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Bhiwani News: बंदरों के खौफ से सहमा बचपन
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गांव देवराला में स्कूल के बाहर बैठे बंदर।
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कैरू। गांव देवराला में बंदरों के खौफ से स्कूली बच्चों का बचपन सहमा हुआ है। स्कूल के सामने, घरों की छतों और गलियों में बंदरों का झुंड डेरा जमाए रहता है। खासकर प्राइमरी स्कूल के रास्ते पर छोटे बच्चों के स्कूल जाने के समय बंदर रास्ते में बैठ जाते हैं।
स्कूल की दीवारों पर बैठे बंदर बच्चों की तरफ घूरते हैं तो बच्चे डरकर दौड़ते हुए कक्षा-कक्ष में पहुंचकर बचाव करते हैं। कई बार बंदरों से बचने के दौरान बच्चे दौड़कर गिरने से चोटिल भी हो चुके हैं। बंदरों की बढ़ती संख्या के बावजूद ग्राम पंचायत की ओर से समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार पहले की तुलना में अब गांव में बंदरों की संख्या बढ़ गई है। सरकारी स्कूल के आसपास बंदरों का उत्पात अधिक है। ग्राम पंचायत के संज्ञान में मामला होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे बच्चों के साथ अभिभावकों में भी डर बना हुआ है।
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पंचायत के साथ-साथ गांव युवा क्लब ने चंदा एकत्रित करके बंदरों को पकड़वाने की कोशिश की गई थी लेकिन पंचायत के जिम्मेदारों ने इसमें रुचि नहीं ली। इसका बुरा प्रभाव स्कूली बच्चों पर हो रहा है। अब अभिभावक बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं। बच्चे सुरक्षा के घेरे से बाहर हैं। किसी भी समय बंदरों का हमला हो सकता है। - संदीप लाला, युवा क्लब सलाहकार देवराला।
सुबह सैर करने के लिए डंडा लेकर जाना पड़ता है। बंदरों का कहर एकदम से ऊपर आता है। छत पर जाना भी मुश्किल हो गया है। दो-तीन बार बच्चों पर हमले हो चुके हैं। ग्राम पंचायत की ओर से इसका कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। - भतेरी, पूर्व पंच।
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स्कूल की दीवारों पर बैठे बंदर बच्चों की तरफ घूरते हैं तो बच्चे डरकर दौड़ते हुए कक्षा-कक्ष में पहुंचकर बचाव करते हैं। कई बार बंदरों से बचने के दौरान बच्चे दौड़कर गिरने से चोटिल भी हो चुके हैं। बंदरों की बढ़ती संख्या के बावजूद ग्राम पंचायत की ओर से समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है।
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ग्रामीणों के अनुसार पहले की तुलना में अब गांव में बंदरों की संख्या बढ़ गई है। सरकारी स्कूल के आसपास बंदरों का उत्पात अधिक है। ग्राम पंचायत के संज्ञान में मामला होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे बच्चों के साथ अभिभावकों में भी डर बना हुआ है।
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पंचायत के साथ-साथ गांव युवा क्लब ने चंदा एकत्रित करके बंदरों को पकड़वाने की कोशिश की गई थी लेकिन पंचायत के जिम्मेदारों ने इसमें रुचि नहीं ली। इसका बुरा प्रभाव स्कूली बच्चों पर हो रहा है। अब अभिभावक बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं। बच्चे सुरक्षा के घेरे से बाहर हैं। किसी भी समय बंदरों का हमला हो सकता है। - संदीप लाला, युवा क्लब सलाहकार देवराला।
सुबह सैर करने के लिए डंडा लेकर जाना पड़ता है। बंदरों का कहर एकदम से ऊपर आता है। छत पर जाना भी मुश्किल हो गया है। दो-तीन बार बच्चों पर हमले हो चुके हैं। ग्राम पंचायत की ओर से इसका कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। - भतेरी, पूर्व पंच।