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Ambala News: सेक्टर-7 के तालाब पर संकट, एचएसवीपी ने एनजीटी में कहा उनका कोई लेना देना नहीं
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अंबाला सिटी। सेक्टर-7 स्थित करीब 32.69 एकड़ में फैले ऐतिहासिक तालाब के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इस मामले में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अपना जवाब दाखिल कर स्पष्ट कर दिया है कि विवादित भूमि उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है। एचएसवीपी ने कोर्ट से प्रार्थना की है कि उनका नाम इस मामले से हटाया जाए। अब सबकी नजरें नगर निगम और हरियाणा सरकार के जवाब पर टिकी हैं। वे इस बेशकीमती जल निकाय को भू-माफिया से बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
यह था मामला
अखिलेश चोपड़ा बनाम हरियाणा राज्य मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सेक्टर-7 स्थित खसरा नंबर 260, 261, 331 और 333 से 349 सहित अन्य जमीनों पर स्थित इस तालाब को निजी लोगों द्वारा मिट्टी और रेत से भरा जा रहा है। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से इस प्राकृतिक जल संचयन क्षेत्र को खत्म किया जा रहा है, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
एचएसवीपी का जवाब : हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं
अंबाला के संपदा अधिकारी दर्शन कुमार ने हलफनामे के जरिए ट्रिब्यूनल को बताया कि यह जमीन पुराने नगर निगम क्षेत्र में आती है। इसलिए किसी भी अवैध निर्माण या कब्जे पर कार्रवाई का अधिकार नगर निगम, अंबाला और शहरी स्थानीय निकाय विभाग का है। हालांकि 1982 और 1983 में इस जमीन के अधिग्रहण के लिए धारा 4 और 6 के तहत नोटिस जारी हुए थे, लेकिन लैंड एक्विजिशन कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि इस जमीन का कभी अवार्ड घोषित ही नहीं हुआ। विभाग ने माना कि इस तालाब को निजी व्यक्तियों द्वारा भरा जा रहा है और यह एचएसवीपी की सीमाओं से बाहर है।
नक्शे की विश्वसनीयता पर सवाल
याचिकाकर्ता ने जिस ले-आउट प्लान का हवाला दिया था, उसे एचएसवीपी ने सिरे से खारिज कर दिया है। विभाग का कहना है कि इस ड्राइंग पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही इसे मुख्य प्रशासक द्वारा अनुमोदित किया गया है।
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अखिलेश चोपड़ा बनाम हरियाणा राज्य मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सेक्टर-7 स्थित खसरा नंबर 260, 261, 331 और 333 से 349 सहित अन्य जमीनों पर स्थित इस तालाब को निजी लोगों द्वारा मिट्टी और रेत से भरा जा रहा है। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से इस प्राकृतिक जल संचयन क्षेत्र को खत्म किया जा रहा है, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
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एचएसवीपी का जवाब : हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं
अंबाला के संपदा अधिकारी दर्शन कुमार ने हलफनामे के जरिए ट्रिब्यूनल को बताया कि यह जमीन पुराने नगर निगम क्षेत्र में आती है। इसलिए किसी भी अवैध निर्माण या कब्जे पर कार्रवाई का अधिकार नगर निगम, अंबाला और शहरी स्थानीय निकाय विभाग का है। हालांकि 1982 और 1983 में इस जमीन के अधिग्रहण के लिए धारा 4 और 6 के तहत नोटिस जारी हुए थे, लेकिन लैंड एक्विजिशन कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि इस जमीन का कभी अवार्ड घोषित ही नहीं हुआ। विभाग ने माना कि इस तालाब को निजी व्यक्तियों द्वारा भरा जा रहा है और यह एचएसवीपी की सीमाओं से बाहर है।
नक्शे की विश्वसनीयता पर सवाल
याचिकाकर्ता ने जिस ले-आउट प्लान का हवाला दिया था, उसे एचएसवीपी ने सिरे से खारिज कर दिया है। विभाग का कहना है कि इस ड्राइंग पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही इसे मुख्य प्रशासक द्वारा अनुमोदित किया गया है।