट के उद्यमियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। पिछले वर्षों में आई बाढ़ के नुकसान से सबक लेते हुए अब हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
चैंबर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर इंडस्ट्रियल एस्टेट के चारों तरफ आरसीसी रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) बनाने के लिए आड़े आ रहे 230 यूकेलिप्टस के पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी है। इनमें से करीब 70 पेड़ पूरी तरह से सूख चुके हैं। उद्यमियों का कहना है कि अगर मानसून से पहले यह सुरक्षा दीवार नहीं बनी, तो इस बार भी औद्योगिक क्षेत्र में पानी भर जाएगा जिससे फैक्ट्रियों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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पेड़ काटने पर हाईकोर्ट ने लगा रखी है रोक
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बीते 1 अप्रैल 2026 को पूरे हरियाणा में किसी भी प्रकार के पेड़ काटने पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यह सख्त कदम हरियाणा में महज 3.65 प्रतिशत वन क्षेत्र होने और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए उठाया था। इसी आदेश के चलते अंबाला में सुरक्षा दीवार का काम अटक गया है।
पिछली बार डूब गई थी फैक्ट्रियां
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रुपिंदर एस. खोसला और वकील सर्वेश मलिक ने कोर्ट को बताया कि वे पर्यावरण संरक्षण के फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन इस पूर्ण प्रतिबंध से व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। अंबाला के आर्य नगर निवासी आशवंत गुप्ता की ओर से दायर इस अर्जी में कहा गया है कि मानसून सिर पर है। अगर रिटेनिंग वॉल का निर्माण तुरंत शुरू नहीं हुआ, तो ड्रेनेज ओवरफ्लो होने से पूरी इंडस्ट्री जलमग्न हो जाएगी।
कोर्ट ने अन्य मामलों में दी है राहत
इसी जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने बहादुरगढ़ के मुंगेशपुर ड्रेन के पास 149 पेड़ काटने की शर्तिया मंजूरी दी थी, जहां प्रशासन को 10 गुना ज्यादा (यानी 1490) पौधे लगाने का आदेश दिया गया था। अब देखना यह होगा कि क्या हाईकोर्ट अंबाला के उद्यमियों को भी भारी नुकसान से बचाने के लिए क्षतिपूरक वनीकरण की शर्त पर पेड़ काटने की ढील देता है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी। इसी पर सभी की निगाहें टिकी हैं।