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Bhiwani News: साइबर ठगों का नया जाल.. जिप फाइल से हो रही बैंक खातों पर सेंध, 88 मामलों में 27.5 लाख की रिकवरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 12:37 AM IST
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A new trap by cyber fraudsters: bank accounts compromised via ZIP files; 27.5 lakh recovered across 88 cases.
ढिगावामंडी। साइबर ठगी के मामलों में शातिर बदमाश नए-नए तरीकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी कर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। जून माह में जिला साइबर क्राइम पुलिस थाना में 88 ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हुईं जिनमें समय रहते शिकायत मिलने पर पुलिस ने पीड़ितों के करीब साढ़े 27 लाख रुपये रिकवर कराए हैं। अब साइबर ठग एपीके फाइल की जगह जिप फाइल के जरिए बैंक खातों को हैक कर रकम उड़ाने का तरीका अपना रहे हैं।
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वहीं एक लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी पर अब शून्य एफआईआर दर्ज किए जाने का प्रावधान लागू किया गया है। भिवानी जिले में ढिगावा के एक व्यापारी से 1.81 लाख रुपये की ठगी के मामले में पहली शून्य एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने 1.50 लाख रुपये की रिकवरी भी की। पीड़ित नवीन कुमार ने बताया कि 15 मई को उनके खाते से 90 हजार रुपये और 18 मई को 91 हजार रुपये निकाल लिए गए। ट्रांजेक्शन की जानकारी उन्हें फोन पर मिली जिसके बाद उन्होंने तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। गोल्डन ऑवर में शिकायत दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम पुलिस थाने में शून्य एफआईआर दर्ज हुई और जांच में पुलिस ने करीब 1.50 लाख रुपये रिकवर किए। जांच में सामने आया कि साइबर ठगों ने व्हाट्सएप पर मूवी डाउनलोड लिंक भेजा था जिसे क्लिक करते ही खाते से रकम उड़ गई।
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तुरंत शिकायत से मिली मदद
नवीन ने धोखाधड़ी होते ही साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दी। साइबर सेल ने बैंक डिटेल के आधार पर ट्रांजेक्शन ट्रैक किया। नैनीताल में करेंसी बदलने वाले के खाते में अंतिम ट्रांजेक्शन मिलने पर उसे हिरासत में लिया गया और 1.50 लाख रुपये की रिकवरी की गई। 18 मई वाले मामले की जांच जारी है।
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जून में 88 मामलों में 27.5 लाख की रिकवरी
साइबर क्राइम थाना एसएचओ विकास कुमार ने बताया कि जून में दर्ज 88 मामलों में करीब साढ़े 27 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के आह्वान पर एक लाख से अधिक की ठगी पर शून्य एफआईआर दर्ज की जा रही है जिससे कार्रवाई तेज हुई है और रिकवरी में भी सुधार हुआ है।



साइबर ठग अब मनी म्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये पहले सीएससी संचालकों या आम लोगों के खातों में पैसा डालते हैं फिर उसे क्रिप्टो में बदलकर निकाल लेते हैं। बीच वाले लोग अनजाने में फंस जाते हैं। ढिगावा मामले में पीड़ित ने तुरंत 1930 पर कॉल किया इसलिए साइबर सेल ने समय रहते खातों को फ्रीज कर रिकवरी कर ली। लोगों से अपील है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें ओटीपी शेयर न करें और खाते में अचानक रकम आने पर तुरंत बैंक और 1930 पर सूचना दें। ऑनलाइन धोखाधड़ी में पहले एक घंटे को गोल्डन ऑवर कहा जाता है जिसमें 80 फीसदी मामलों में रकम वापस मिल जाती है। -संजीव गौड़ डीएसपी लोहारू
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