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बागवानी विभाग : दो साल में दर्ज हुईं दो प्राथमिकी
Fri, 07 Aug 2026 02:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:44 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। अंबाला का बागवानी विभाग प्रदेशभर में घोटालों का केंद्र बन गया है। दो साल में तीन घोटाले सामने आए हैं। इनमें से एक मामला तो वर्ष 2024 से चल रहा है।
इसमें आरोपी प्यादे तो गिरफ्तार हुए पर जिला स्तरीय अधिकारियों पर जांच एजेंसियां शिकंजा नहीं कस सकीं। अब एसीबी ने हाल ही में दो और मामले दर्ज किए हैं।
केस-1 : वर्ष 2024 में सीएम फ्लाइंग टीम ने बागवानी विभाग में मशरूम स्टैकिंग योजना और लो टनल योजना के नाम पर 40 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। जांच में तत्कालीन जिला बागवानी अधिकारी (डीएचओ) वीरेंद्र और दिनेश, अकाउंटेंट गुरविंदर सिंह व बलविंदर सिंह, बीएचसी अंकुश व शिवम और माली हैप्पी सिंह सहित अन्य पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद मामला बड़ा निकला तो वर्ष 2025 जनवरी में जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया था। पुलिस इस मामले में पांच कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एसआईटी की जांच में आठ लोगों के नाम सामने आए थे। इसमें तत्कालीन बागवानी अधिकारी सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे।
केस-2 : राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बागवानी विभाग में हुए एक बड़े घोटाले पर हाल ही में प्राथमिकी दर्ज की। इसमें भी जिला स्तरीय अधिकारी व अन्य लोग फंसे हैं। जांच में सामने आया कि कागजों पर फर्जी बाग दिखाकर सब्सिडी हड़प ली गई थी। जिन स्थानों पर बाग होने का दावा किया गया था, वहां वास्तव में कोई बाग मौजूद नहीं थे। इसके अतिरिक्त, जहां वर्मी कंपोस्ट के उपयोग को बढ़ावा दिया गया, वहां बागवानी फसलें नहीं मिले। पुराने बागों की केवल मरम्मत दिखाकर भी खानापूर्ति की गई थी। इस प्रकार सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। इस मामले में अभी रिकॉर्ड लिया जा रहा है।
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अंबाला। अंबाला का बागवानी विभाग प्रदेशभर में घोटालों का केंद्र बन गया है। दो साल में तीन घोटाले सामने आए हैं। इनमें से एक मामला तो वर्ष 2024 से चल रहा है।
इसमें आरोपी प्यादे तो गिरफ्तार हुए पर जिला स्तरीय अधिकारियों पर जांच एजेंसियां शिकंजा नहीं कस सकीं। अब एसीबी ने हाल ही में दो और मामले दर्ज किए हैं।
केस-1 : वर्ष 2024 में सीएम फ्लाइंग टीम ने बागवानी विभाग में मशरूम स्टैकिंग योजना और लो टनल योजना के नाम पर 40 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। जांच में तत्कालीन जिला बागवानी अधिकारी (डीएचओ) वीरेंद्र और दिनेश, अकाउंटेंट गुरविंदर सिंह व बलविंदर सिंह, बीएचसी अंकुश व शिवम और माली हैप्पी सिंह सहित अन्य पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद मामला बड़ा निकला तो वर्ष 2025 जनवरी में जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया था। पुलिस इस मामले में पांच कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एसआईटी की जांच में आठ लोगों के नाम सामने आए थे। इसमें तत्कालीन बागवानी अधिकारी सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे।
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केस-2 : राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बागवानी विभाग में हुए एक बड़े घोटाले पर हाल ही में प्राथमिकी दर्ज की। इसमें भी जिला स्तरीय अधिकारी व अन्य लोग फंसे हैं। जांच में सामने आया कि कागजों पर फर्जी बाग दिखाकर सब्सिडी हड़प ली गई थी। जिन स्थानों पर बाग होने का दावा किया गया था, वहां वास्तव में कोई बाग मौजूद नहीं थे। इसके अतिरिक्त, जहां वर्मी कंपोस्ट के उपयोग को बढ़ावा दिया गया, वहां बागवानी फसलें नहीं मिले। पुराने बागों की केवल मरम्मत दिखाकर भी खानापूर्ति की गई थी। इस प्रकार सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। इस मामले में अभी रिकॉर्ड लिया जा रहा है।
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