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Ambala News: अधिसूचना जारी न होने पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे प्रशिक्षु पटवारी
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पंचकूला के सेक्टर पांच में धरने पर बैठे प्रशिक्षु पटवारी। प्रवक्ता
- फोटो : Samvad
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प्रशिक्षण अवधि को डेढ़ साल से घटाकर एक साल और इस अवधि को नियमित सेवा में शामिल करना मुख्य मांगों में शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अधिसूचना जारी न होने पर हरियाणा के प्रशिक्षु पटवारी पंचकूला में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। हरियाणा के प्रशिक्षु पटवारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में सरकार और विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अंबाला में करीब 49 प्रशिक्षु पटवारी हैं जो डेढ़ साल से अंबाला सिटी, अंबाला छावनी, बराडा, नारायणगढ़ की तहसील और साहा, मुलाना, शहजादपुर की उपतहसील में कार्य कर रहे थे। हालांकि इन प्रशिक्षु पटवारियों के धरने पर जाने से तहसील और पटवारखाने में कोई फर्क नहीं पड़ा जबकि पटवारखाने खुले रहे और पटवारी काम करते रहे।
सरकार ने नहीं सुनीं : संदीप
प्रशिक्षु पटवारियों में संदीप ने बताया कि 7 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री की ओर से उनके लिए कई अहम घोषणाएं की गई थीं। इनमें प्रशिक्षण अवधि को डेढ़ साल से घटाकर एक साल करना, इस अवधि को नियमित सेवा में शामिल करना और प्रशिक्षण के दौरान पूर्ण वेतन देना शामिल था। आरोप है कि 15 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है।
प्रशिक्षण की अवधि बढ़ाने पर रोष
पटवारियों में रोष तब और बढ़ गया जब 10 मार्च 2026 को जारी एक नए नोटिस के जरिए उनकी प्रशिक्षण अवधि को चार माह और बढ़ा दिया गया। पटवारियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए निर्णय लिया है कि जब तक अधिसूचना जारी नहीं होती, वह डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसे चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे कार्य नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रशिक्षु पटवारियों के पास न तो जीवन बीमा है, न स्वास्थ्य बीमा और न ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। पटवारियों का कहना है कि बिना किसी सुरक्षा कवर के उनसे जोखिम भरे कार्य करवाए जा रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अधिसूचना जारी न होने पर हरियाणा के प्रशिक्षु पटवारी पंचकूला में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। हरियाणा के प्रशिक्षु पटवारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में सरकार और विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अंबाला में करीब 49 प्रशिक्षु पटवारी हैं जो डेढ़ साल से अंबाला सिटी, अंबाला छावनी, बराडा, नारायणगढ़ की तहसील और साहा, मुलाना, शहजादपुर की उपतहसील में कार्य कर रहे थे। हालांकि इन प्रशिक्षु पटवारियों के धरने पर जाने से तहसील और पटवारखाने में कोई फर्क नहीं पड़ा जबकि पटवारखाने खुले रहे और पटवारी काम करते रहे।
सरकार ने नहीं सुनीं : संदीप
प्रशिक्षु पटवारियों में संदीप ने बताया कि 7 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री की ओर से उनके लिए कई अहम घोषणाएं की गई थीं। इनमें प्रशिक्षण अवधि को डेढ़ साल से घटाकर एक साल करना, इस अवधि को नियमित सेवा में शामिल करना और प्रशिक्षण के दौरान पूर्ण वेतन देना शामिल था। आरोप है कि 15 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है।
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प्रशिक्षण की अवधि बढ़ाने पर रोष
पटवारियों में रोष तब और बढ़ गया जब 10 मार्च 2026 को जारी एक नए नोटिस के जरिए उनकी प्रशिक्षण अवधि को चार माह और बढ़ा दिया गया। पटवारियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए निर्णय लिया है कि जब तक अधिसूचना जारी नहीं होती, वह डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसे चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे कार्य नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रशिक्षु पटवारियों के पास न तो जीवन बीमा है, न स्वास्थ्य बीमा और न ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। पटवारियों का कहना है कि बिना किसी सुरक्षा कवर के उनसे जोखिम भरे कार्य करवाए जा रहे हैं।